महाराष्ट्र सूखा संकट: शिवसेना (यूबीटी) की माँग — नियम ताक पर रखकर तुरंत खजाना खोले सरकार
सारांश
मुख्य बातें
शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने 25 सितंबर 2026 को राज्य सरकार पर दबाव बनाते हुए माँग की कि महाराष्ट्र में तत्काल सूखा आपातकाल घोषित किया जाए और नौकरशाही की शर्तों को दरकिनार कर किसानों के लिए खजाना खोला जाए। पार्टी के मुखपत्र 'सामना' में प्रकाशित संपादकीय में मराठवाड़ा, पश्चिमी महाराष्ट्र और विदर्भ के बड़े हिस्से में फसलों की पूर्ण बर्बादी का हवाला देते हुए कार्रवाई में हो रही देरी पर कड़ी आपत्ति जताई गई।
सूखे की गंभीरता: हफ्तों से एक बूंद नहीं
एल नीनो के गंभीर प्रभाव के चलते सोलापुर, अहिल्यानगर, मराठवाड़ा और पश्चिमी विदर्भ के कई जिलों में मानसून के चरम सीजन में हफ्तों — और कुछ स्थानों पर दो महीने तक — एक बूंद भी बारिश नहीं हुई। सोयाबीन, कपास, तुअर, मूंग, उड़द, ज्वार और मक्का की खड़ी फसलें सूखकर नष्ट हो गई हैं।
संपादकीय के अनुसार, सिंचाई सुविधा या कुएँ वाले किसानों को भी 50 से 70 प्रतिशत तक पैदावार घटने की आशंका है, जबकि वर्षा आधारित किसानों की फसल पूरी तरह चौपट हो गई है। कुएँ, तालाब और बोरवेल बरसात के बीच में ही सूख चुके हैं, जिससे अगली बुवाई के लिए पानी नहीं बचा।
खरीफ के बाद रबी भी खतरे में
यह संकट केवल खरीफ सीजन तक सीमित नहीं है। 'सामना' संपादकीय में चेतावनी दी गई है कि आने वाले रबी सीजन पर भी इसका सीधा असर पड़ेगा, क्योंकि जलस्रोत असमय खाली हो चुके हैं। इससे लाखों किसान परिवारों की पूरे साल की आजीविका खतरे में आ गई है।
बाज़ार में भी शोषण: ₹1,017 में चार क्विंटल मिर्च
संपादकीय में परभणी जिले के सैलू तालुका की एक मार्मिक घटना का उल्लेख किया गया। किसान जीवन कावड़े ने सूखे के बावजूद चार क्विंटल मिर्च उगाई, लेकिन व्यापारियों ने पूरी उपज के लिए सिर्फ ₹1,017 दिए। इस उपज की कटाई मजदूरी अकेले ₹2,000 थी — बीज, खाद और परिवहन का खर्च उसके ऊपर अलग था। यह एक उदाहरण उस बड़े संकट की तस्वीर है जिसमें किसान प्रकृति की मार के साथ साथ बाज़ार में भी लूट का शिकार हो रहे हैं।
संपादकीय में नेताओं से APMC बाज़ारों का दौरा करने और संकटग्रस्त किसानों का शोषण करने वाले बिचौलियों पर सख्त कार्रवाई करने की माँग की गई।
कर्नाटक से तुलना, महाराष्ट्र पिछड़ा
ठाकरे गुट ने पड़ोसी राज्य कर्नाटक का उदाहरण देते हुए तंज कसा कि कर्नाटक ने हफ्तों पहले ही सूखा घोषित कर राहत उपाय शुरू कर दिए, जबकि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री और मंत्री अभी भी 'लौटते मानसून का इंतजार' कर रहे हैं। संपादकीय ने स्पष्ट कहा — "औपचारिक सर्वे, पंचनामे और मंत्रियों की समीक्षा बैठकों से तत्काल राहत में देरी नहीं होनी चाहिए।"
शिवसेना (यूबीटी) की माँगें
पार्टी ने सरकार से तीन स्पष्ट कदम उठाने की माँग की है: पहला — तत्काल सूखा आपातकाल घोषित करना; दूसरा — नौकरशाही नियमों में ढील देकर बिना शर्त सहायता जारी करना; तीसरा — APMC बिचौलियों पर कार्रवाई। गौरतलब है कि यह माँग ऐसे समय में आई है जब राज्य में विधानसभा सत्र नजदीक है और किसान आंदोलन की आशंका बढ़ रही है।
सूखे की यह स्थिति और उससे उपजा राजनीतिक दबाव राज्य सरकार की प्राथमिकताओं की असली परीक्षा होगी।