बांकीपुर उपचुनाव: राजद विधायक भाई वीरेंद्र की विपक्ष से एकजुट होकर भाजपा को चुनौती देने की अपील
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के विधायक भाई वीरेंद्र ने 8 जुलाई को पटना में पत्रकारों से बातचीत में बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव को लेकर सभी विपक्षी दलों से एकजुटता दिखाने की पुरज़ोर अपील की। उनका कहना है कि यदि विपक्ष एक साझा उम्मीदवार मैदान में उतारे तो भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) को कड़ी टक्कर दी जा सकती है।
मुख्य घटनाक्रम
बांकीपुर विधानसभा सीट पर 30 जुलाई को मतदान होना है। यह सीट इसलिए रिक्त हुई क्योंकि यहाँ के विधायक नितिन नवीन भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने और राज्यसभा सदस्य निर्वाचित होने के बाद विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे चुके हैं। इस कारण यह सीट भाजपा के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न बन गई है।
भाई वीरेंद्र ने कहा, 'मैं पहले भी सभी विपक्षी दलों से आग्रह कर चुका हूँ कि बैठकर एक उम्मीदवार तय करें, ताकि भाजपा को पटकनी दी जा सके। मैं एक बार फिर सभी विपक्षी दलों के बड़े नेताओं से अपील करता हूँ कि वे मिलकर एक संयुक्त उम्मीदवार मैदान में उतारें।'
चुनावी मैदान में कौन-कौन
राजनीतिक दलों ने अपने-अपने उम्मीदवारों की घोषणा पहले ही कर दी है। राजद ने रेखा गुप्ता को प्रत्याशी बनाया है, जबकि भाजपा ने अभिषेक कुमार को मैदान में उतारा है। जन सुराज की ओर से प्रशांत किशोर स्वयं चुनाव लड़ रहे हैं। इसके अलावा तेज प्रताप यादव की पार्टी ने वीना मानवी को प्रत्याशी घोषित किया है।
गौरतलब है कि विपक्षी दल फिलहाल अपने-अपने उम्मीदवार उतार रहे हैं, जो भाई वीरेंद्र की एकजुटता की अपील के उलट है। यह ऐसे समय में आया है जब भाजपा इस सीट को बरकरार रखने के लिए पूरी ताकत झोंक रही है।
विपक्षी एकता की अहमियत
राजद विधायक ने स्पष्ट किया कि विपक्ष की एकजुटता न केवल बांकीपुर में बल्कि पूरे देश में यह संदेश देगी कि भाजपा के खिलाफ विपक्ष एक मंच पर खड़ा है। उन्होंने यह भी कहा, 'मैं किसी के चुनाव लड़ने पर सवाल नहीं उठा रहा हूँ। मेरा सिर्फ इतना कहना है कि विपक्ष को सामूहिक रणनीति बनाकर चुनाव लड़ना चाहिए।'
यह बयान ऐसे समय में आया है जब बिहार में विपक्षी दलों के बीच समन्वय की कमी पहले से चर्चा में रही है। बांकीपुर जैसी शहरी सीट पर विभाजित विपक्षी वोट भाजपा के पक्ष में जा सकता है, यह चिंता भाई वीरेंद्र की अपील के पीछे की मूल भावना है।
आगे क्या होगा
30 जुलाई को होने वाले मतदान से पहले यह देखना होगा कि विपक्षी दल भाई वीरेंद्र की अपील पर ध्यान देते हैं या अलग-अलग लड़ाई जारी रखते हैं। बांकीपुर उपचुनाव का परिणाम बिहार की राजनीतिक दिशा और एनडीए की ताकत का एक महत्वपूर्ण पैमाना साबित हो सकता है।