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राम मंदिर दान घोटाला: अयोध्या पुलिस को 20 जमीन पार्सल के रिकॉर्ड मिले, 'प्रोसीड्स ऑफ क्राइम' एंगल से जांच तेज

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राम मंदिर दान घोटाला: अयोध्या पुलिस को 20 जमीन पार्सल के रिकॉर्ड मिले, 'प्रोसीड्स ऑफ क्राइम' एंगल से जांच तेज

सारांश

राम मंदिर दान प्रकरण में जांच अब संपत्ति तक पहुंच गई है — अयोध्या पुलिस को आरोपियों के 20 जमीन पार्सल के रिकॉर्ड मिले हैं और नकदी गिनती केंद्र की एक अहम तस्वीर भी। 'प्रोसीड्स ऑफ क्राइम' का कानूनी दांव अब असली परीक्षा है।

मुख्य बातें

अयोध्या पुलिस को आरोपियों और उनके परिजनों के करीब 20 जमीन पार्सल के रिकॉर्ड प्राप्त हुए; बैंक दस्तावेज़ भी जांच में शामिल।
जांच का फोकस: संपत्ति खरीद की तारीख और राम मंदिर ट्रस्ट से आरोपियों के जुड़ाव का कालक्रम।
यदि धन का स्रोत संदिग्ध पाया गया, तो संपत्तियों को 'प्रोसीड्स ऑफ क्राइम' घोषित कर जब्त किया जा सकता है।
जांच एजेंसियों को नकदी गिनती केंद्र के अंदर आरोपी अविनाश शुक्ला और अनुकल्प मिश्रा की तस्वीर मिली — अहम साक्ष्य माना जा रहा है।
मामले में अब तक 8 लोग गिरफ्तार : अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, टीनू यादव, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडे, रमाशंकर मिश्रा और सुभाष श्रीवास्तव।

अयोध्या पुलिस को राम मंदिर दान प्रकरण में आरोपियों और उनके परिजनों के करीब 20 जमीन पार्सल के रिकॉर्ड प्राप्त हो गए हैं, और बैंक खातों की जानकारी भी जांच एजेंसियों के हाथ लगी है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, यह देखा जा रहा है कि इन संपत्तियों की खरीद कब हुई और आरोपियों का राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़ाव किस तारीख से शुरू हुआ — इन दोनों बिंदुओं का मिलान जांच का केंद्रबिंदु बन गया है।

जमीन और बैंक रिकॉर्ड की जांच

पुलिस सूत्रों ने बताया कि राजस्व विभाग से आरोपियों और उनके परिवार के सदस्यों के भूमि अभिलेख मांगे गए थे। अब तक करीब 20 जमीन पार्सल के दस्तावेज़ पुलिस को सौंपे जा चुके हैं, जिनका सत्यापन जारी है। इसके समानांतर बैंक रिकॉर्ड भी खंगाले जा रहे हैं ताकि धन के स्रोत की पड़ताल की जा सके।

सूत्रों का कहना है कि यदि जांच में यह स्थापित हो जाता है कि आरोपियों ने राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़ने के बाद ये संपत्तियां खरीदीं और उनके लिए इस्तेमाल धन का स्रोत संदिग्ध पाया गया, तो प्रशासन इन्हें 'प्रोसीड्स ऑफ क्राइम' (अपराध से अर्जित संपत्ति) घोषित कर आगे की कानूनी कार्रवाई कर सकता है।

नकदी गिनती केंद्र की तस्वीर — अहम सबूत

4 जुलाई को जांच एजेंसियों को एक महत्वपूर्ण तस्वीर मिली, जिसमें दो आरोपी — अविनाश शुक्ला और अनुकल्प मिश्रा — मंदिर के नकदी गिनती केंद्र के अंदर दिखाई दे रहे हैं। यह वही कमरा है जहाँ श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान की गिनती की जाती थी और उसे आगे की प्रक्रिया के लिए तैयार किया जाता था।

