दिल्ली हाईकोर्ट ने रेसकोर्स क्लब की 150 एकड़ जमीन खाली कराने पर रोक हटाई, केंद्र को बड़ी राहत
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली हाईकोर्ट की खंडपीठ ने 26 मई 2025 को दिल्ली रेसकोर्स क्लब की लगभग 150 एकड़ भूमि की बेदखली प्रक्रिया पर लगी अंतरिम रोक को हटा दिया, जिससे केंद्र सरकार को इस विवादित ज़मीन को खाली कराने का कानूनी रास्ता मिल गया है। चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस कारिया की दो सदस्यीय पीठ ने सिंगल जज के पुराने आदेश को रद्द करते हुए केंद्र के पक्ष में फैसला सुनाया।
मुख्य घटनाक्रम
लुटियंस दिल्ली के कमल अतातुर्क मार्ग पर स्थित यह भूमि प्रधानमंत्री आवास के निकट होने के कारण रणनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। केंद्र सरकार लंबे समय से इसे खाली कराने की कोशिश कर रही थी, लेकिन सिंगल जज द्वारा दी गई अंतरिम रोक के चलते बेदखली की कार्रवाई अटकी पड़ी थी। खंडपीठ के ताज़ा आदेश के बाद अब यह बाधा कानूनी रूप से दूर हो गई है।
सरकार का पक्ष
केंद्र सरकार का तर्क रहा है कि यह भूमि सरकारी संपत्ति है और इसे सार्वजनिक उपयोग के लिए वापस लिया जाना चाहिए। सरकार की ओर से यह भी कहा गया कि 150 एकड़ की यह ज़मीन राष्ट्रीय राजधानी के केंद्र में स्थित है और इसका भौगोलिक व प्रशासनिक महत्व असाधारण है। दूसरी ओर, रेसकोर्स क्लब पक्ष अपने दावों के साथ न्यायालय में लड़ाई लड़ रहा था।
हाईकोर्ट का फैसला और उसका महत्व
विशेषज्ञों के अनुसार, खंडपीठ का यह निर्णय केवल इस एक भूखंड तक सीमित नहीं है — यह उन तमाम मामलों में एक मिसाल बन सकता है जहाँ विवादित सरकारी भूमि पर निचली अदालतों की अंतरिम रोक लंबे समय से लागू है। गौरतलब है कि ऐसे मामलों में सिंगल जज के आदेश को खंडपीठ द्वारा पलटा जाना प्रशासनिक प्रक्रियाओं को गति देने के लिहाज़ से महत्वपूर्ण माना जाता है।
आगे की कार्रवाई
हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद केंद्र सरकार जल्द ही बेदखली की अगली कानूनी प्रक्रिया शुरू कर सकती है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्लब पक्ष इस आदेश को उच्चतम न्यायालय में चुनौती देता है या नहीं। इस निर्णय से राजधानी की अन्य विवादित सरकारी भूमियों से जुड़े मामलों पर भी दूरगामी प्रभाव पड़ सकता है।