धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर शिवसेना (यूबीटी) का तंज: 'बच्चों की भावना न समझी तो और आंदोलन आएंगे'
सारांश
मुख्य बातें
शिवसेना (यूबीटी) के प्रवक्ता आनंद दुबे ने 26 जुलाई को मुंबई में केंद्र सरकार पर कड़ा प्रहार किया, यह कहते हुए कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा बहुत देर से आया और अगर सरकार ने अब भी युवाओं की भावनाओं को नहीं समझा, तो आने वाले समय में और बड़े आंदोलनों का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने इस इस्तीफे को किसी एक दल की नहीं, बल्कि देश के करोड़ों छात्रों की जीत बताया।
इस्तीफा जनवरी में ही आना चाहिए था
दुबे ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान को यह कदम जनवरी-फरवरी में ही उठाना चाहिए था, जब यूजीसी विवाद पहली बार सामने आया था। उनके अनुसार, उस समय एक विशेष वर्ग के छात्रों के साथ अन्याय हो रहा था और तभी से शिवसेना (यूबीटी) लगातार इस्तीफे की मांग करती रही। व्यंग्यात्मक लहजे में उन्होंने कहा, 'बहुत देर से दर पे आंखें लगी थीं, हुजूर आते-आते बहुत देर कर दी।'
नीट पेपर लीक ने बढ़ाई मांग
मई में नीट पेपर लीक सामने आने के बाद विपक्ष की इस्तीफे की मांग और तेज हो गई। दुबे ने कहा, 'मई बीता, जून बीता और आखिरकार जुलाई के आखिरी सप्ताह में उन्होंने इस्तीफा दिया।' यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में छात्र परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता को लेकर सड़कों पर उतरे हुए हैं।
युवाओं की भावना समझने की चेतावनी
दुबे ने सरकार को स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा, 'आज के बच्चों को समझ लीजिए। वे क्या चाहते हैं, उनकी भावनाओं को समझिए। नहीं तो बहुत सारे आंदोलनों से गुजरना पड़ेगा।' उन्होंने कहा कि जब आंदोलन जनांदोलन का रूप लेता है तो विपक्षी दलों का उसमें शामिल होना स्वाभाविक है, ठीक वैसे जैसे 2012-13 में अन्ना हजारे के आंदोलन में गैर-कांग्रेस नेता शामिल हुए थे।
सरकार पर राजनीतिक दबाव
दुबे ने कहा कि इस इस्तीफे का श्रेय किसी एक पार्टी को नहीं जाता। उनके शब्दों में, 'यह करोड़ों छात्रों की जीत है और देश की जीत है।' साथ ही उन्होंने सरकार को 2029 के चुनावों से पहले जागने की नसीहत दी, यह कहते हुए कि जो सरकार समय रहते जागेगी उसे फायदा होगा, अन्यथा नुकसान उठाना पड़ेगा।
आगे क्या
गौरतलब है कि शिक्षा मंत्रालय में नेतृत्व परिवर्तन के बाद नीट और यूजीसी विवाद पर सरकार की अगली नीतिगत प्रतिक्रिया पर सबकी नजरें टिकी हैं। विपक्ष ने संकेत दिया है कि यदि ठोस सुधार नहीं हुए तो छात्र आंदोलन जारी रह सकते हैं।