राम मंदिर दान चोरी: नकदी गिनती केंद्र के अंदर आरोपियों की तस्वीर मिली, 8 गिरफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
अयोध्या के राम मंदिर में दान की कथित चोरी की जांच में 3 जुलाई को एक अहम सबूत सामने आया है — जांच एजेंसियों को पहली ऐसी तस्वीर मिली है जिसमें मुख्य आरोपी अविनाश शुक्ला और अनुकल्प मिश्रा मंदिर के नकदी गिनती केंद्र के भीतर दिखाई दे रहे हैं। यह तस्वीर इस मामले में अब तक का सबसे ठोस दृश्य साक्ष्य मानी जा रही है।
मुख्य घटनाक्रम
जांचकर्ताओं के अनुसार, यह कमरा वही स्थान है जहाँ श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान की गिनती की जाती थी और उसे बैंक को सौंपने की प्रक्रिया के लिए तैयार किया जाता था। सीसीटीवी फुटेज में आरोपियों को गिनती क्षेत्र से नकदी उठाते हुए भी देखा गया है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, शुरुआत में संदिग्धों ने कैमरों से बचने की कोशिश की, लेकिन जब उन्हें यह एहसास हुआ कि निगरानी कक्ष में कोई मौजूद नहीं है, तो उन्होंने खुलेआम नकदी ले जाना शुरू कर दिया।
इस मामले में अब तक 8 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है — अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, टीनू यादव, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडे, रमाशंकर मिश्रा और सुभाष श्रीवास्तव।
भर्ती प्रक्रिया और सुरक्षा खामियाँ
जांच में सामने आया है कि मार्च 2025 में कुंभ तीर्थयात्रा के बाद दान में हुई भारी वृद्धि को देखते हुए ट्रस्ट ने 10 नए कर्मचारियों की भर्ती की थी। उस समय राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव रहे चंपत राय ने यह जिम्मेदारी ट्रस्टी अनिल मिश्रा को सौंपी थी। जांच के मुताबिक, चंपत राय की ओर से भेजे गए सभी उम्मीदवारों का साक्षात्कार अनिल मिश्रा ने लिया और 4 मार्च को मुलाकात के मात्र दो दिन बाद उम्मीदवारों को नियुक्ति पत्र जारी कर दिए गए। अनिल मिश्रा का नाम भी अब इस मामले में आरोपी के रूप में दर्ज है।
जांचकर्ताओं के अनुसार, नव नियुक्त कर्मचारियों को शुरुआत में आधिकारिक पहचान पत्र नहीं दिए गए थे — उन्हें केवल ट्रस्ट की ड्यूटी शीट के आधार पर मंदिर परिसर में प्रवेश की अनुमति दी गई थी। प्रत्येक कर्मचारी को ₹18,000 मासिक वेतन पर सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक की नियमित शिफ्ट में रखा गया था।
दो गिनती केंद्र और निगरानी की कमज़ोरी
जांच में यह भी पता चला है कि मंदिर परिसर में नकदी की गिनती एक नहीं, बल्कि दो अलग-अलग स्थानों पर होती थी। एक केंद्र तीर्थयात्रा सुविधा केंद्र (PFC) भवन के बेसमेंट में था, जबकि दूसरा पुलिस चौकी में संचालित होता था। नव नियुक्त कर्मचारियों को मुख्यतः पुलिस चौकी केंद्र पर तैनात किया गया था, जहाँ वे नोटों को छाँटते, बंडल बनाते और गिनती मशीनें चलाते थे।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, अनुकल्प मिश्रा, अविनाश शुक्ला, करुणेश पांडे और लवकुश मिश्रा पुलिस चौकी केंद्र पर तैनात थे। मनीष कुमार यादव और रमाशंकर मिश्रा को कुछ स्टाफ सदस्यों के पद छोड़ने के बाद टीम में शामिल किया गया था।
PFC बेसमेंट के मुख्य गिनती केंद्र में सीसीटीवी निगरानी कक्ष, कर्मचारियों के लिए भोजन कक्ष और भारतीय स्टेट बैंक (SBI) का एक काउंटर भी था। यहाँ SIS के सुरक्षाकर्मी और कुछ अवसरों पर CRPF के जवान भी तैनात रहते थे।
निगरानी व्यवस्था की विफलता
इतनी सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद, जांचकर्ताओं का कहना है कि निगरानी अपर्याप्त रही। हालाँकि सीसीटीवी फुटेज देखने के लिए दो-तीन कर्मचारी नियुक्त थे, लेकिन वे कथित तौर पर अक्सर निगरानी कक्ष से बाहर रहते थे। गौरतलब है कि सीसीटीवी स्क्रीन उसी कमरे में लगी थी जहाँ नकदी गिनी जाती थी — जो अपने आप में एक बड़ी संरचनात्मक खामी मानी जा रही है।
सेवानिवृत्त बैंक कर्मचारी सुभाष श्रीवास्तव, जो नकदी गिनती प्रक्रिया की देखरेख के लिए जिम्मेदार थे, उनके कर्तव्यों में दान पेटियों से धनराशि प्राप्त करना, गिनती की निगरानी करना और SBI को राशि सौंपना शामिल था। जांच में यह भी सामने आया है कि आभूषणों का कभी भी व्यवस्थित रिकॉर्ड नहीं रखा जाता था, जिससे उनकी चोरी अपेक्षाकृत आसान हो जाती थी।
आगे क्या होगा
जांच एजेंसियाँ अब भर्ती प्रक्रिया, सुरक्षा प्रोटोकॉल और ट्रस्ट प्रबंधन की समग्र समीक्षा कर रही हैं। यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब देश के सबसे प्रतिष्ठित धार्मिक स्थलों में से एक की व्यवस्थागत पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं। आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियों और नए खुलासों की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।