26 जुलाई 2026
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धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर शिवसेना (यूबीटी) का तंज: 'बच्चों की भावना न समझी तो और आंदोलन आएंगे'

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धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर शिवसेना (यूबीटी) का तंज: 'बच्चों की भावना न समझी तो और आंदोलन आएंगे'

सारांश

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को शिवसेना (यूबीटी) ने 'देर से आई सुध' बताया। प्रवक्ता आनंद दुबे ने कहा — यह जीत किसी पार्टी की नहीं, करोड़ों छात्रों की है। चेतावनी दी कि सरकार अब भी न जागी तो और बड़े आंदोलन आएंगे।

मुख्य बातें

शिवसेना (यूबीटी) प्रवक्ता आनंद दुबे ने 26 जुलाई को मुंबई में केंद्र सरकार पर तंज कसा।
दुबे के अनुसार धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा जनवरी-फरवरी में यूजीसी विवाद के समय ही दे देना चाहिए था।
नीट पेपर लीक के बाद मई से इस्तीफे की मांग तेज हुई, अंततः जुलाई के आखिरी सप्ताह में इस्तीफा आया।
दुबे ने सरकार को चेताया — युवाओं की भावना न समझी तो 'बहुत सारे आंदोलनों से गुजरना पड़ेगा।' इस्तीफे को करोड़ों छात्रों की जीत बताया; 2029 से पहले सरकार को जागने की नसीहत दी।

शिवसेना (यूबीटी) के प्रवक्ता आनंद दुबे ने 26 जुलाई को मुंबई में केंद्र सरकार पर कड़ा प्रहार किया, यह कहते हुए कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा बहुत देर से आया और अगर सरकार ने अब भी युवाओं की भावनाओं को नहीं समझा, तो आने वाले समय में और बड़े आंदोलनों का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने इस इस्तीफे को किसी एक दल की नहीं, बल्कि देश के करोड़ों छात्रों की जीत बताया।

इस्तीफा जनवरी में ही आना चाहिए था

दुबे ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान को यह कदम जनवरी-फरवरी में ही उठाना चाहिए था, जब यूजीसी विवाद पहली बार सामने आया था। उनके अनुसार, उस समय एक विशेष वर्ग के छात्रों के साथ अन्याय हो रहा था और तभी से शिवसेना (यूबीटी) लगातार इस्तीफे की मांग करती रही। व्यंग्यात्मक लहजे में उन्होंने कहा, 'बहुत देर से दर पे आंखें लगी थीं, हुजूर आते-आते बहुत देर कर दी।'

नीट पेपर लीक ने बढ़ाई मांग

मई में नीट पेपर लीक सामने आने के बाद विपक्ष की इस्तीफे की मांग और तेज हो गई। दुबे ने कहा, 'मई बीता, जून बीता और आखिरकार जुलाई के आखिरी सप्ताह में उन्होंने इस्तीफा दिया।' यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में छात्र परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता को लेकर सड़कों पर उतरे हुए हैं।

युवाओं की भावना समझने की चेतावनी

दुबे ने सरकार को स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा, 'आज के बच्चों को समझ लीजिए। वे क्या चाहते हैं, उनकी भावनाओं को समझिए। नहीं तो बहुत सारे आंदोलनों से गुजरना पड़ेगा।' उन्होंने कहा कि जब आंदोलन जनांदोलन का रूप लेता है तो विपक्षी दलों का उसमें शामिल होना स्वाभाविक है, ठीक वैसे जैसे 2012-13 में अन्ना हजारे के आंदोलन में गैर-कांग्रेस नेता शामिल हुए थे।

सरकार पर राजनीतिक दबाव

दुबे ने कहा कि इस इस्तीफे का श्रेय किसी एक पार्टी को नहीं जाता। उनके शब्दों में, 'यह करोड़ों छात्रों की जीत है और देश की जीत है।' साथ ही उन्होंने सरकार को 2029 के चुनावों से पहले जागने की नसीहत दी, यह कहते हुए कि जो सरकार समय रहते जागेगी उसे फायदा होगा, अन्यथा नुकसान उठाना पड़ेगा।

आगे क्या

गौरतलब है कि शिक्षा मंत्रालय में नेतृत्व परिवर्तन के बाद नीट और यूजीसी विवाद पर सरकार की अगली नीतिगत प्रतिक्रिया पर सबकी नजरें टिकी हैं। विपक्ष ने संकेत दिया है कि यदि ठोस सुधार नहीं हुए तो छात्र आंदोलन जारी रह सकते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

छात्रों के दबाव की स्वीकृति अधिक है — यह अंतर महत्वपूर्ण है। नीट और यूजीसी विवाद महीनों से उबल रहे थे; इस्तीफा तब आया जब जनाक्रोश चरम पर था, न कि जब समस्या पहचानी गई। असली सवाल यह है कि क्या नेतृत्व परिवर्तन के साथ नीति भी बदलेगी या यह केवल राजनीतिक दबाव से उपजा प्रतीकात्मक कदम है। 2029 की चेतावनी देना आसान है, लेकिन परीक्षा प्रणाली में संरचनात्मक सुधार के बिना छात्रों का भरोसा लौटाना मुश्किल होगा।
RashtraPress
26 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

धर्मेंद्र प्रधान ने शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा क्यों दिया?
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने यूजीसी विवाद और नीट पेपर लीक जैसे बड़े शैक्षिक विवादों के बीच जुलाई 2024 के आखिरी सप्ताह में इस्तीफा दिया। शिवसेना (यूबीटी) सहित विपक्षी दल जनवरी-फरवरी से उनके इस्तीफे की मांग कर रहे थे।
आनंद दुबे ने सरकार को क्या चेतावनी दी?
शिवसेना (यूबीटी) प्रवक्ता आनंद दुबे ने कहा कि अगर सरकार आज के युवाओं की भावनाओं को नहीं समझी तो देश को 'बहुत सारे आंदोलनों से गुजरना पड़ेगा।' उन्होंने 2029 के चुनावों से पहले सरकार को जागने की नसीहत भी दी।
शिवसेना (यूबीटी) ने इस इस्तीफे को किसकी जीत बताया?
आनंद दुबे ने स्पष्ट किया कि यह इस्तीफा किसी एक पार्टी या मंच की जीत नहीं है, बल्कि देश के करोड़ों छात्रों की जीत है। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी ने इसे पुरजोर तरीके से उठाया, लेकिन श्रेय पूरे देश के युवाओं को जाता है।
नीट पेपर लीक और यूजीसी विवाद क्या था?
यूजीसी विवाद जनवरी-फरवरी 2024 में सामने आया, जिसमें एक विशेष वर्ग के छात्रों के साथ अन्याय के आरोप लगे। इसके बाद मई 2024 में नीट परीक्षा का पेपर लीक होने की खबर ने देशभर में छात्रों के विरोध प्रदर्शन को और तेज कर दिया।
क्या विपक्षी दलों का छात्र आंदोलन में शामिल होना उचित है?
आनंद दुबे के अनुसार जब कोई आंदोलन जनांदोलन का रूप लेता है तो विपक्षी दलों का उसमें शामिल होना स्वाभाविक है। उन्होंने 2012-13 के अन्ना हजारे आंदोलन का उदाहरण दिया, जिसमें गैर-कांग्रेस नेता शामिल हुए थे, और कहा कि मुद्दों पर आंदोलन में राजनीति नहीं होनी चाहिए।
राष्ट्र प्रेस
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