गोवा डिजिटल अरेस्ट घोटाला: ₹42.60 लाख की साइबर ठगी में 20 वर्षीय आरोपी नांदेड़ से गिरफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
गोवा साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन ने 24 अगस्त 2026 को 'डिजिटल अरेस्ट' के एक बड़े साइबर ठगी मामले में महत्वपूर्ण सफलता हासिल करते हुए 20 वर्षीय तेजस नरहारे को महाराष्ट्र के नांदेड़ से गिरफ्तार किया। आरोपी पर ₹42,60,094.40 की धोखाधड़ी का आरोप है, जो गोवा के कैनाकोना निवासी एक व्यक्ति से ठगे गए थे।
मुख्य घटनाक्रम
शिकायत के अनुसार, 30 जनवरी से 21 फरवरी के बीच आरोपी और उसके साथियों ने पीड़ित को कई मोबाइल नंबरों से फोन किया। आरोपियों ने खुद को डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकम्युनिकेशन्स तथा दिल्ली व मुंबई क्राइम ब्रांच के अधिकारी बताया।
पीड़ित को यह कहकर डराया गया कि उसका आधार कार्ड जेट एयरवेज के अधिकारियों से जुड़ी कथित आपराधिक गतिविधियों में इस्तेमाल हुआ है और वह एक गंभीर आपराधिक मामले में फंसा है। इस मनगढ़ंत कहानी के आधार पर पीड़ित को 'डिजिटल अरेस्ट' में रखकर कुल ₹42,60,094.40 ट्रांसफर करने पर मजबूर किया गया।
जांच और गिरफ्तारी
यह मामला 20 मार्च 2026 को क्राइम नंबर 29/2026 के तहत दर्ज किया गया था। इसमें भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 318(4), 319(2), 308 और 3(5) के साथ-साथ आईटी एक्ट की धारा 66-डी लगाई गई है।
साइबर क्राइम पुलिस ने गहन तकनीकी और वित्तीय जांच के ज़रिए मनी ट्रेल का पता लगाया, जिससे आरोपी की लोकेशन नांदेड़ में चिह्नित हुई। इसके बाद पीआई दीपक पेडनेकर की देखरेख में पीएसआई नवीन नाइक, पीसी यश कोले और पीसी सिद्रमैया मठ की टीम ने नांदेड़ में छापा मारकर तेजस नरहारे को दबोचा।
मनी ट्रेल का खुलासा
जांच में सामने आया कि मनी ट्रेल के लेयर-2 में आरोपी के बैंक खाते में ₹10 लाख जमा किए गए थे, जिन्हें बाद में सेल्फ-चेक के ज़रिए निकाल लिया गया। पुलिस ने आरोपी के खाते और लेन-देन से जुड़े सभी दस्तावेज़ भी जब्त कर लिए हैं।
आगे की कार्रवाई
गिरफ्तार आरोपी को अदालत में पेश किया गया, जहाँ से उसे पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है। पुलिस का कहना है कि इस रैकेट में और भी लोग शामिल हो सकते हैं और अन्य साथियों की तलाश अभी जारी है। गौरतलब है कि 'डिजिटल अरेस्ट' घोटाले पूरे देश में तेज़ी से बढ़ रहे हैं और यह मामला उस खतरनाक प्रवृत्ति की एक और कड़ी है, जिसमें ठग सरकारी अधिकारी बनकर आम नागरिकों को निशाना बनाते हैं।