11 अगस्त 2026
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राजस्थान हाईकोर्ट का स्वतः संज्ञान: जोधपुर पीठ के 21 मीटर ऊंचे गुंबद की संरचनात्मक सुरक्षा पर गंभीर सवाल

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राजस्थान हाईकोर्ट का स्वतः संज्ञान: जोधपुर पीठ के 21 मीटर ऊंचे गुंबद की संरचनात्मक सुरक्षा पर गंभीर सवाल

सारांश

राजस्थान हाईकोर्ट का अपने ही भवन पर स्वतः संज्ञान — यह महज प्रशासनिक कदम नहीं, बल्कि गंभीर चेतावनी है। IIT बॉम्बे ने 40% क्षेत्र में कंक्रीट ढहने का खतरा बताया, गुंबद का हिस्सा 2023 में गिर चुका है, और ₹57.65 करोड़ की मरम्मत अभी बाकी है।

मुख्य बातें

राजस्थान उच्च न्यायालय ने 11 अगस्त 2026 को जोधपुर पीठ के 21 मीटर ऊंचे केंद्रीय गुंबद की संरचनात्मक सुरक्षा पर स्वतः संज्ञान लेते हुए मामले को PIL के रूप में पंजीकृत करने का निर्देश दिया।
IIT बॉम्बे के हालिया ऑडिट में निरीक्षित क्षेत्रों के लगभग 40% हिस्से में कंक्रीट टूटने का खतरा पाया गया; सरिया में जंग और क्लोराइड का प्रभाव प्रमुख कारण।
29 अप्रैल 2023 को गुंबद का एक हिस्सा गिर चुका है; 2023 से कोर्टरूम 2, 9, 14, 16 और अन्य स्थानों पर फॉल्स सीलिंग गिरने की अनेक घटनाएँ दर्ज।
RSRDC ने मरम्मत और जीर्णोद्धार की अनुमानित लागत ₹57.65 करोड़ आँकी है।
केंद्रीय गुंबद के नीचे का क्षेत्र बैरिकेड से बंद; RSRDC के परियोजना निदेशक को रेट्रोफिटिंग योजना तैयार करने का निर्देश।

राजस्थान उच्च न्यायालय ने जोधपुर स्थित अपनी प्रधान पीठ के 21 मीटर ऊंचे केंद्रीय गुंबद की जर्जर होती संरचनात्मक स्थिति पर 11 अगस्त 2026 को स्वतः संज्ञान लिया है। विशेषज्ञों की रिपोर्टों में अचानक कंक्रीट गिरने के संभावित खतरे का उल्लेख किए जाने के बाद न्यायालय ने इस मामले को जनहित याचिका (PIL) के रूप में पंजीकृत करने का निर्देश दिया है। न्यायाधीशों, अधिवक्ताओं, न्यायालय कर्मचारियों और आम नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए न्यायालय ने तत्काल उपचारात्मक कदम उठाने की आवश्यकता रेखांकित की है।

मामले की पृष्ठभूमि और खंडपीठ का निर्देश

न्यायमूर्ति डॉ. पुष्पेंद्र सिंह भाटी और न्यायमूर्ति प्रवीर भटनागर की खंडपीठ ने विशेषज्ञ समितियों के निष्कर्षों के आधार पर यह स्वतः संज्ञान लिया। उच्च न्यायालय भवन का ढांचागत निर्माण कार्य 2013 के अंत तक पूरा हुआ था, जबकि भवन को दिसंबर 2019 में औपचारिक रूप से सौंपा गया और वरिष्ठ संवैधानिक गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति में इसका उद्घाटन किया गया। गौरतलब है कि उद्घाटन के महज कुछ वर्षों के भीतर ही भवन में गंभीर संरचनात्मक खामियाँ उभरने लगीं।

