7 जुलाई 2026
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राम मंदिर चढ़ावा चोरी: तीन आरोपियों की पुलिस रिमांड की मांग, बैंक खातों में आय से अधिक राशि के संकेत

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राम मंदिर चढ़ावा चोरी: तीन आरोपियों की पुलिस रिमांड की मांग, बैंक खातों में आय से अधिक राशि के संकेत

सारांश

अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला गहराता जा रहा है — तीन आरोपियों की पुलिस रिमांड माँगी गई है, एसआईटी ने सीसीटीवी में 70 से अधिक चोरी के मामले पकड़े हैं और बैंक खातों में संदिग्ध राशि के संकेत मिले हैं। ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के इस्तीफे ने मामले को और संवेदनशील बना दिया है।

मुख्य बातें

पुलिस ने लवकुश मिश्रा , अनुकल्प मिश्रा और करुणेश पांडे की रिमांड के लिए 7 जुलाई 2026 को अदालत में अर्जी दाखिल की।
तीनों आरोपियों के पास से कुल ₹49.14 लाख नकद बरामद; जांच शुरू होने से पहले ही कुल बरामदगी ₹78.94 लाख ।
एसआईटी की रिपोर्ट में 27 अप्रैल से 5 जून 2026 के बीच सीसीटीवी फुटेज में करीब 70 मामलों में कर्मचारियों द्वारा नकदी छिपाने का खुलासा।
कुल 6 आरोपियों — अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडे और रामाशंकर मिश्रा — के खिलाफ मुकदमा दर्ज।
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने महासचिव चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे स्वीकार किए।
एसआईटी रिपोर्ट में निगरानी व्यवस्था में गंभीर खामियाँ — तलाशी, बायोमेट्रिक और ड्रेस कोड नियमों का पालन नहीं।

अयोध्या में राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में जांच कर रही पुलिस ने 7 जुलाई 2026 को तीन आरोपियों — लवकुश मिश्रा, अनुकल्प मिश्रा और करुणेश पांडे — की पुलिस रिमांड के लिए अदालत में अर्जी दाखिल की है। पुलिस का तर्क है कि आरोपियों के बैंक खातों और उनके पास से बरामद नकदी के वित्तीय लेनदेन की गहन जांच के लिए हिरासत अपरिहार्य है।

बरामद नकदी और बैंक खातों की जांच

पुलिस के अनुसार, आरोपी लवकुश मिश्रा के पास से ₹14.25 लाख, अनुकल्प मिश्रा के पास से ₹16.82 लाख और करुणेश पांडे के पास से ₹18.07 लाख नकद बरामद किए गए हैं। जांच एजेंसियों को संदेह है कि कथित तौर पर चोरी की गई दान राशि का एक हिस्सा विभिन्न सामान खरीदने में खर्च किया गया।

जांच अधिकारियों के अनुसार, बैंक रिकॉर्ड में आरोपियों की ज्ञात आय की तुलना में कहीं अधिक राशि जमा होने के संकेत मिले हैं। रिमांड के दौरान इस धनराशि के स्रोत और मंदिर की दान राशि की कथित चोरी से उसके संभावित संबंध की पड़ताल की जाएगी।

उल्लेखनीय है कि आरोपी करुणेश पांडे के पिता ने दावा किया है कि उनकी पत्नी के बैंक खाते में ₹18 लाख जमा थे। रिमांड के दौरान पुलिस करुणेश से यह स्पष्ट करने को कहेगी कि यह राशि किस स्रोत से आई।

एसआईटी की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्ष

इससे पहले उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) ने सोमवार को अपनी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट सौंपी। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुरोध पर शुरू हुई इस जांच में दान राशि गिनती के दौरान व्यवस्थित तरीके से नकदी चोरी किए जाने का खुलासा हुआ है।

एसआईटी के अनुसार, 27 अप्रैल से 5 जून 2026 के बीच की सीसीटीवी फुटेज में करीब 70 ऐसे मामले दर्ज हुए, जिनमें गिनती करने वाले कर्मचारी नोटों की गड्डियाँ और नकदी अपने कपड़ों, जूतों तथा अन्य निजी सामान में छिपाते हुए दिखाई दिए। जांच में अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडे और रामाशंकर मिश्रा के खिलाफ प्रथम दृष्टया साक्ष्य मिले हैं और इन सभी के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जा चुका है।

निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था में गंभीर खामियाँ

एसआईटी रिपोर्ट में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के साथ विस्तृत समझौता (एमओयू) और मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) होने के बावजूद कई गंभीर चूकें उजागर की गई हैं। इनमें प्रवेश और निकास पर कर्मचारियों की तलाशी न लिया जाना, बायोमेट्रिक उपस्थिति की व्यवस्था का अभाव, अलग-अलग दान पात्रों की राशि को मिलाकर गिना जाना, ड्रेस कोड और निजी सामान पर प्रतिबंध का पालन न कराया जाना तथा दान पेटियों की चाबियों तक अनधिकृत लोगों की पहुँच शामिल हैं।

रिपोर्ट में पूर्व ट्रस्टी अनिल मिश्रा और दान राशि गिनती के प्रभारी सुभाष श्रीवास्तव को निगरानी में लापरवाही के लिए जिम्मेदार ठहराया गया है। गौरतलब है कि जांच शुरू होने से पहले ही आरोपियों के पास से कुल ₹78.94 लाख नकद और अन्य सामान बरामद किया जा चुका था।

ट्रस्ट की प्रतिक्रिया और इस्तीफे

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए महासचिव चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे मंजूर कर लिए हैं। ट्रस्ट ने पारदर्शिता बढ़ाने के लिए सुधारात्मक कदम उठाने की भी घोषणा की है।

आगे क्या होगा

एसआईटी ने स्पष्ट किया है कि मामले की जांच जारी रहेगी और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए संस्थागत सुधारों की सिफारिश भी की जाएगी। बैंक रिकॉर्ड की जांच के बाद अपराध से अर्जित धन (प्रोसीड्स ऑफ क्राइम) का पूरा ब्यौरा सामने आने की उम्मीद है, जिससे रिमांड अवधि के दौरान और बरामदगी की संभावना भी बनी हुई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो यह सवाल खड़ा करता है कि निगरानी की जिम्मेदारी किसकी थी और वह जवाबदेही कहाँ गई। चंपत राय जैसे वरिष्ठ पदाधिकारी का इस्तीफा नैतिक जिम्मेदारी का संकेत है, लेकिन असली परीक्षा यह है कि क्या ट्रस्ट के सुधारात्मक कदम केवल घोषणाएँ बनकर रह जाएँगे या उनकी स्वतंत्र निगरानी भी होगी। देश के सबसे चर्चित धार्मिक स्थल पर इस तरह की चूक जनविश्वास को गहरी चोट पहुँचाती है।
RashtraPress
7 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला क्या है?
अयोध्या के राम मंदिर में दान राशि की गिनती के दौरान कर्मचारियों द्वारा व्यवस्थित तरीके से नकदी चोरी करने का मामला है। एसआईटी की जांच में 27 अप्रैल से 5 जून 2026 के बीच की सीसीटीवी फुटेज में करीब 70 ऐसे मामले सामने आए जिनमें कर्मचारी नोट कपड़ों और जूतों में छिपाते दिखे।
पुलिस ने किन तीन आरोपियों की रिमांड माँगी है?
पुलिस ने लवकुश मिश्रा (₹14.25 लाख बरामद), अनुकल्प मिश्रा (₹16.82 लाख बरामद) और करुणेश पांडे (₹18.07 लाख बरामद) की रिमांड माँगी है। इन तीनों के बैंक खातों और वित्तीय लेनदेन की जांच के लिए हिरासत जरूरी बताई गई है।
एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट में क्या खुलासे किए?
एसआईटी ने निगरानी में गंभीर खामियाँ उजागर की हैं — कर्मचारियों की तलाशी नहीं, बायोमेट्रिक उपस्थिति नहीं, दान पेटियों की चाबियों तक अनधिकृत पहुँच और ड्रेस कोड का पालन न होना। पूर्व ट्रस्टी अनिल मिश्रा और प्रभारी सुभाष श्रीवास्तव को लापरवाही के लिए जिम्मेदार ठहराया गया है।
श्रीराम जन्मभूमि ट्रस्ट ने इस मामले पर क्या कदम उठाए?
ट्रस्ट ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए महासचिव चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे स्वीकार कर लिए हैं। साथ ही पारदर्शिता बढ़ाने के लिए सुधारात्मक कदम उठाने की घोषणा भी की गई है।
इस मामले में आगे क्या होने की संभावना है?
एसआईटी ने स्पष्ट किया है कि जांच जारी रहेगी और संस्थागत सुधारों की सिफारिश की जाएगी। बैंक रिकॉर्ड की जांच के बाद अपराध से अर्जित धन का पूरा ब्यौरा सामने आने की उम्मीद है, जिससे रिमांड अवधि के दौरान और बरामदगी भी हो सकती है।
राष्ट्र प्रेस
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