6 अगस्त 2026
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दिल्ली हाईकोर्ट का करोलबाग में नकली लग्जरी ब्रांड बेचने वाले वेंडरों पर कार्रवाई का आदेश

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दिल्ली हाईकोर्ट का करोलबाग में नकली लग्जरी ब्रांड बेचने वाले वेंडरों पर कार्रवाई का आदेश

सारांश

दिल्ली हाईकोर्ट ने करोलबाग में नकली लग्जरी ब्रांड बेचने वाले वेंडरों पर पुलिस कार्रवाई का आदेश दिया — और साथ ही यह भी साफ किया कि अजमल खान रोड का 'नो-वेंडिंग' ज़ोन कागज़ से ज़मीन पर उतरना ज़रूरी है।

मुख्य बातें

दिल्ली हाईकोर्ट ने 6 अगस्त 2026 को करोलबाग में नकली लग्जरी ब्रांड बेचने वाले वेंडरों पर कार्रवाई का दिल्ली पुलिस को आदेश दिया।
सिंह और जस्टिस विकास महाजन की डिवीजन बेंच ने 24 स्ट्रीट वेंडरों की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश जारी किया।
लुई विटन, एचएंडएम, ज़ारा, एलन सॉली, प्यूमा और केल्विन क्लाइन के कथित नकली उत्पाद बेचना सीओवी की शर्त संख्या 10 का उल्लंघन माना गया।
करोलबाग पुलिस स्टेशन से करोलबाग मेट्रो स्टेशन तक अजमल खान रोड को 'नो-वेंडिंग' और 'नो-स्क्वैटिंग' ज़ोन घोषित; किसी भी याचिकाकर्ता को यहाँ बैठने या बेचने की अनुमति नहीं।
सभी 24 याचिकाकर्ताओं को केवल मोबाइल वेंडर के रूप में प्रोविज़नल सीओवी जारी थे; कोई निश्चित स्थल आवंटित नहीं था।
अदालत ने टाउन वेंडिंग कमेटी-II को नो-वेंडिंग ज़ोन में साइनबोर्ड लगाने का निर्देश दिया।

दिल्ली हाईकोर्ट ने 6 अगस्त 2026 को दिल्ली पुलिस को निर्देश दिया कि वह करोलबाग क्षेत्र में लुई विटन, एचएंडएम, ज़ारा, एलन सॉली, प्यूमा और केल्विन क्लाइन जैसे प्रतिष्ठित ब्रांडों के कथित नकली उत्पाद बेचने वाले स्ट्रीट वेंडरों के विरुद्ध कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई करे। यह आदेश जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस विकास महाजन की डिवीजन बेंच ने 24 स्ट्रीट वेंडरों की याचिका पर सुनवाई के दौरान जारी किया।

मामले की पृष्ठभूमि

इन 24 वेंडरों के पास प्रोविज़नल 'सर्टिफिकेट ऑफ वेंडिंग' (सीओवी) थे और उन्होंने दिल्ली नगर निगम (MCD) द्वारा कथित तौर पर परेशान किए जाने के विरुद्ध सुरक्षा की माँग करते हुए अदालत का दरवाज़ा खटखटाया था। सुनवाई के दौरान एमसीडी ने रिकॉर्ड पर ऐसी तस्वीरें प्रस्तुत कीं जिनसे स्पष्ट हुआ कि कई याचिकाकर्ता अजमल खान रोड के उस हिस्से में सामान बेच रहे थे, जिसे पहले ही 'नो-वेंडिंग' और 'नो-हॉकिंग' ज़ोन घोषित किया जा चुका है।

तस्वीरों में यह भी दिखा कि कुछ वेंडर उक्त प्रतिष्ठित ब्रांडों के नाम वाले कपड़े और अन्य सामान बेच रहे थे, जो बौद्धिक संपदा उल्लंघन की आशंका उत्पन्न करता है।

अदालत की टिप्पणी और निर्देश

बेंच ने स्पष्ट किया, 'अगर याचिकाकर्ताओं द्वारा बेचे गए उत्पाद नकली या 'पास-ऑफ' उत्पाद हैं, तो सीओवी की मानक शर्त संख्या 10 के तहत यह एक गैरकानूनी और अवैध गतिविधि होगी। यह मुद्दा अभी सीधे इस न्यायालय के समक्ष नहीं है, परंतु न्यायालय इसे नज़रअंदाज़ भी नहीं कर सकता।'

अदालत ने करोल बाग पुलिस स्टेशन के स्टेशन हाउस ऑफिसर (एसएचओ) को निर्देश दिया कि वे याचिकाकर्ताओं सहित उस क्षेत्र के उन सभी वेंडरों के विरुद्ध कार्रवाई करें जो जाने-माने ब्रांडों के नकली उत्पाद बेचते पाए जाएँ।

नो-वेंडिंग ज़ोन और एमसीडी का पक्ष

बेंच ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी याचिकाकर्ता को करोलबाग पुलिस स्टेशन से करोलबाग मेट्रो स्टेशन के बीच अजमल खान रोड के उस हिस्से पर बैठने या सामान बेचने की अनुमति नहीं दी जा सकती, जिसे पूर्णतः 'नो-वेंडिंग' और 'नो-स्क्वैटिंग' ज़ोन घोषित किया जा चुका है।

एमसीडी ने अदालत को बताया कि सभी 24 याचिकाकर्ताओं को केवल मोबाइल वेंडर के रूप में प्रोविज़नल सीओवी जारी किए गए थे और उन्हें कोई निश्चित 'तेहबाज़ारी' स्थल आवंटित नहीं किया गया था। एमसीडी ने यह भी स्पष्ट किया कि मोबाइल वेंडरों को अपने वेंडिंग प्रमाण-पत्र की शर्तों का कड़ाई से पालन करना अनिवार्य है।

