राम मंदिर चढ़ावा चोरी: तीन आरोपियों की पुलिस रिमांड की मांग, बैंक खातों में आय से अधिक राशि के संकेत
सारांश
मुख्य बातें
अयोध्या में राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में जांच कर रही पुलिस ने 7 जुलाई 2026 को तीन आरोपियों — लवकुश मिश्रा, अनुकल्प मिश्रा और करुणेश पांडे — की पुलिस रिमांड के लिए अदालत में अर्जी दाखिल की है। पुलिस का तर्क है कि आरोपियों के बैंक खातों और उनके पास से बरामद नकदी के वित्तीय लेनदेन की गहन जांच के लिए हिरासत अपरिहार्य है।
बरामद नकदी और बैंक खातों की जांच
पुलिस के अनुसार, आरोपी लवकुश मिश्रा के पास से ₹14.25 लाख, अनुकल्प मिश्रा के पास से ₹16.82 लाख और करुणेश पांडे के पास से ₹18.07 लाख नकद बरामद किए गए हैं। जांच एजेंसियों को संदेह है कि कथित तौर पर चोरी की गई दान राशि का एक हिस्सा विभिन्न सामान खरीदने में खर्च किया गया।
जांच अधिकारियों के अनुसार, बैंक रिकॉर्ड में आरोपियों की ज्ञात आय की तुलना में कहीं अधिक राशि जमा होने के संकेत मिले हैं। रिमांड के दौरान इस धनराशि के स्रोत और मंदिर की दान राशि की कथित चोरी से उसके संभावित संबंध की पड़ताल की जाएगी।
उल्लेखनीय है कि आरोपी करुणेश पांडे के पिता ने दावा किया है कि उनकी पत्नी के बैंक खाते में ₹18 लाख जमा थे। रिमांड के दौरान पुलिस करुणेश से यह स्पष्ट करने को कहेगी कि यह राशि किस स्रोत से आई।
एसआईटी की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्ष
इससे पहले उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) ने सोमवार को अपनी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट सौंपी। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुरोध पर शुरू हुई इस जांच में दान राशि गिनती के दौरान व्यवस्थित तरीके से नकदी चोरी किए जाने का खुलासा हुआ है।
एसआईटी के अनुसार, 27 अप्रैल से 5 जून 2026 के बीच की सीसीटीवी फुटेज में करीब 70 ऐसे मामले दर्ज हुए, जिनमें गिनती करने वाले कर्मचारी नोटों की गड्डियाँ और नकदी अपने कपड़ों, जूतों तथा अन्य निजी सामान में छिपाते हुए दिखाई दिए। जांच में अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडे और रामाशंकर मिश्रा के खिलाफ प्रथम दृष्टया साक्ष्य मिले हैं और इन सभी के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जा चुका है।
निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था में गंभीर खामियाँ
एसआईटी रिपोर्ट में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के साथ विस्तृत समझौता (एमओयू) और मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) होने के बावजूद कई गंभीर चूकें उजागर की गई हैं। इनमें प्रवेश और निकास पर कर्मचारियों की तलाशी न लिया जाना, बायोमेट्रिक उपस्थिति की व्यवस्था का अभाव, अलग-अलग दान पात्रों की राशि को मिलाकर गिना जाना, ड्रेस कोड और निजी सामान पर प्रतिबंध का पालन न कराया जाना तथा दान पेटियों की चाबियों तक अनधिकृत लोगों की पहुँच शामिल हैं।
रिपोर्ट में पूर्व ट्रस्टी अनिल मिश्रा और दान राशि गिनती के प्रभारी सुभाष श्रीवास्तव को निगरानी में लापरवाही के लिए जिम्मेदार ठहराया गया है। गौरतलब है कि जांच शुरू होने से पहले ही आरोपियों के पास से कुल ₹78.94 लाख नकद और अन्य सामान बरामद किया जा चुका था।
ट्रस्ट की प्रतिक्रिया और इस्तीफे
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए महासचिव चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे मंजूर कर लिए हैं। ट्रस्ट ने पारदर्शिता बढ़ाने के लिए सुधारात्मक कदम उठाने की भी घोषणा की है।
आगे क्या होगा
एसआईटी ने स्पष्ट किया है कि मामले की जांच जारी रहेगी और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए संस्थागत सुधारों की सिफारिश भी की जाएगी। बैंक रिकॉर्ड की जांच के बाद अपराध से अर्जित धन (प्रोसीड्स ऑफ क्राइम) का पूरा ब्यौरा सामने आने की उम्मीद है, जिससे रिमांड अवधि के दौरान और बरामदगी की संभावना भी बनी हुई है।