24 सितंबर 2026
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महाराष्ट्र सूखा संकट: उद्धव ठाकरे ने फडणवीस सरकार को घेरा, विधानसभा विशेष सत्र की मांग

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महाराष्ट्र सूखा संकट: उद्धव ठाकरे ने फडणवीस सरकार को घेरा, विधानसभा विशेष सत्र की मांग

सारांश

महाराष्ट्र में सूखे की मार झेल रहे किसानों के बीच उद्धव ठाकरे का फडणवीस सरकार पर सीधा हमला — ₹31,000 करोड़ के पैकेज का हिसाब माँगा, विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की माँग उठाई और ₹5 ₹21 के मुआवजा चेक बाँटने वाली बीमा कंपनियों पर कार्रवाई का आह्वान किया।

मुख्य बातें

उद्धव ठाकरे ने 24 सितंबर 2026 को मुंबई में प्रेस कॉन्फ्रेंस में महायुति सरकार पर कृषि संकट प्रबंधन में विफलता का आरोप लगाया।
सोलापुर, छत्रपति संभाजीनगर और विदर्भ में तत्काल कैबिनेट बैठकें और राज्य विधानसभा का 2 3 दिन का विशेष सत्र बुलाने की माँग।
पहले घोषित ₹31,000 करोड़ के पैकेज में से किसानों को वास्तव में मिली राशि पर पूर्ण पारदर्शिता की माँग।
मुआवजे में ₹5 या ₹21 के चेक देने वाली फसल बीमा कंपनियों की जाँच और कड़ी सजा की माँग।
फसल नुकसान का पंचनामा 5 अक्टूबर तक टालने पर आपत्ति; केंद्र का इंतजार किए बिना 40 45 दिनों में किसानों को राहत देने की अपील।
किसान आत्महत्या और शहरों की ओर पलायन रोकने के लिए डिजिटल डैशबोर्ड और रोजगार योजना की माँग।

शिवसेना (यूबीटी) के अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने 24 सितंबर 2026 को मुंबई में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के ज़रिये महाराष्ट्र की महायुति सरकार पर राज्य में गहराते कृषि संकट और सूखे जैसे हालात से निपटने में विफलता का आरोप लगाया। उन्होंने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को सीधी चुनौती देते हुए पाँच ठोस माँगें रखीं, जिनमें राज्य विधानसभा का तत्काल विशेष सत्र बुलाना सबसे प्रमुख है।

पाँच प्रमुख माँगें

ठाकरे ने माँग की कि सोलापुर, छत्रपति संभाजीनगर और विदर्भ जैसे सर्वाधिक प्रभावित क्षेत्रों में कैबिनेट की विशेष बैठकें फौरन आयोजित की जाएँ। उन्होंने कहा, "सूखे से निपटने के उपायों, पीने के पानी के बंटवारे और फसल के नुकसान पर राहत के बारे में चर्चा करने के लिए बिना किसी प्रक्रियात्मक देरी के तुरंत महाराष्ट्र विधानसभा का 2 3 दिन का विशेष सत्र बुलाया जाए।"

इसके अलावा उन्होंने माँग की कि राष्ट्रीय आपदा मोचन कोष (NDRF) और राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष (SDRF) के कागजी नियमों से ऊपर उठकर जमीनी हकीकत के आधार पर आधिकारिक रूप से सूखे की स्थिति घोषित की जाए।

₹31,000 करोड़ के पैकेज पर पारदर्शिता की माँग

ठाकरे ने पहले घोषित ₹31,000 करोड़ के आर्थिक पैकेज का हिसाब माँगा और स्पष्ट करने को कहा कि उसमें से कितनी राशि वास्तव में प्रभावित किसानों तक पहुँची है। उन्होंने मौजूदा कृषि ऋण माफी योजना के लाभार्थियों की पूरी सूची भी तत्काल सार्वजनिक करने की माँग की।

गौरतलब है कि ठाकरे ने अपने मुख्यमंत्री कार्यकाल का हवाला देते हुए कहा कि उस दौरान ₹2 लाख तक का कृषि ऋण बिना किसी कड़ी शर्त के 15 दिनों के भीतर माफ किया गया था।

फसल बीमा कंपनियों पर कार्रवाई की माँग

उन्होंने उन फसल बीमा कंपनियों की जाँच और कड़ी सज़ा की माँग की जिन्होंने मुआवजे के नाम पर महज ₹5 या ₹21 के सांकेतिक चेक बाँटे। ठाकरे ने उन चार शर्तों को तत्काल हटाने की भी निंदा की जिन्होंने किसानों की सुरक्षा पर प्रतिकूल असर डाला और बीमा पंजीकरण में भारी गिरावट आई।

