26 सितंबर 2026
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सत्य निकेतन अवैध निर्माण मामला: वकील ऋषभ सिंह ने MCD के ऑडिट पर उठाए गंभीर सवाल, कोर्ट ने दिए 10 दिन

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सत्य निकेतन अवैध निर्माण मामला: वकील ऋषभ सिंह ने MCD के ऑडिट पर उठाए गंभीर सवाल, कोर्ट ने दिए 10 दिन

सारांश

सत्य निकेतन अवैध निर्माण मामले में कोर्ट ने MCD को जवाब के लिए 10 दिन दिए। वकील ऋषभ सिंह ने सवाल उठाया कि बिना नोटिस DTU-IIT से सर्टिफिकेशन कैसे? कनवर्जन फीस लेकर भी निर्माण मानकों की अनदेखी और मुखर्जी नगर में छात्रों की बदहाली केंद्रीय मुद्दे हैं।

मुख्य बातें

दिल्ली कोर्ट ने सत्य निकेतन अवैध निर्माण मामले में एमसीडी सहित प्रतिवादियों को जवाब दाखिल करने के लिए 10 दिन का समय दिया।
वकील ऋषभ सिंह ने MCD के हलफनामे पर आपत्ति जताई — DTU व IIT विशेषज्ञों से सर्टिफिकेशन बिना औपचारिक नोटिस के कराया जा रहा है।
MCD पर आरोप कि उसने पीजी मालिकों से कनवर्जन शुल्क तो वसूला, लेकिन निर्माण मानकों का अनुपालन सुनिश्चित नहीं किया।
मुखर्जी नगर में भीड़भाड़ वाले पीजी मकानों में रह रहे छात्रों की सुरक्षा पर गंभीर चिंता व्यक्त की गई।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के विरोध के बाद अदालत ने याचिकाकर्ता का आवेदन खारिज कर सुझाव दाखिल करने का निर्देश दिया।
याचिकाकर्ता पक्ष ऑडिट में शामिल MCD अधिकारियों की व्यक्तिगत जवाबदेही तय करने की माँग करेगा।

दिल्ली के सत्य निकेतन में अवैध निर्माण और अवैध अतिक्रमण से जुड़ी याचिका पर 25 सितंबर 2026 को हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने एमसीडी (दिल्ली नगर निगम) सहित सभी प्रतिवादियों को जवाब दाखिल करने के लिए 10 दिन का समय प्रदान किया। मामले के वकील ऋषभ सिंह ने एमसीडी के हलफनामे पर गंभीर आपत्ति जताते हुए सवाल उठाया कि बिना उचित नोटिस जारी किए भवनों का प्रमाणीकरण (सर्टिफिकेशन) किस आधार पर किया जा रहा है।

मुख्य घटनाक्रम

वकील ऋषभ सिंह ने बताया कि एमसीडी ने अपने हलफनामे में दावा किया है कि उसने सत्य निकेतन क्षेत्र के सभी पीजी (पेइंग गेस्ट) आवासों का ऑडिट कर लिया है। हालाँकि, हलफनामे को ध्यान से पढ़ने पर सामने आता है कि कुछ इमारतों के मालिकों को दिल्ली टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी (DTU) और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) के विशेषज्ञों के पास भेजा गया था, परंतु इसके साथ कोई औपचारिक नोटिस संलग्न नहीं किया गया।

ऋषभ सिंह ने कहा, 'वे कौन से विशेषज्ञ हैं जो इन इमारतों को प्रमाणित करने वाले हैं? और एमसीडी का सबसे पहला कर्तव्य इन सभी चीज़ों को देखना है।' उन्होंने यह भी बताया कि एमसीडी ने पीजी मालिकों से रूपांतरण (कनवर्जन) शुल्क तो वसूला, लेकिन यह सुनिश्चित नहीं किया कि वे तय निर्माण मानकों और शर्तों का पालन कर रहे हैं या नहीं।

मुखर्जी नगर का मुद्दा

वकील ऋषभ सिंह ने एमसीडी के हलफनामे में शामिल भवन-ध्वस्त होने की तस्वीरों पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि हलफनामे में मुखर्जी नगर क्षेत्र से केवल एक तस्वीर लगाई गई है, जबकि वे स्वयं वहाँ जाकर देख चुके हैं कि इस भीड़भाड़ वाले इलाके में छात्र किस तरह की परिस्थितियों में रह रहे हैं।

उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्षेत्र में अन्य संदिग्ध इमारतों पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं की गई। उनके अनुसार, ऑडिट और प्रमाणीकरण प्रक्रिया में शामिल अधिकारियों की जवाबदेही तय होनी चाहिए।

सरकारी पक्ष और अदालत का रुख

सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने शुरुआत में इस आवेदन का विरोध किया, लेकिन अंततः अदालत ने वह आवेदन खारिज कर दिया और याचिकाकर्ता पक्ष को सुझाव दाखिल करने का निर्देश दिया। वकील ऋषभ सिंह के अनुसार, वे विशेष रूप से एमसीडी अधिकारियों के हलफनामे का विस्तृत जवाब दाखिल करेंगे और संभावित सुधारात्मक उपाय भी सुझाएंगे।