साइनबोर्ड और जागरूकता पर अदालत की चिंता

बेंच ने यह भी रेखांकित किया कि उचित साइनबोर्ड न होने के कारण मोबाइल वेंडर अक्सर उन क्षेत्रों की जानकारी नहीं रख पाते जहाँ वेंडिंग प्रतिबंधित है। अदालत ने कहा कि जब तक ज़मीन पर साइनबोर्ड नहीं लगाए जाते, तब तक ऐसे ज़ोन केवल कागज़ पर ही 'नो-वेंडिंग' ज़ोन बने रहते हैं। हालाँकि, एमसीडी ने बताया कि अजमल खान रोड पर उचित साइनबोर्ड पहले ही लगाए जा चुके हैं।

गौरतलब है कि अदालत ने टाउन वेंडिंग कमेटी-II के गठन के बाद उसे नो-वेंडिंग और नो-स्क्वैटिंग क्षेत्रों की पहचान करने वाले बोर्ड लगाने का निर्देश दिया।

आगे क्या होगा

याचिकाकर्ताओं को अपने सीओवी की शर्तों और हाईकोर्ट के अतिरिक्त निर्देशों का पालन करने की शर्त पर प्रतिबंधित क्षेत्रों के बाहर मोबाइल वेंडिंग जारी रखने की अनुमति दी गई है। यदि कोई याचिकाकर्ता प्रतिबंधित क्षेत्र में वेंडिंग करते पाया गया, तो एमसीडी और संबंधित एसएचओ उन्हें वहाँ से हटाने के लिए बाध्य होंगे, ताकि पैदल यात्रियों को कोई बाधा न हो और करोलबाग मेट्रो स्टेशन तक निर्बाध पहुँच सुनिश्चित हो सके।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह एक बड़े और पुराने तनाव को उजागर करता है — शहरी गरीबों की आजीविका और बौद्धिक संपदा कानून के बीच की खाई। करोलबाग जैसे बाज़ारों में नकली ब्रांड दशकों से बिकते आए हैं, और पुलिस व MCD की निष्क्रियता इस पारिस्थितिकी तंत्र को पोषित करती रही है। असली सवाल यह है कि क्या यह आदेश केवल याचिकाकर्ताओं तक सीमित रहेगा या करोलबाग के व्यापक नकली माल के नेटवर्क पर भी लागू होगा — जिसमें बड़े दुकानदार भी शामिल हैं। बिना व्यापक प्रवर्तन के, यह कार्रवाई छोटे वेंडरों को दंडित करेगी जबकि असली आपूर्ति श्रृंखला अछूती रहेगी।
RashtraPress
6 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिल्ली हाईकोर्ट ने करोलबाग वेंडरों के खिलाफ क्या आदेश दिया?
दिल्ली हाईकोर्ट ने करोल बाग पुलिस स्टेशन के एसएचओ को निर्देश दिया कि वे उन वेंडरों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई करें जो लुई विटन, ज़ारा, प्यूमा जैसे ब्रांडों के कथित नकली उत्पाद बेचते पाए जाएँ। यह आदेश 24 स्ट्रीट वेंडरों की याचिका पर सुनवाई के दौरान जारी किया गया।
करोलबाग में 'नो-वेंडिंग ज़ोन' कहाँ है और क्यों मायने रखता है?
करोलबाग पुलिस स्टेशन से करोलबाग मेट्रो स्टेशन तक अजमल खान रोड का पूरा हिस्सा 'नो-वेंडिंग' और 'नो-स्क्वैटिंग' ज़ोन घोषित है। अदालत ने पाया कि कई याचिकाकर्ता मोबाइल वेंडर होने के बावजूद इसी प्रतिबंधित क्षेत्र में स्थायी रूप से बैठकर सामान बेच रहे थे।
क्या इन वेंडरों के पास वैध वेंडिंग सर्टिफिकेट थे?
हाँ, सभी 24 याचिकाकर्ताओं के पास MCD द्वारा जारी प्रोविज़नल 'सर्टिफिकेट ऑफ वेंडिंग' (सीओवी) थे, लेकिन ये केवल मोबाइल वेंडिंग के लिए थे। उन्हें कोई निश्चित स्थल आवंटित नहीं किया गया था और उन्हें प्रतिबंधित क्षेत्रों से बाहर चलते-फिरते काम करना अनिवार्य था।
नकली ब्रांड बेचना वेंडिंग सर्टिफिकेट का उल्लंघन कैसे है?
अदालत ने स्पष्ट किया कि सीओवी की मानक शर्त संख्या 10 के तहत नकली या 'पास-ऑफ' उत्पाद बेचना एक गैरकानूनी और अवैध गतिविधि है। इस शर्त के उल्लंघन पर वेंडिंग प्रमाण-पत्र रद्द होने के साथ-साथ आपराधिक कार्रवाई भी हो सकती है।
अदालत ने साइनबोर्ड के बारे में क्या कहा?
अदालत ने चिंता जताई कि उचित साइनबोर्ड न होने से वेंडर अक्सर प्रतिबंधित क्षेत्रों की जानकारी से अनजान रहते हैं। टाउन वेंडिंग कमेटी-II को गठन के बाद नो-वेंडिंग और नो-स्क्वैटिंग ज़ोन में स्पष्ट बोर्ड लगाने का निर्देश दिया गया, हालाँकि MCD ने बताया कि अजमल खान रोड पर साइनबोर्ड पहले ही लगाए जा चुके हैं।
राष्ट्र प्रेस
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