डिजिटल अरेस्ट ठगी: राजस्थान पुलिस ने नोएडा से तीसरे आरोपी ताहिर को दबोचा, ₹76 लाख मामले में अब तक 3 गिरफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
राजस्थान पुलिस के राज्य केंद्रीय साइबर अपराध पुलिस स्टेशन ने 16 सितंबर 2026 को 'डिजिटल अरेस्ट' ठगी के चर्चित मामले में एक और आरोपी को गिरफ्तार किया है। जयपुर के एक बुजुर्ग दंपति से ₹76 लाख की ठगी करने वाले इस गिरोह का तीसरा सदस्य उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्ध नगर (नोएडा) से पकड़ा गया है। इस गिरफ्तारी के साथ मामले में अब तक पकड़े गए आरोपियों की संख्या तीन हो गई है।
मामले का घटनाक्रम
पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने बुजुर्ग दंपति से व्हाट्सएप के माध्यम से संपर्क किया और खुद को पुलिस, एंटी टेररिस्ट स्क्वाड (एटीएस) तथा राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) का अधिकारी बताया। ठगों ने दंपति को यह कहकर डराया कि उनके आधार कार्ड का इस्तेमाल आतंकवादी गतिविधियों और करोड़ों रुपए के वित्तीय अपराधों में हुआ है।
विश्वसनीयता बनाने के लिए आरोपियों ने कथित तौर पर फर्जी एनआईए नोटिस भी व्हाट्सएप पर भेजा। इसके बाद लगातार वॉयस और वीडियो कॉल के जरिए दंपति पर मानसिक दबाव बनाया जाता रहा। सरकारी एजेंसियों पर भरोसा करते हुए पीड़ित दंपति ने अपनी सावधि जमा (एफडी) तोड़ दी और आरोपियों के बताए बैंक खातों में ₹76 लाख स्थानांतरित कर दिए।
मनी ट्रेल: कैसे बँटी ठगी की रकम
साइबर अपराध टीम की जांच में खुलासा हुआ कि ठगी की रकम कई बैंक खातों के जरिए आगे भेजी गई। ₹21 लाख 'हनिया फ्रूट्स' नामक फर्म के खाते में जमा किए गए, जिसका संचालन पहले से गिरफ्तार आरोपी मुजस्सिम कर रहा था।
जांच में सामने आया कि मुजस्सिम ने ताहिर से अन्य बैंक खातों की व्यवस्था करने को कहा था। ताहिर ने अपने परिचित सतपाल सिंह से संपर्क किया, जिसने खाते उपलब्ध कराए। इन खातों में लगभग ₹17 लाख ट्रांसफर किए गए। सतपाल ने कमीशन काटने के बाद ₹7 लाख नकद ताहिर को दिए — जिनमें से ₹5 लाख मुजस्सिम को और ₹2 लाख ताहिर ने अपने पास रख लिए।
गिरफ्तारी कैसे हुई
मामले का खुलासा तब हुआ जब पीड़ित दंपति ने अधिकारियों से संपर्क किया। साइबर अपराध टीम ने संदिग्ध व्हाट्सएप नंबरों, मोबाइल नंबरों और बैंक खाता लेनदेन का विस्तृत विश्लेषण कर आरोपियों के बीच संबंध और धन के प्रवाह का मार्ग स्थापित किया। तकनीकी और वित्तीय साक्ष्यों के आधार पर पुलिस टीम गौतमबुद्ध नगर पहुँची और ताहिर को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस अब मनी ट्रेल की जांच जारी रखते हुए इस धोखाधड़ी से जुड़े अन्य लोगों और बैंक खातों की पड़ताल कर रही है।
डिजिटल अरेस्ट: बढ़ता साइबर खतरा
गौरतलब है कि 'डिजिटल अरेस्ट' एक ऐसा साइबर अपराध है जिसमें ठग खुद को सरकारी अधिकारी बताकर वीडियो कॉल पर पीड़ित को 'वर्चुअल हिरासत' में रखते हैं और मोटी रकम ऐंठते हैं। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में इस तरह के मामलों में तेज़ी से वृद्धि हो रही है, और केंद्रीय एजेंसियाँ इसे एक संगठित साइबर अपराध नेटवर्क का हिस्सा मान रही हैं।
पुलिस की अपील
राजस्थान पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि यदि कोई फोन, वीडियो कॉल या सोशल मीडिया के जरिए खुद को पुलिस, CBI, ED, NIA या किसी सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर गिरफ्तारी की धमकी दे, तो घबराएँ नहीं और किसी भी हाल में पैसे ट्रांसफर न करें। ऐसे मामलों में तुरंत साइबर हेल्पलाइन या निकटतम पुलिस स्टेशन से संपर्क करने की सलाह दी गई है। जांच जारी है और पुलिस जल्द ही अन्य आरोपियों तक पहुँचने का दावा कर रही है।