बगलामुखी मंदिर दान घोटाला: मध्य प्रदेश सरकार ने 3 सदस्यीय जांच समिति गठित की, 7 दिन में रिपोर्ट तलब
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश सरकार ने नलखेड़ा स्थित प्रसिद्ध मां बगलामुखी मंदिर में कथित वित्तीय अनियमितताओं और श्रद्धालुओं से अनाधिकृत चंदा वसूली की जांच के आदेश दिए हैं। आगर-मालवा कलेक्टर ने मंगलवार, 8 जुलाई को एक आदेश जारी कर तीन सदस्यों वाली जांच समिति गठित की, जिसे सात दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपनी है। इस मामले ने अब राजनीतिक रंग भी ले लिया है और भारतीय जनता पार्टी (BJP) तथा भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है।
क्या हैं आरोप
शिकायतों में आरोप लगाया गया है कि आधिकारिक मंदिर प्रबंधन समिति से अलग एक गैर-सरकारी समिति समानांतर रूप से श्रद्धालुओं से दान एकत्र कर रही थी। कथित तौर पर भक्तों द्वारा चढ़ाए गए नकद, सोना, चांदी, गहने और अन्य कीमती सामान इस समानांतर व्यवस्था के ज़रिए जमा किए जा रहे थे और निजी बैंक खातों में डाले जा रहे थे।
कलेक्टर ने अपने आदेश में स्पष्ट किया, 'गैर-सरकारी समिति के ज़रिए चंदा इकट्ठा करने, निजी बैंक खातों के इस्तेमाल और वित्तीय अनियमितताओं के आरोप गंभीर प्रकृति के हैं। इसलिए, निष्पक्ष और विस्तृत जांच ज़रूरी है।'
जांच समिति की संरचना और अधिकार
समिति की अध्यक्षता आगर-मालवा जिला पंचायत के मुख्य कार्यकारी अधिकारी वी.एस. चौबे करेंगे। जिला कोषागार अधिकारी मनीष चौबे और नलखेड़ा की मुख्य नगरपालिका अधिकारी मिनी अग्रवाल इसके अन्य दो सदस्य हैं।
समिति को मंदिर परिसर का निरीक्षण करने, रिकॉर्ड और बैंक खातों की जांच करने, नकद व कीमती सामान के रूप में प्राप्त दान का सत्यापन करने और यह पता लगाने का निर्देश दिया गया है कि क्या चंदा संग्रह की कोई समानांतर व्यवस्था सक्रिय थी। इसके अलावा, पैनल को यह भी जांचना है कि इन कथित अनियमितताओं में सरकारी अधिकारियों, मंदिर प्रबंधन के प्रतिनिधियों या किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका तो नहीं रही।
सरकार की प्रतिक्रिया
मध्य प्रदेश के धार्मिक न्यास और धर्मस्व मंत्री धर्मेंद्र लोधी ने बुधवार को स्पष्ट किया कि ये कथित अनियमितताएं उन लोगों ने की हैं जो मंदिर प्रबंधन समिति का हिस्सा नहीं थे।
मंत्री लोधी ने कहा, 'मंदिर समिति के बाहर के लोगों ने ये अनियमितताएं कीं। राज्य सरकार दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति को नहीं बख्शेगी। जांच चल रही है और जिम्मेदार सभी लोगों के खिलाफ जल्द से जल्द सख्त कार्रवाई की जाएगी।'
राजनीतिक विवाद
यह मामला अब राजनीतिक अखाड़े में भी पहुंच गया है। विपक्ष के नेता उमंग सिंघार ने आरोप लगाया कि अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी और महाकाल मंदिर से जुड़ी ज़मीन पर कथित कब्जे के विवादों के बाद अब मां बगलामुखी मंदिर में भी इसी तरह के आरोप सामने आए हैं। उन्होंने पारदर्शी जांच की मांग करते हुए कहा कि BJP सरकार को भक्तों के दान का उचित हिसाब-किताब सुनिश्चित करना चाहिए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब देश भर के धार्मिक स्थलों पर वित्तीय पारदर्शिता को लेकर बहस तेज़ हो रही है।
मंदिर का महत्व
आगर-मालवा जिले में स्थित मां बगलामुखी मंदिर हिंदू परंपरा की दस महाविद्याओं में से एक देवी बगलामुखी को समर्पित देश के सर्वाधिक प्रतिष्ठित मंदिरों में से एक है। हर वर्ष लाखों श्रद्धालु यहाँ दर्शन के लिए आते हैं, जिससे मंदिर की दान-व्यवस्था में पारदर्शिता का प्रश्न और भी संवेदनशील बन जाता है। जांच समिति की रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि इस मामले में आगे क्या कार्रवाई होती है।