बांकीपुर उपचुनाव: कांग्रेस का रुख अस्पष्ट, बिहार अध्यक्ष राजेश राम बोले — हाईकमान के फैसले का इंतजार
सारांश
मुख्य बातें
बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव को लेकर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) ने अभी तक अपना पत्ता नहीं खोला है। बिहार कांग्रेस के अध्यक्ष राजेश राम ने बुधवार, 8 जुलाई को स्पष्ट किया कि पार्टी का अंतिम निर्णय हाईकमान के निर्देशों पर निर्भर करेगा। यह ऐसे समय में आया है जब महागठबंधन की सहयोगी राष्ट्रीय जनता दल (राजद) अपना उम्मीदवार घोषित कर चुकी है और विपक्ष में साझा रणनीति की माँग उठ रही है।
राजेश राम का बयान
राजेश राम ने कहा, 'पार्टी सभी मामलों पर लोगों की भावनाओं से अवगत है। फिलहाल, हम अपनी हाईकमान लीडरशिप — जिसमें मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी और केसी वेणुगोपाल शामिल हैं — से निर्देशों का इंतजार कर रहे हैं। अगर हमारा नेतृत्व निर्देश देता है, तो हम उसी के अनुसार तैयारी करेंगे। अभी मैं बस इतना कह सकता हूँ कि हमें नेतृत्व से फैसले की उम्मीद है।' गौरतलब है कि राजद ने रेखा गुप्ता को अपना प्रत्याशी घोषित कर दिया है, जबकि कांग्रेस की चुप्पी महागठबंधन के भीतर समन्वय की कमी की ओर इशारा करती है।
राजद और विपक्ष की एकजुटता की अपील
राजद विधायक भाई वीरेंद्र ने कहा, 'सत्ताधारी सरकार उपचुनाव पूरी ताकत से लड़ती है। सभी जानते हैं कि बांकीपुर विधानसभा सीट क्यों खाली हुई थी। मैंने सभी विपक्षी दलों से अपील की थी कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के खिलाफ एक साझा उम्मीदवार उतारा जाए, ताकि उसे हराया जा सके। अगर लड़ाई लड़नी है तो उपचुनाव में सारे दलों के लोगों को एक साथ होकर संयुक्त उम्मीदवार खड़ा करना चाहिए।' कांग्रेस नेता ऋषि मिश्रा ने भी विपक्षी एकता की वकालत करते हुए कहा कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) के इस गढ़ को भेदने के लिए कांग्रेस और राजद को मिलकर प्रशांत किशोर का सहयोग करना चाहिए।
मैदान में उम्मीदवार
जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर बांकीपुर सीट से उपचुनाव लड़ने की घोषणा कर चुके हैं और विधानसभा क्षेत्र में अपना प्रचार तेज कर दिया है। BJP ने अभिषेक कुमार सिन्हा को अपना उम्मीदवार बनाया है। फिलहाल केवल कांग्रेस का निर्णय बाकी है, जिससे विपक्षी खेमे में अनिश्चितता बनी हुई है।
बांकीपुर सीट का राजनीतिक इतिहास
बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र परंपरागत रूप से BJP का मजबूत गढ़ रहा है। BJP के वर्तमान राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन यहाँ से लगातार चार बार विधायक रहे हैं। राज्यसभा सदस्य चुने जाने के बाद उन्होंने इस सीट से इस्तीफा दिया, जिसके कारण उपचुनाव की घोषणा हुई। यह पहली बार नहीं है कि इस सीट पर विपक्ष को एकजुट होने में कठिनाई हुई हो — पिछले कई चुनावों में बिखरा हुआ विपक्ष BJP के लिए अनुकूल साबित हुआ है।
आगे क्या होगा
कांग्रेस के हाईकमान का फैसला तय करेगा कि महागठबंधन एकजुट होकर लड़ेगा या अलग-अलग। यदि कांग्रेस राजद के उम्मीदवार का समर्थन करती है, तो विपक्ष की स्थिति मजबूत हो सकती है; अन्यथा तीन-तरफा मुकाबले में BJP को फायदा मिलने की संभावना है। पटना की इस सीट पर उपचुनाव की तारीख अभी घोषित नहीं हुई है।