छत और गुंबद गिरने की घटनाएँ

2023 से अब तक भवन के कई हिस्सों में छत प्लास्टर और फॉल्स सीलिंग गिरने की अनेक घटनाएँ दर्ज की जा चुकी हैं। 20 फरवरी 2023 को न्यायालय कक्ष संख्या 14 में फॉल्स सीलिंग गिरी। 29 अप्रैल 2023 को केंद्रीय गुंबद का एक हिस्सा भी गिर गया। इसके अतिरिक्त, कोर्टरूम 2, 9 और 16, चैंबर 16, सिविल विविध अपील अनुभाग, बिल अनुभाग, लिफ्ट के निकट का क्षेत्र और कक्ष संख्या 19 में भी ऐसी घटनाएँ सामने आई हैं। नवंबर 2025 में रजिस्ट्रार जनरल के कार्यालय की ओर जाने वाले गलियारे में भी कथित तौर पर फॉल्स सीलिंग गिरी।

IIT जोधपुर और IIT बॉम्बे की विशेषज्ञ रिपोर्टें

आईआईटी जोधपुर की एक विशेषज्ञ समिति ने 2023 में भवन का निरीक्षण किया और स्लैब के कंक्रीट आवरण में गंभीर जंग, स्टील सुदृढीकरण का क्षरण तथा कंक्रीट में दरारें जैसी खामियाँ पाईं। समिति ने छत की जलरोधक प्रणाली में भी कमियाँ उजागर कीं और एक व्यापक संरचनात्मक ऑडिट की सिफारिश की। बाद के ऑडिट में कंक्रीट की गुणवत्ता, कार्बोनेशन और क्लोराइड स्तर से जुड़ी चिंताएँ सामने आईं — पानी के नमूनों में क्लोराइड का स्तर निर्धारित सीमा से अधिक पाया गया।

हाल ही में आईआईटी बॉम्बे द्वारा किए गए संरचनात्मक ऑडिट ने स्थिति को और गंभीर बताया है। इस रिपोर्ट के अनुसार, सरिया में जंग, कार्बन जमाव और क्लोराइड का प्रभाव संरचनात्मक गिरावट के प्रमुख कारण हैं। निरीक्षण किए गए क्षेत्रों में से लगभग 40 प्रतिशत में कंक्रीट के टूटने का खतरा पाया गया। रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि नमी और रिसाव बढ़ने से जंग की प्रक्रिया तेज हो सकती है और कंक्रीट के हिस्से अचानक ढह सकते हैं।

मरम्मत का अनुमान और तत्काल कदम

इन खामियों के मद्देनज़र राजस्थान राज्य सड़क विकास एवं निर्माण निगम (RSRDC) ने उपलब्ध तकनीकी रिपोर्टों के आधार पर मरम्मत और जीर्णोद्धार कार्य का अनुमान तैयार किया है, जिसकी अनुमानित लागत लगभग ₹57.65 करोड़ है। प्रस्तावित कार्य में बीम, स्तंभ और स्लैब जैसे संरचनात्मक तत्वों की मरम्मत के साथ-साथ रिसाव, जर्जर दीवारों और प्लंबिंग खामियों को दूर करना शामिल है।

न्यायालय के निर्देश पर केंद्रीय गुंबद के नीचे स्थित गोलाकार खुले क्षेत्र को बैरिकेड लगाकर बंद कर दिया गया है और प्रभावित क्षेत्रों में आवागमन प्रतिबंधित किया गया है। RSRDC के परियोजना निदेशक को रेट्रोफिटिंग योजना तैयार करने और रिसाव व प्लंबिंग लीकेज को तत्काल ठीक करने का निर्देश दिया गया है।

