मां बगलामुखी मंदिर नलखेड़ा में दान विवाद: कलेक्टर प्रीति यादव ने 7 दिन में रिपोर्ट के लिए बनाई तीन सदस्यीय जांच समिति
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश के आगर-मालवा जिले में स्थित प्रसिद्ध मां बगलामुखी मंदिर, नलखेड़ा में दान और चढ़ावे की व्यवस्था को लेकर गंभीर विवाद सामने आया है। मंदिर में वित्तीय अनियमितताओं और दान की राशि निजी बैंक खातों में जमा किए जाने के आरोपों के बाद जिला कलेक्टर प्रीति यादव ने 8 जुलाई 2026 को तीन सदस्यीय संयुक्त जांच समिति गठित करने के आदेश जारी किए हैं। समिति को सात दिनों के भीतर अपनी जांच रिपोर्ट, निष्कर्ष और अनुशंसाएं प्रस्तुत करनी होंगी।
विवाद की जड़: क्या हैं आरोप
प्रशासन को प्राप्त शिकायतों में आरोप लगाया गया है कि मंदिर परिसर में एक गैर-शासकीय समिति, शासकीय प्रबंधन समिति से अलग, समानांतर व्यवस्था संचालित कर रही है। कथित तौर पर यह समिति श्रद्धालुओं से नकद के अतिरिक्त सोना और चांदी के रूप में भी दान स्वीकार कर रही है। शिकायतकर्ताओं के अनुसार, इस दान की राशि को निजी बैंक खातों में जमा किया जा रहा था, जो वित्तीय पारदर्शिता के नियमों का उल्लंघन है।
गौरतलब है कि धार्मिक स्थलों पर समानांतर दान व्यवस्था और अपंजीकृत संस्थाओं द्वारा चंदा संग्रह मध्य प्रदेश में पहले भी विवाद का विषय रहा है। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए विस्तृत जांच के आदेश दिए।
जांच समिति का गठन
कलेक्टर के आदेश के अनुसार, जिला पंचायत आगर-मालवा के मुख्य कार्यपालन अधिकारी बी.एस. सोलंकी को जांच समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। जिला कोषालय अधिकारी मनीष सोलंकी और नलखेड़ा नगर परिषद की मुख्य नगरपालिका अधिकारी मिनी अग्रवाल को समिति का सदस्य बनाया गया है।
समिति को मंदिर परिसर का स्थलीय निरीक्षण करने, संबंधित पक्षों के बयान दर्ज करने और आवश्यक साक्ष्य एकत्र करने के निर्देश दिए गए हैं।
जांच का दायरा: क्या-क्या खंगाला जाएगा
समिति के जांच के दायरे में रसीद पुस्तिकाएं, बैंक खाते, दान से संबंधित दस्तावेज तथा अन्य वित्तीय अभिलेख शामिल हैं। इसके साथ ही नकद राशि, स्वर्ण एवं रजत सामग्री के रिकॉर्ड और लेखा-जोखा का भी सत्यापन किया जाएगा।
विशेष रूप से यह जांचा जाएगा कि मंदिर में किसी गैर-शासकीय अथवा अपंजीकृत संस्था द्वारा समानांतर दान व्यवस्था संचालित की जा रही थी या नहीं। यदि किसी शासकीय अधिकारी, कर्मचारी, मंदिर प्रबंधन अथवा अन्य संबंधित व्यक्ति की भूमिका संदिग्ध पाई जाती है, तो उसकी जिम्मेदारी भी निर्धारित की जाएगी।
श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों की नजरें प्रशासन पर
मां बगलामुखी मंदिर, नलखेड़ा देशभर के श्रद्धालुओं की गहरी आस्था का केंद्र है और यहाँ वर्ष भर बड़ी संख्या में भक्त दर्शन के लिए आते हैं। ऐसे में दान-चढ़ावे से जुड़े इन आरोपों ने स्थानीय समुदाय और श्रद्धालुओं में चिंता उत्पन्न की है।
स्थानीय लोगों की नजरें प्रशासन की कार्रवाई और जांच के निष्कर्षों पर टिकी हैं। जांच समिति की रिपोर्ट आने के बाद यह स्पष्ट होगा कि मंदिर प्रबंधन में किस स्तर पर और किसकी जिम्मेदारी है।
आगे क्या होगा
जांच समिति को सात दिनों के भीतर अपने निष्कर्ष, अभिमत और अनुशंसाओं सहित रिपोर्ट प्रस्तुत करनी है। रिपोर्ट के आधार पर कलेक्टर आगे की प्रशासनिक कार्रवाई तय करेंगी। यदि जांच में अनियमितताएं सिद्ध होती हैं, तो संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध विधिक कदम उठाए जा सकते हैं।