पंजाब पेपर लीक: शिवसेना के संजय निरुपम की माँग — AAP सरकार शिक्षा मंत्री से तुरंत इस्तीफा ले
सारांश
मुख्य बातें
शिवसेना के प्रवक्ता संजय निरुपम ने 29 जुलाई को मुंबई में पंजाब पेपर लीक विवाद और फेसबुक से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का वीडियो हटाए जाने के मुद्दे पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की। निरुपम ने स्पष्ट कहा कि जिस नैतिक जिम्मेदारी का हवाला देकर केंद्र में शिक्षा मंत्री का इस्तीफा लिया गया, वही मानदंड पंजाब की आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार पर भी समान रूप से लागू होना चाहिए।
पंजाब पेपर लीक और नैतिक जवाबदेही
निरुपम ने याद दिलाया कि नीट परीक्षा में पेपर लीक के बाद देशभर के छात्रों ने व्यापक आंदोलन किया था। उस जनदबाव के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दिया, जिसकी सराहना हुई। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में सरकारों को जनभावनाओं और नैतिक जिम्मेदारी के अनुरूप निर्णय लेने चाहिए।
निरुपम के अनुसार, पंजाब में भी पेपर लीक और कथित नकल के मामले सामने आए हैं। ऐसे में AAP के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल — जो पहले शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की माँग का समर्थन कर चुके हैं — को अब पंजाब में अपनी ही पार्टी की सरकार के शिक्षा मंत्री से इस्तीफा लेना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ऐसा नहीं किया गया, तो भविष्य में इस तरह की माँग करना केवल राजनीतिक दिखावा माना जाएगा।
फेसबुक से PM मोदी का वीडियो हटाए जाने पर सवाल
दूसरे मुद्दे पर निरुपम ने कहा कि मेटा और फेसबुक द्वारा प्रधानमंत्री का वीडियो हटाया जाना बेहद चिंताजनक है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर किन ताकतों के दबाव में आकर यह कदम उठाया गया। उनके अनुसार, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति के माध्यम हैं और किसी भी व्यक्ति — विशेषकर एक देश के प्रधानमंत्री — का वीडियो बिना स्पष्ट कारण हटाना कई गंभीर प्रश्न खड़े करता है।
IT मंत्रालय की कार्रवाई और मेटा का जवाब
निरुपम ने भारत सरकार के आईटी मंत्रालय द्वारा मेटा के अधिकारियों को नोटिस भेजकर जवाब माँगे जाने को उचित कदम बताया। उन्होंने मेटा के 'टेक्निकल ग्लिच' वाले शुरुआती स्पष्टीकरण को अपर्याप्त करार देते हुए कहा कि केवल तकनीकी खराबी का हवाला देकर इतने गंभीर मामले को बंद नहीं किया जा सकता।
बाहरी दबाव की जाँच और कड़े कदम की माँग
निरुपम ने माँग की कि यदि किसी विदेशी दबाव या बाहरी प्रभाव में आकर फेसबुक ने यह निर्णय लिया है, तो इसकी पूरी और निष्पक्ष जाँच होनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत के पास ऐसे प्लेटफॉर्म के खिलाफ कड़े कदम उठाने के कानूनी विकल्प मौजूद हैं। सोशल मीडिया कंपनियों को भारत के कानूनों और लोकतांत्रिक मूल्यों का सम्मान करना होगा और किसी भी बाहरी दबाव में आकर पक्षपातपूर्ण निर्णय नहीं लेने चाहिए। यह मामला आने वाले दिनों में संसदीय और न्यायिक दोनों स्तरों पर गूँज सकता है।