मणिपुर को ₹2.66 करोड़ की न्यायिक बुनियादी ढाँचा निधि, नए कोर्ट रूम से मिलेगी त्वरित न्याय की राह
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय विधि और न्याय मंत्रालय ने वित्त वर्ष 2025-26 में मणिपुर की न्यायिक क्षमता सुदृढ़ करने के लिए ₹2.66 करोड़ की राशि आवंटित की है। यह धनराशि केंद्र प्रायोजित योजनाओं (CSS) के अंतर्गत SNA-SPARSH डिजिटल निधि प्रबंधन प्रणाली के माध्यम से जारी की गई है, जिसका उद्देश्य बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर के ज़रिए आम नागरिकों की न्याय तक पहुँच सुनिश्चित करना है।
क्या है SNA-SPARSH प्रणाली
SNA-SPARSH भारत सरकार की एक डिजिटल निधि प्रबंधन प्रणाली है, जो केंद्र प्रायोजित योजनाओं के तहत फंड ट्रांसफर में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करती है। इस प्रणाली के माध्यम से आवंटित राशि सीधे राज्य के निर्धारित खातों में पहुँचती है, जिससे बिचौलियों की भूमिका समाप्त होती है और धन के दुरुपयोग की आशंका कम होती है।
मुख्य घटनाक्रम: कोर्ट रूम निर्माण का लक्ष्य
विधि और न्याय मंत्रालय ने अपनी आधिकारिक एक्स (पूर्व में ट्विटर) पोस्ट में स्पष्ट किया कि यह आवंटन मणिपुर में नए कोर्ट रूम बनाने के लिए है, जिससे विवादों का तेज़ निपटारा संभव होगा और लोगों के लिए कानूनी व्यवस्था तक पहुँचना सुगम होगा। मंत्रालय ने इसे 'न्याय पाना आसान' बनाने की दिशा में एक ठोस कदम बताया।
यह ऐसे समय में आया है जब मणिपुर 3 मई 2023 से जातीय हिंसा की चपेट में है और राज्य की न्यायिक व प्रशासनिक व्यवस्था पर असाधारण दबाव बना हुआ है। न्यायालय की क्षमता बढ़ाना इस संदर्भ में विशेष रूप से महत्त्वपूर्ण माना जा रहा है।
मुख्यमंत्री की शांति की अपील
मणिपुर के मुख्यमंत्री खेमचंद सिंह ने 4 जुलाई को कहा था कि हिंसा रोकने और नागरिकों तथा चुने हुए प्रतिनिधियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हरसंभव प्रयास किए गए हैं। उन्होंने दोहराया कि संघर्षग्रस्त राज्य में स्थायी शांति बहाल करने का एकमात्र मार्ग बातचीत है।
मुख्यमंत्री खेमचंद सिंह ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) के पूर्व विधायक और वरिष्ठ आदिवासी नेता वुंगजागिन वाल्टे के अंतिम संस्कार में भाग लिया, जो चुराचांदपुर में संपन्न हुआ। दिवंगत नेता के आवास पर मीडियाकर्मियों से बातचीत में उन्होंने कहा कि राज्य के समग्र विकास के लिए स्थायी शांति अनिवार्य है। जब उनसे शांति के रोडमैप के बारे में पूछा गया, तो मुस्कुराते हुए उन्होंने कहा, 'आपकी मुस्कान शांति का रास्ता है।'
ऐतिहासिक संदर्भ: पहली बार चुराचांदपुर पहुँचे सीएम
गौरतलब है कि 3 मई 2023 को मणिपुर में जातीय हिंसा भड़कने के बाद मुख्यमंत्री खेमचंद सिंह कुकी-जो आदिवासी बहुल चुराचांदपुर जिले का दौरा करने वाले पहले मुख्यमंत्री बने। यह दौरा राज्य में समावेशी शासन की दिशा में एक प्रतीकात्मक कदम के रूप में देखा जा रहा है।
आम जनता पर असर
नए कोर्ट रूम बनने से मणिपुर के उन नागरिकों को सबसे अधिक लाभ होगा जो लंबित मामलों और न्यायालय की सीमित क्षमता के कारण न्याय पाने में देरी झेल रहे हैं। हिंसा प्रभावित क्षेत्रों में कानूनी विवादों, मुआवज़े के दावों और पुनर्वास संबंधी मामलों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। केंद्र का यह आवंटन उस बैकलॉग को कम करने में सहायक हो सकता है।