छात्रों की सुरक्षा और मौलिक अधिकार

दिल्ली विश्वविद्यालय ने भी इस मामले में अपना हलफनामा दायर किया है, जिसमें उपलब्ध छात्रावास क्षमता का उल्लेख किया गया है। वकील ऋषभ सिंह ने इस पर कहा कि बड़ी संख्या में छात्र देशभर से दिल्ली में पढ़ने आते हैं और खस्ताहाल व अत्यधिक भीड़भाड़ वाले पीजी मकानों में रहने को मजबूर हैं, जिससे उनकी जान खतरे में है।

उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय के उस सिद्धांत का हवाला दिया जिसके अनुसार सुरक्षित भौतिक वातावरण में रहना प्रत्येक नागरिक का मौलिक अधिकार है। गौरतलब है कि यह मामला ऐसे समय में उठाया गया है जब दिल्ली में पीजी और किराये के मकानों की बढ़ती माँग और अनियंत्रित निर्माण के बीच छात्र सुरक्षा लगातार चर्चा का विषय बनी हुई है।

आगे क्या होगा

अदालत द्वारा दिए गए 10 दिन के भीतर याचिकाकर्ता पक्ष अपना विस्तृत जवाब और सुधार सुझाव प्रस्तुत करेगा। इसके साथ ही एमसीडी अधिकारियों की व्यक्तिगत जवाबदेही, ऑडिट प्रक्रिया में पारदर्शिता और भवन प्रमाणीकरण के लिए स्वतंत्र विशेषज्ञ पैनल की नियुक्ति जैसे मुद्दे अगली सुनवाई में केंद्र में रहेंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन अनुपालन जाँच की ज़िम्मेदारी किसी की नहीं। बिना नोटिस के विशेषज्ञ सर्टिफिकेशन करवाना प्रक्रियात्मक खामी नहीं, बल्कि जवाबदेही से बचने का तंत्र है। सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि मुखर्जी नगर जैसे इलाकों में हज़ारों छात्र जिन हालातों में रह रहे हैं, वह पहले से दर्ज है — फिर भी कार्रवाई प्रतीकात्मक ही रही है। अगर इस मामले में ऑडिट अधिकारियों की व्यक्तिगत जवाबदेही तय नहीं हुई, तो अगली बार फिर वही एकाकी तस्वीर हलफनामे में लगेगी और स्थिति जस की तस रहेगी।
RashtraPress
26 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सत्य निकेतन अवैध निर्माण मामला क्या है?
दिल्ली के सत्य निकेतन क्षेत्र में अवैध निर्माण और अतिक्रमण के खिलाफ एक याचिका दायर की गई है, जिसमें पीजी आवासों की संरचनात्मक सुरक्षा और एमसीडी की ऑडिट प्रक्रिया को चुनौती दी गई है। मामला अदालत में विचाराधीन है और 25 सितंबर 2026 को हुई सुनवाई में कोर्ट ने प्रतिवादियों को 10 दिन का समय दिया।
वकील ऋषभ सिंह ने MCD के हलफनामे पर क्या आपत्तियाँ उठाई हैं?
वकील ऋषभ सिंह का कहना है कि MCD ने DTU और IIT के विशेषज्ञों से भवनों का ऑडिट कराया, लेकिन संबंधित मालिकों को कोई औपचारिक नोटिस नहीं दिया। उन्होंने यह भी कहा कि MCD ने कनवर्जन शुल्क लेने के बाद निर्माण मानकों का अनुपालन सुनिश्चित नहीं किया।
इस मामले में दिल्ली विश्वविद्यालय की क्या भूमिका है?
दिल्ली विश्वविद्यालय ने इस मामले में अपना हलफनामा दाखिल किया है, जिसमें उपलब्ध छात्रावास क्षमता का उल्लेख है। हालाँकि, याचिकाकर्ता पक्ष का तर्क है कि देशभर से बड़ी संख्या में आने वाले छात्र असुरक्षित और भीड़भाड़ वाले पीजी मकानों में रहने को मजबूर हैं।
अदालत ने इस सुनवाई में क्या निर्देश दिए?
अदालत ने एमसीडी और अन्य प्रतिवादियों को जवाब दाखिल करने के लिए 10 दिन का समय दिया है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के विरोध के बाद याचिकाकर्ता का एक आवेदन खारिज कर दिया गया और पक्षकारों को अपने सुझाव दाखिल करने का निर्देश दिया गया।
इस मामले में आगे क्या होने की उम्मीद है?
याचिकाकर्ता पक्ष अगले 10 दिनों में एमसीडी के हलफनामे का विस्तृत जवाब और सुधार सुझाव दाखिल करेगा। मुख्य माँग यह होगी कि ऑडिट प्रक्रिया में शामिल अधिकारियों की व्यक्तिगत जवाबदेही तय की जाए और स्वतंत्र विशेषज्ञ पैनल के ज़रिये पारदर्शी सर्टिफिकेशन सुनिश्चित किया जाए।
राष्ट्र प्रेस
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