दिल्ली क्राइम ब्रांच ने करोल बाग में नकली ऑटो पार्ट्स रैकेट का भंडाफोड़ किया, दो सगे भाई गिरफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली क्राइम ब्रांच की वेस्टर्न रेंज-1 टीम ने 3 मई 2026 को करोल बाग के ऑटो मार्केट में छापेमारी कर नकली मोटरसाइकिल पार्ट्स के एक बड़े रैकेट का भंडाफोड़ किया। कार्रवाई में दो सगे भाइयों को गिरफ्तार किया गया और कुल 859 नकली पिस्टन असेंबली, 169 नकली क्लच प्लेट बॉक्स तथा 24 खाली बॉक्स बरामद किए गए।
छापेमारी का विवरण
इंस्पेक्टर प्रकाश चंद के नेतृत्व में एसआई अंशु कादियान, एसआई सुमित कुमार और एसआई अमित कुंडू समेत अन्य अधिकारियों की टीम ने यह कार्रवाई एसीपी राजकुमार के पर्यवेक्षण में की। छापा करोल बाग स्थित दो दुकानों पर मारा गया, जहाँ श्रीराम और उषा पिस्टन असेंबली जैसे प्रतिष्ठित ब्रांडों के नकली लेबल लगाकर माल बेचा जा रहा था।
गिरफ्तार आरोपी और बरामदगी
दुकान नंबर 3, नई वाला, करोल बाग से हर्षित गुप्ता (पुत्र स्वर्गीय संजय गुप्ता, निवासी संगम विहार) को गिरफ्तार किया गया। यहाँ से 473 नकली पिस्टन असेंबली, 24 खाली डिब्बे और 12 कैप बरामद हुए। वहीं दुकान नंबर 1509, त्रि मूर्ति ऑटो पार्ट्स से अभिषेक कुमार गुप्ता (पुत्र स्वर्गीय संजय गुप्ता) को हिरासत में लिया गया, जहाँ से 386 नकली पिस्टन असेंबली और 169 नकली क्लच प्लेट के डिब्बे जब्त किए गए।
पूछताछ में क्या सामने आया
पूछताछ के दौरान दोनों आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे सगे भाई हैं और पिछले तीन वर्षों से नकली पिस्टन व क्लच प्लेट्स बेच रहे थे। आरोपियों के अनुसार वे रोज़ाना 1,000 से 1,200 पिस्टन बेचते थे और असली ब्रांडों के नकली लेबल लगाकर माल को वैध दिखाते थे। उन्होंने यह भी बताया कि विभिन्न विक्रेताओं से माल खरीदकर हर महीने ₹2 से 3 लाख की कमाई की जाती थी। एम/एस श्रीराम/उषा पिस्टन असेंबली के अधिकृत प्रतिनिधि रतन पाल सिंह कुमार ने मौके पर पुष्टि की कि बरामद सभी सामान नकली हैं। आरोपियों के पास कोई वैध बिल या लाइसेंस नहीं मिला।
कानूनी कार्रवाई
क्राइम ब्रांच ने 4 मई 2026 को कॉपीराइट अधिनियम की धारा 63/65 तथा बीएनएस की धारा 318(4), 336(4), 3(5) के तहत मामला दर्ज किया है। अन्य सप्लायर्स और साथियों का पता लगाने के लिए जाँच जारी है।
आम जनता और वाहन चालकों पर असर
नकली ऑटो पार्ट्स का उपयोग वाहनों के इंजन को गंभीर नुकसान पहुँचाता है, जिससे सड़क दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा मूल ब्रांड कंपनियों को भारी आर्थिक हानि होती है और उपभोक्ताओं की सुरक्षा सीधे खतरे में पड़ती है। यह ऐसे समय में आया है जब दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच नकली सामान और आर्थिक अपराधों के विरुद्ध अपना अभियान तेज़ किए हुए है।