नीट पेपर लीक: शिवसेना (यूबीटी) ने केंद्र से माँगी जवाबदेही, राहुल गांधी के PM आवास घेराव को भी बताया गलत
सारांश
मुख्य बातें
शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने नीट पेपर लीक विवाद पर केंद्र सरकार को कठघरे में खड़ा करते हुए राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA), शिक्षा मंत्रालय और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की जवाबदेही तय करने की माँग की है। पार्टी प्रवक्ता आनंद दुबे ने 22 जुलाई को मुंबई में कहा कि यदि सरकार ने समय रहते छात्रों से संवाद किया होता, तो देशभर में फैला यह असंतोष टाला जा सकता था। साथ ही उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के प्रधानमंत्री आवास की ओर किए गए मार्च को भी अनुचित बताया।
मुख्य घटनाक्रम
आनंद दुबे ने कहा कि शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे स्वयं दिल्ली जाकर प्रदर्शनकारी छात्रों से मिले और उन्हें यह भरोसा दिलाया कि पूरा देश उनके साथ खड़ा है। उन्होंने कहा, 'देश के अलग-अलग हिस्सों में छात्र आंदोलन चल रहे हैं और जो भी छात्रों की आवाज़ उठाना चाहता है — चाहे वह सत्ता पक्ष का हो या विपक्ष का — वह उनका समर्थन कर रहा है।'
दुबे ने केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह की सोनम वांगचुक से अस्पताल में हुई मुलाकात का स्वागत किया, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि 'यदि यही पहल 20 दिन पहले जंतर-मंतर पर की गई होती, तो हिंसा और तनाव की नौबत नहीं आती।'
NTA और सरकार पर जवाबदेही की माँग
नीट परीक्षा में कथित गड़बड़ी के बाद छात्रों और अभिभावकों में भारी नाराज़गी है। आनंद दुबे ने कहा कि छात्र पूरे वर्ष परिश्रम करते हैं, लेकिन यदि परीक्षा प्रणाली ही पारदर्शी नहीं होगी तो उनके भविष्य पर सवाल खड़े होंगे। उन्होंने NTA, शिक्षा मंत्रालय और सरकार की जवाबदेही तय करने की माँग करते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की माँग दोहराई।
गौरतलब है कि नीट पेपर लीक का यह मामला देशभर में छात्र आंदोलनों को हवा देने वाला बना हुआ है, और विपक्ष से लेकर सत्तारूढ़ गठबंधन के सहयोगी दल तक सरकार के रवैये पर सवाल उठा रहे हैं।
राहुल गांधी के प्रदर्शन पर असहमति
शिवसेना (यूबीटी) विपक्षी गठबंधन 'इंडिया' का हिस्सा होने के बावजूद आनंद दुबे ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के प्रधानमंत्री आवास की ओर किए गए विरोध मार्च से स्पष्ट असहमति जताई। उन्होंने कहा, 'जो गलत है उसे गलत कहना चाहिए। प्रधानमंत्री आवास का घेराव करने के बजाय विपक्ष को संसद में इस मुद्दे पर बहस करनी चाहिए। किसी भी विवाद का समाधान संवाद से निकलता है।'
यह टिप्पणी इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि 'इंडिया' गठबंधन के भीतर से ही किसी सहयोगी दल का राहुल गांधी की रणनीति पर खुलकर सवाल उठाना असामान्य है।
हिंसा की निंदा, छात्रों के अधिकार का समर्थन
आनंद दुबे ने NTA के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रदर्शन को छात्रों का मौलिक अधिकार बताया, लेकिन प्रदर्शन के दौरान हुई पत्थरबाजी और पुलिसकर्मियों के साथ मारपीट की घटनाओं की कड़ी निंदा की। उनके अनुसार, ऐसे असामाजिक तत्वों को पहचानना और रोकना सरकार और खुफिया एजेंसियों की जिम्मेदारी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वास्तविक छात्र इस तरह की हिंसा का समर्थन नहीं करते।
आगे क्या
यह ऐसे समय में आया है जब सर्वोच्च न्यायालय में नीट पेपर लीक मामले की सुनवाई जारी है और केंद्र सरकार पर परीक्षा सुधारों को लेकर दबाव बढ़ता जा रहा है। शिवसेना (यूबीटी) की यह दोहरी मुद्रा — सरकार की आलोचना और साथ ही विपक्षी रणनीति पर सवाल — आने वाले दिनों में 'इंडिया' गठबंधन की आंतरिक एकजुटता की परीक्षा भी ले सकती है।