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अयोध्या श्रीराम मंदिर चढ़ावा चोरी: सुप्रीम कोर्ट ने SIT पुनर्गठन का सुझाव दिया, राजनीति से दूर रहने का निर्देश

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अयोध्या श्रीराम मंदिर चढ़ावा चोरी: सुप्रीम कोर्ट ने SIT पुनर्गठन का सुझाव दिया, राजनीति से दूर रहने का निर्देश

सारांश

अयोध्या के श्रीराम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी पर सुप्रीम कोर्ट ने SIT पुनर्गठन का सुझाव दिया और राजनीति से दूर रहने का निर्देश दिया। 8 गिरफ्तारियाँ हो चुकी हैं; केंद्र सरकार अगले सोमवार को अपना रुख स्पष्ट करेगी।

मुख्य बातें

सर्वोच्च न्यायालय ने 20 जुलाई को अयोध्या श्रीराम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में चार याचिकाओं पर सुनवाई की।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने SIT पुनर्गठन का सुझाव दिया; वरिष्ठ IPS अधिकारी की अगुआई में जांच की सिफारिश।
याचिकाओं में CBI जांच , CAG या फोरेंसिक ऑडिट और ट्रस्ट के वित्तीय रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की मांग।
अब तक 8 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है; राज्य सरकार की स्टेटस रिपोर्ट दाखिल।
अगली सुनवाई अगले सोमवार को; केंद्र सरकार अपना रुख स्पष्ट करेगी।

सर्वोच्च न्यायालय ने 20 जुलाई को अयोध्या के श्रीराम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी की स्वतंत्र जांच की मांग वाली चार याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि वह इस मामले को पूरी गंभीरता से देख रहा है। अदालत ने साथ ही सभी पक्षों को राजनीतिक बयानबाजी से बचने का स्पष्ट निर्देश दिया।

पीठ और याचिकाकर्ता

इस मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की तीन सदस्यीय पीठ ने की। ये चार याचिकाएं राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के सांसद सुधाकर सिंह, अधिवक्ता नरेंद्र कुमार गोस्वामी, अधिवक्ता अजय कुमार राय एवं दिनेश कुमार यादव और हिंदू धर्म परिषद की ओर से दायर की गई हैं।

याचिकाओं में क्या माँगा गया

याचिकाकर्ताओं ने कथित चोरी की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी — विशेष रूप से केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) — से कराने की मांग की है। इसके अतिरिक्त श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के वित्तीय लेन-देन का नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) या फोरेंसिक ऑडिट कराने, ट्रस्ट के सभी वित्तीय रिकॉर्ड सुरक्षित रखने और जांच पूरी होने तक ट्रस्ट को बड़े वित्तीय निर्णय लेने से रोकने की भी मांग की गई है।

SIT पुनर्गठन का सुझाव

सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने विशेष जांच दल (SIT) के पुनर्गठन का सुझाव देते हुए कहा कि जांच की अगुआई किसी वरिष्ठ और अनुभवी IPS अधिकारी को सौंपी जानी चाहिए, ताकि जांच निर्णायक स्तर तक पहुंच सके। पीठ ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता को निर्देश दिया कि वे केंद्र सरकार से आवश्यक निर्देश लेकर अगली सुनवाई में अदालत को अवगत कराएं।

सरकार का पक्ष

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि वर्तमान SIT में पुलिस अधिकारी शामिल हैं और यह किसी अलग जांच एजेंसी की जांच नहीं, बल्कि संज्ञेय अपराध की जानकारी के आधार पर दर्ज FIR पर आधारित पुलिस जांच है। उन्होंने यह भी बताया कि राज्य सरकार की ओर से एक दिन पूर्व ही स्टेटस रिपोर्ट दाखिल की जा चुकी है और अब तक आठ लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। मेहता ने यह भी स्पष्ट किया कि जांच से जुड़ी सभी जानकारियां सार्वजनिक रूप से साझा नहीं की जा सकतीं, क्योंकि इससे जांच की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। SIT ने प्रारंभिक जांच में माना है कि मामला संज्ञेय अपराध का बनता है।

आगे क्या होगा

इस मामले की अगली सुनवाई अगले सोमवार को निर्धारित है, जब केंद्र सरकार SIT पुनर्गठन और आगे की जांच की स्थिति पर अदालत के समक्ष अपना रुख स्पष्ट करेगी। यह मामला धार्मिक स्थलों के वित्तीय प्रशासन और जवाबदेही के व्यापक सवालों को भी उठाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो पारदर्शिता की दृष्टि से एक बड़ा रिक्त स्थान है। अदालत की 'राजनीति न करें' की टिप्पणी संकेत देती है कि इस मामले का राजनीतिकरण न्यायिक प्रक्रिया को बाधित करने की क्षमता रखता है।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अयोध्या श्रीराम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला क्या है?
यह मामला अयोध्या के श्रीराम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी से संबंधित है, जिसमें FIR दर्ज होने के बाद पुलिस जांच चल रही है। अब तक 8 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है और मामला सर्वोच्च न्यायालय तक पहुँच गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में क्या कहा?
सर्वोच्च न्यायालय ने मामले को गंभीरता से लेते हुए SIT के पुनर्गठन का सुझाव दिया और कहा कि जांच की अगुआई किसी वरिष्ठ IPS अधिकारी को सौंपी जाए। अदालत ने सभी पक्षों को राजनीतिक बयानबाजी से बचने का भी निर्देश दिया।
याचिकाओं में क्या मांगें की गई हैं?
याचिकाओं में CBI से जांच, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का CAG या फोरेंसिक ऑडिट, ट्रस्ट के वित्तीय रिकॉर्ड सुरक्षित रखने और जांच पूरी होने तक ट्रस्ट को बड़े वित्तीय निर्णय लेने से रोकने की मांग शामिल है।
इस मामले में अगली सुनवाई कब होगी?
अगली सुनवाई अगले सोमवार को निर्धारित है, जब केंद्र सरकार SIT पुनर्गठन और जांच की स्थिति पर अदालत के समक्ष अपना रुख स्पष्ट करेगी।
वर्तमान SIT में कौन शामिल है और इसे क्यों बदलने का सुझाव आया?
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के अनुसार, वर्तमान SIT में पुलिस अधिकारी शामिल हैं और यह FIR के आधार पर नियमित पुलिस जांच है। सर्वोच्च न्यायालय ने जांच को अधिक निर्णायक और विश्वसनीय बनाने के लिए किसी वरिष्ठ IPS अधिकारी की अगुआई में पुनर्गठन का सुझाव दिया।
राष्ट्र प्रेस
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