पंचनामे में देरी पर सवाल

ठाकरे ने फसल नुकसान के औपचारिक आकलन (पंचनामे) को 5 अक्टूबर के बाद तक टालने पर कड़ा एतराज जताया। उन्होंने कहा, "किसान मरने की कगार पर हैं, फसलें जल चुकी हैं, मवेशियों के लिए चारा खत्म हो गया है और परिवार कर्ज में डूबे हुए हैं। फिर भी मुख्यमंत्री कहते हैं कि आकलन बाद में शुरू होगा। आप किसका इंतजार कर रहे हैं? आपकी अपनी नजर ही पैमाना होनी चाहिए, साफ दिख रहा है कि किसान पूरी तरह बर्बाद हो चुके हैं।"

उन्होंने सरकारी मंत्रियों के प्रभावित खेतों के दौरों को 'फोटो खिंचवाने का मौका' और 'काजू बादाम खाने की यात्रा' बताते हुए कहा कि ये दौरे असल राहत पहुँचाने में विफल रहे हैं।

डिजिटल डैशबोर्ड और पलायन रोकने की अपील

ठाकरे ने सरकार से आग्रह किया कि केंद्र से फंड का इंतजार किए बिना 40 से 45 दिनों के भीतर किसानों को आर्थिक सहायता दी जाए। उन्होंने मंत्रालय में एक खुला डिजिटल डैशबोर्ड स्थापित करने का सुझाव दिया जिस पर प्रतिदिन वितरित सहायता और राहत उपायों की जानकारी अद्यतन हो। साथ ही, किसान आत्महत्याओं को रोकने और गाँवों से शहरों की ओर बड़े पैमाने पर हो रहे पलायन को थामने के लिए तत्काल रोजगार व अस्थायी आवास की व्यवस्था की भी माँग उठाई। यह देखना होगा कि महायुति सरकार इन माँगों पर क्या कदम उठाती है और क्या विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने पर सहमति बनती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन ₹5 और ₹21 के बीमा चेक जैसे ठोस उदाहरण इस बार उनकी आलोचना को सतही नहीं रहने देते। असली सवाल यह है कि ₹31,000 करोड़ का पैकेज घोषित हुए कितना समय बीत चुका है और सरकार ने अभी तक लाभार्थियों की सार्वजनिक सूची क्यों नहीं जारी की — यह पारदर्शिता की कमी विपक्ष से ज़्यादा सरकार के लिए असहज करने वाला सवाल है। पंचनामे को 5 अक्टूबर तक टालने का तर्क जब किसान खेत में तबाही देख रहे हैं, प्रशासनिक जड़ता की उस पुरानी छवि को और पक्का करता है जो महाराष्ट्र के किसान आंदोलनों के पीछे बार बार उठती रही है।
RashtraPress
24 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उद्धव ठाकरे ने महाराष्ट्र सूखा संकट पर क्या माँगें रखी हैं?
ठाकरे ने पाँच प्रमुख माँगें रखी हैं — सोलापुर, छत्रपति संभाजीनगर और विदर्भ में तत्काल कैबिनेट बैठकें, 2 3 दिन का विधानसभा विशेष सत्र, ₹31,000 करोड़ के पैकेज का पूरा हिसाब, फसल बीमा कंपनियों पर कार्रवाई और 40 45 दिनों में किसानों को सीधी आर्थिक मदद।
महाराष्ट्र में सूखे की स्थिति अभी तक आधिकारिक रूप से घोषित क्यों नहीं हुई?
ठाकरे के अनुसार, प्रशासन NDRF और SDRF के कागजी नियमों पर निर्भर है जो आधिकारिक घोषणा में बाधा बन रहे हैं। उन्होंने सरकार से अपील की है कि जमीनी हकीकत के आधार पर इन प्रक्रियात्मक अड़चनों को दरकिनार कर तत्काल सूखा घोषित किया जाए।
फसल बीमा कंपनियों पर ठाकरे ने क्या आरोप लगाए?
ठाकरे ने आरोप लगाया कि कुछ फसल बीमा कंपनियों ने किसानों को मुआवजे के नाम पर महज ₹5 या ₹21 के चेक दिए। उन्होंने इन कंपनियों की जाँच और कड़ी सजा की माँग की और उन चार शर्तों को हटाने की अपील की जिनसे बीमा पंजीकरण में भारी गिरावट आई।
पंचनामे में देरी का किसानों पर क्या असर पड़ रहा है?
फसल नुकसान का आधिकारिक आकलन (पंचनामा) 5 अक्टूबर के बाद तक टाल दिया गया है, जिससे राहत वितरण रुका हुआ है। ठाकरे के अनुसार इस देरी के बीच किसान कर्ज में डूबे हैं, मवेशियों के लिए चारा खत्म हो चुका है और किसान आत्महत्या की घटनाएँ बढ़ रही हैं।
ठाकरे ने डिजिटल डैशबोर्ड की माँग क्यों की?
ठाकरे ने सुझाव दिया कि मंत्रालय में एक खुला डिजिटल डैशबोर्ड बनाया जाए जिस पर प्रतिदिन वितरित राहत राशि और सहायता उपायों की जानकारी अपडेट हो। इसका उद्देश्य राहत वितरण में पारदर्शिता सुनिश्चित करना और सरकारी दावों की जन जाँच संभव बनाना है।
राष्ट्र प्रेस
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