जांचकर्ता इस तस्वीर को अहम साक्ष्य मान रहे हैं, क्योंकि यह आरोपियों की उस स्थान तक सीधी पहुंच स्थापित करती है जहाँ दान-राशि का संचालन होता था। गौरतलब है कि इससे पहले अविनाश शुक्ला की निशानदेही पर एक वाहन को भी 'अपराध से अर्जित संपत्ति' मानते हुए जब्त किया जा चुका है।

अब तक आठ गिरफ्तारियां

इस प्रकरण में अब तक आठ लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। गिरफ्तार आरोपियों में अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, टीनू यादव, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडे, रमाशंकर मिश्रा और सुभाष श्रीवास्तव शामिल हैं।

आगे क्या होगा

यह मामला ऐसे समय में तूल पकड़ रहा है जब राम मंदिर की साख और दान प्रबंधन की पारदर्शिता राष्ट्रीय चर्चा में है। जांच एजेंसियां अब संपत्ति खरीद की तारीखों और ट्रस्ट से जुड़ाव के कालक्रम को मिलाकर 'प्रोसीड्स ऑफ क्राइम' का कानूनी आधार तैयार करने में जुटी हैं। यदि यह कड़ी जुड़ती है, तो संपत्ति जब्ती की प्रक्रिया और तेज हो सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि संपत्ति की उत्पत्ति साबित करनी होगी। नकदी गिनती केंद्र की तस्वीर परिस्थितिजन्य साक्ष्य के रूप में महत्वपूर्ण है, लेकिन अदालत में टिकने के लिए इसे वित्तीय साक्ष्यों की ठोस श्रृंखला से जोड़ना होगा। यह मामला इसलिए भी बड़ा है क्योंकि यह किसी सरकारी संस्था का नहीं, बल्कि देश के सबसे संवेदनशील धार्मिक ट्रस्ट का मामला है — जहाँ जवाबदेही की माँग और राजनीतिक संवेदनशीलता दोनों एक साथ काम करती हैं।
RashtraPress
4 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राम मंदिर दान घोटाला क्या है?
यह अयोध्या के राम मंदिर ट्रस्ट में दान-राशि के कथित गबन से जुड़ा मामला है, जिसमें नकदी गिनती केंद्र से जुड़े कर्मियों पर अपराध से संपत्ति अर्जित करने का आरोप है। अब तक 8 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
'प्रोसीड्स ऑफ क्राइम' एंगल से जांच का क्या मतलब है?
यदि जांच में यह साबित होता है कि आरोपियों ने राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़ने के बाद संदिग्ध धन से संपत्तियां खरीदीं, तो कानूनी प्रावधानों के तहत इन्हें 'अपराध से अर्जित संपत्ति' मानकर जब्त किया जा सकता है। पुलिस पहले ही एक वाहन इसी आधार पर जब्त कर चुकी है।
नकदी गिनती केंद्र की तस्वीर जांच में क्यों महत्वपूर्ण है?
इस तस्वीर में आरोपी अविनाश शुक्ला और अनुकल्प मिश्रा उस कमरे के अंदर दिखाई दे रहे हैं जहाँ श्रद्धालुओं के दान की गिनती होती थी। यह उनकी सीधी पहुंच और उपस्थिति स्थापित करती है, जो जांच में परिस्थितिजन्य साक्ष्य के रूप में अहम मानी जा रही है।
इस मामले में अब तक कितने और कौन-से लोग गिरफ्तार हुए हैं?
अब तक 8 लोगों को गिरफ्तार किया गया है: अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, टीनू यादव, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडे, रमाशंकर मिश्रा और सुभाष श्रीवास्तव।
जांच में आगे क्या होने की संभावना है?
पुलिस जमीन खरीद की तारीखों और ट्रस्ट से जुड़ाव के कालक्रम का मिलान कर रही है। यदि वित्तीय कड़ी जुड़ती है, तो संपत्ति जब्ती की कार्रवाई और तेज हो सकती है तथा मामले में अतिरिक्त कानूनी धाराएं जोड़ी जा सकती हैं।
राष्ट्र प्रेस
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