महाराष्ट्र सूखा संकट: उद्धव ठाकरे ने फडणवीस सरकार को घेरा, विधानसभा विशेष सत्र की मांग
सारांश
मुख्य बातें
शिवसेना (यूबीटी) के अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने 24 सितंबर 2026 को मुंबई में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के ज़रिये महाराष्ट्र की महायुति सरकार पर राज्य में गहराते कृषि संकट और सूखे जैसे हालात से निपटने में विफलता का आरोप लगाया। उन्होंने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को सीधी चुनौती देते हुए पाँच ठोस माँगें रखीं, जिनमें राज्य विधानसभा का तत्काल विशेष सत्र बुलाना सबसे प्रमुख है।
पाँच प्रमुख माँगें
ठाकरे ने माँग की कि सोलापुर, छत्रपति संभाजीनगर और विदर्भ जैसे सर्वाधिक प्रभावित क्षेत्रों में कैबिनेट की विशेष बैठकें फौरन आयोजित की जाएँ। उन्होंने कहा, "सूखे से निपटने के उपायों, पीने के पानी के बंटवारे और फसल के नुकसान पर राहत के बारे में चर्चा करने के लिए बिना किसी प्रक्रियात्मक देरी के तुरंत महाराष्ट्र विधानसभा का 2 3 दिन का विशेष सत्र बुलाया जाए।"
इसके अलावा उन्होंने माँग की कि राष्ट्रीय आपदा मोचन कोष (NDRF) और राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष (SDRF) के कागजी नियमों से ऊपर उठकर जमीनी हकीकत के आधार पर आधिकारिक रूप से सूखे की स्थिति घोषित की जाए।
₹31,000 करोड़ के पैकेज पर पारदर्शिता की माँग
ठाकरे ने पहले घोषित ₹31,000 करोड़ के आर्थिक पैकेज का हिसाब माँगा और स्पष्ट करने को कहा कि उसमें से कितनी राशि वास्तव में प्रभावित किसानों तक पहुँची है। उन्होंने मौजूदा कृषि ऋण माफी योजना के लाभार्थियों की पूरी सूची भी तत्काल सार्वजनिक करने की माँग की।
गौरतलब है कि ठाकरे ने अपने मुख्यमंत्री कार्यकाल का हवाला देते हुए कहा कि उस दौरान ₹2 लाख तक का कृषि ऋण बिना किसी कड़ी शर्त के 15 दिनों के भीतर माफ किया गया था।
फसल बीमा कंपनियों पर कार्रवाई की माँग
उन्होंने उन फसल बीमा कंपनियों की जाँच और कड़ी सज़ा की माँग की जिन्होंने मुआवजे के नाम पर महज ₹5 या ₹21 के सांकेतिक चेक बाँटे। ठाकरे ने उन चार शर्तों को तत्काल हटाने की भी निंदा की जिन्होंने किसानों की सुरक्षा पर प्रतिकूल असर डाला और बीमा पंजीकरण में भारी गिरावट आई।
पंचनामे में देरी पर सवाल
ठाकरे ने फसल नुकसान के औपचारिक आकलन (पंचनामे) को 5 अक्टूबर के बाद तक टालने पर कड़ा एतराज जताया। उन्होंने कहा, "किसान मरने की कगार पर हैं, फसलें जल चुकी हैं, मवेशियों के लिए चारा खत्म हो गया है और परिवार कर्ज में डूबे हुए हैं। फिर भी मुख्यमंत्री कहते हैं कि आकलन बाद में शुरू होगा। आप किसका इंतजार कर रहे हैं? आपकी अपनी नजर ही पैमाना होनी चाहिए, साफ दिख रहा है कि किसान पूरी तरह बर्बाद हो चुके हैं।"
उन्होंने सरकारी मंत्रियों के प्रभावित खेतों के दौरों को 'फोटो खिंचवाने का मौका' और 'काजू बादाम खाने की यात्रा' बताते हुए कहा कि ये दौरे असल राहत पहुँचाने में विफल रहे हैं।
डिजिटल डैशबोर्ड और पलायन रोकने की अपील
ठाकरे ने सरकार से आग्रह किया कि केंद्र से फंड का इंतजार किए बिना 40 से 45 दिनों के भीतर किसानों को आर्थिक सहायता दी जाए। उन्होंने मंत्रालय में एक खुला डिजिटल डैशबोर्ड स्थापित करने का सुझाव दिया जिस पर प्रतिदिन वितरित सहायता और राहत उपायों की जानकारी अद्यतन हो। साथ ही, किसान आत्महत्याओं को रोकने और गाँवों से शहरों की ओर बड़े पैमाने पर हो रहे पलायन को थामने के लिए तत्काल रोजगार व अस्थायी आवास की व्यवस्था की भी माँग उठाई। यह देखना होगा कि महायुति सरकार इन माँगों पर क्या कदम उठाती है और क्या विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने पर सहमति बनती है।