राजस्थान हाईकोर्ट का स्वतः संज्ञान: जोधपुर पीठ के 21 मीटर ऊंचे गुंबद की संरचनात्मक सुरक्षा पर गंभीर सवाल
सारांश
मुख्य बातें
राजस्थान उच्च न्यायालय ने जोधपुर स्थित अपनी प्रधान पीठ के 21 मीटर ऊंचे केंद्रीय गुंबद की जर्जर होती संरचनात्मक स्थिति पर 11 अगस्त 2026 को स्वतः संज्ञान लिया है। विशेषज्ञों की रिपोर्टों में अचानक कंक्रीट गिरने के संभावित खतरे का उल्लेख किए जाने के बाद न्यायालय ने इस मामले को जनहित याचिका (PIL) के रूप में पंजीकृत करने का निर्देश दिया है। न्यायाधीशों, अधिवक्ताओं, न्यायालय कर्मचारियों और आम नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए न्यायालय ने तत्काल उपचारात्मक कदम उठाने की आवश्यकता रेखांकित की है।
मामले की पृष्ठभूमि और खंडपीठ का निर्देश
न्यायमूर्ति डॉ. पुष्पेंद्र सिंह भाटी और न्यायमूर्ति प्रवीर भटनागर की खंडपीठ ने विशेषज्ञ समितियों के निष्कर्षों के आधार पर यह स्वतः संज्ञान लिया। उच्च न्यायालय भवन का ढांचागत निर्माण कार्य 2013 के अंत तक पूरा हुआ था, जबकि भवन को दिसंबर 2019 में औपचारिक रूप से सौंपा गया और वरिष्ठ संवैधानिक गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति में इसका उद्घाटन किया गया। गौरतलब है कि उद्घाटन के महज कुछ वर्षों के भीतर ही भवन में गंभीर संरचनात्मक खामियाँ उभरने लगीं।
छत और गुंबद गिरने की घटनाएँ
2023 से अब तक भवन के कई हिस्सों में छत प्लास्टर और फॉल्स सीलिंग गिरने की अनेक घटनाएँ दर्ज की जा चुकी हैं। 20 फरवरी 2023 को न्यायालय कक्ष संख्या 14 में फॉल्स सीलिंग गिरी। 29 अप्रैल 2023 को केंद्रीय गुंबद का एक हिस्सा भी गिर गया। इसके अतिरिक्त, कोर्टरूम 2, 9 और 16, चैंबर 16, सिविल विविध अपील अनुभाग, बिल अनुभाग, लिफ्ट के निकट का क्षेत्र और कक्ष संख्या 19 में भी ऐसी घटनाएँ सामने आई हैं। नवंबर 2025 में रजिस्ट्रार जनरल के कार्यालय की ओर जाने वाले गलियारे में भी कथित तौर पर फॉल्स सीलिंग गिरी।
IIT जोधपुर और IIT बॉम्बे की विशेषज्ञ रिपोर्टें
आईआईटी जोधपुर की एक विशेषज्ञ समिति ने 2023 में भवन का निरीक्षण किया और स्लैब के कंक्रीट आवरण में गंभीर जंग, स्टील सुदृढीकरण का क्षरण तथा कंक्रीट में दरारें जैसी खामियाँ पाईं। समिति ने छत की जलरोधक प्रणाली में भी कमियाँ उजागर कीं और एक व्यापक संरचनात्मक ऑडिट की सिफारिश की। बाद के ऑडिट में कंक्रीट की गुणवत्ता, कार्बोनेशन और क्लोराइड स्तर से जुड़ी चिंताएँ सामने आईं — पानी के नमूनों में क्लोराइड का स्तर निर्धारित सीमा से अधिक पाया गया।
हाल ही में आईआईटी बॉम्बे द्वारा किए गए संरचनात्मक ऑडिट ने स्थिति को और गंभीर बताया है। इस रिपोर्ट के अनुसार, सरिया में जंग, कार्बन जमाव और क्लोराइड का प्रभाव संरचनात्मक गिरावट के प्रमुख कारण हैं। निरीक्षण किए गए क्षेत्रों में से लगभग 40 प्रतिशत में कंक्रीट के टूटने का खतरा पाया गया। रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि नमी और रिसाव बढ़ने से जंग की प्रक्रिया तेज हो सकती है और कंक्रीट के हिस्से अचानक ढह सकते हैं।
मरम्मत का अनुमान और तत्काल कदम
इन खामियों के मद्देनज़र राजस्थान राज्य सड़क विकास एवं निर्माण निगम (RSRDC) ने उपलब्ध तकनीकी रिपोर्टों के आधार पर मरम्मत और जीर्णोद्धार कार्य का अनुमान तैयार किया है, जिसकी अनुमानित लागत लगभग ₹57.65 करोड़ है। प्रस्तावित कार्य में बीम, स्तंभ और स्लैब जैसे संरचनात्मक तत्वों की मरम्मत के साथ-साथ रिसाव, जर्जर दीवारों और प्लंबिंग खामियों को दूर करना शामिल है।
न्यायालय के निर्देश पर केंद्रीय गुंबद के नीचे स्थित गोलाकार खुले क्षेत्र को बैरिकेड लगाकर बंद कर दिया गया है और प्रभावित क्षेत्रों में आवागमन प्रतिबंधित किया गया है। RSRDC के परियोजना निदेशक को रेट्रोफिटिंग योजना तैयार करने और रिसाव व प्लंबिंग लीकेज को तत्काल ठीक करने का निर्देश दिया गया है।
आगे की राह
न्यायालय का यह हस्तक्षेप ऐसे समय में आया है जब भवन की संरचनात्मक स्थिति को लेकर चिंताएँ लगातार बढ़ रही हैं। आईआईटी बॉम्बे की रिपोर्ट में तत्काल इंजीनियरिंग हस्तक्षेप की आवश्यकता पर बल दिया गया है। PIL के रूप में पंजीकृत इस मामले में अगली सुनवाई में न्यायालय RSRDC की रेट्रोफिटिंग योजना और मरम्मत की समयसीमा की समीक्षा करेगा। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि ₹57.65 करोड़ के अनुमानित खर्च के साथ की जाने वाली मरम्मत भवन को दीर्घकालिक सुरक्षा प्रदान कर पाती है या नहीं।