आगे की राह

न्यायालय का यह हस्तक्षेप ऐसे समय में आया है जब भवन की संरचनात्मक स्थिति को लेकर चिंताएँ लगातार बढ़ रही हैं। आईआईटी बॉम्बे की रिपोर्ट में तत्काल इंजीनियरिंग हस्तक्षेप की आवश्यकता पर बल दिया गया है। PIL के रूप में पंजीकृत इस मामले में अगली सुनवाई में न्यायालय RSRDC की रेट्रोफिटिंग योजना और मरम्मत की समयसीमा की समीक्षा करेगा। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि ₹57.65 करोड़ के अनुमानित खर्च के साथ की जाने वाली मरम्मत भवन को दीर्घकालिक सुरक्षा प्रदान कर पाती है या नहीं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि सार्वजनिक निर्माण में जवाबदेही की व्यापक विफलता का प्रतीक है। भवन दिसंबर 2019 में सौंपा गया और तीन वर्षों के भीतर ही IIT जोधपुर को गंभीर खामियाँ मिलीं — यह प्रश्न उठता है कि निर्माण गुणवत्ता की निगरानी कहाँ चूकी। ₹57.65 करोड़ की मरम्मत उस भवन पर जो अभी एक दशक भी पुराना नहीं हुआ, यह सार्वजनिक धन के उपयोग और ठेका प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े करता है। न्यायालय का स्वतः संज्ञान सराहनीय है, लेकिन असली परीक्षा यह है कि रेट्रोफिटिंग योजना समयबद्ध और सत्यापन-योग्य हो — अन्यथा यह PIL भी उन फाइलों में जुड़ जाएगी जिन पर धूल जमती रही।
RashtraPress
11 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राजस्थान हाईकोर्ट ने जोधपुर पीठ के गुंबद पर स्वतः संज्ञान क्यों लिया?
विशेषज्ञ समितियों — विशेषकर IIT जोधपुर और IIT बॉम्बे — की रिपोर्टों में भवन के 21 मीटर ऊंचे केंद्रीय गुंबद सहित अनेक हिस्सों में संरचनात्मक खामियाँ और अचानक कंक्रीट गिरने का खतरा पाया गया। न्यायाधीशों, अधिवक्ताओं और आम जनता की सुरक्षा को देखते हुए न्यायमूर्ति डॉ. पुष्पेंद्र सिंह भाटी और न्यायमूर्ति प्रवीर भटनागर की खंडपीठ ने 11 अगस्त 2026 को इसे PIL के रूप में पंजीकृत करने का निर्देश दिया।
IIT बॉम्बे की ऑडिट रिपोर्ट में क्या पाया गया?
IIT बॉम्बे के हालिया संरचनात्मक ऑडिट के अनुसार, निरीक्षित क्षेत्रों के लगभग 40 प्रतिशत हिस्से में कंक्रीट टूटने का खतरा है। सरिया में जंग, कार्बन जमाव और क्लोराइड का प्रभाव संरचनात्मक गिरावट के प्रमुख कारण बताए गए हैं। रिपोर्ट में तत्काल इंजीनियरिंग हस्तक्षेप की आवश्यकता पर बल दिया गया है।
जोधपुर हाईकोर्ट भवन में अब तक कौन-कौन सी घटनाएँ हो चुकी हैं?
20 फरवरी 2023 को कोर्टरूम 14 में फॉल्स सीलिंग गिरी और 29 अप्रैल 2023 को गुंबद का एक हिस्सा गिर गया। इसके अलावा कोर्टरूम 2, 9 और 16, चैंबर 16, बिल अनुभाग, लिफ्ट क्षेत्र और कोर्टरूम 19 में भी ऐसी घटनाएँ दर्ज हैं। नवंबर 2025 में रजिस्ट्रार जनरल के कार्यालय की ओर जाने वाले गलियारे में भी कथित तौर पर फॉल्स सीलिंग गिरी।
मरम्मत पर कितना खर्च आने का अनुमान है और कौन करेगा काम?
RSRDC (राजस्थान राज्य सड़क विकास एवं निर्माण निगम) ने मरम्मत और जीर्णोद्धार की अनुमानित लागत लगभग ₹57.65 करोड़ आँकी है। प्रस्तावित कार्य में बीम, स्तंभ, स्लैब की मरम्मत के साथ-साथ रिसाव और प्लंबिंग खामियाँ दूर करना शामिल है। RSRDC के परियोजना निदेशक को रेट्रोफिटिंग योजना तैयार करने का निर्देश दिया गया है।
फिलहाल भवन में क्या सुरक्षा उपाय किए गए हैं?
न्यायालय के निर्देश पर केंद्रीय गुंबद के नीचे स्थित गोलाकार खुले क्षेत्र को बैरिकेड लगाकर बंद कर दिया गया है और प्रभावित क्षेत्रों में आवागमन प्रतिबंधित किया गया है। RSRDC को रिसाव और प्लंबिंग लीकेज तत्काल ठीक करने का भी निर्देश दिया गया है।
राष्ट्र प्रेस
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