दिल्ली जिमखाना क्लब बेदखली: कांग्रेस के सवालों पर भाजपा का पलटवार, 5 जून को सरकार लेगी कब्जा
सारांश
मुख्य बातें
केंद्र सरकार ने 22 मई 2025 को दिल्ली जिमखाना क्लब को बेदखली नोटिस जारी कर 27.3 एकड़ जमीन 5 जून तक वापस लेने की प्रक्रिया शुरू की है। इस फैसले के बाद लुटियंस दिल्ली के इस ऐतिहासिक क्लब को लेकर कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच तीखी सियासी जंग छिड़ गई है। सरकार ने कहा है कि यह भूमि सार्वजनिक सुरक्षा और रक्षा ढाँचे को मज़बूत करने के लिए वापस ली जा रही है।
बेदखली नोटिस की पृष्ठभूमि
केंद्रीय आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय ने 22 मई को क्लब प्रबंधन को आधिकारिक नोटिस भेजा, जिसमें 5 जून को परिसर का कब्जा केंद्र सरकार के हाथ में आने की बात कही गई। 2, सफदरजंग रोड स्थित यह जमीन 1918 में क्लब को स्थायी लीज पर दी गई थी। नोटिस में लीज की धारा 4 का हवाला दिया गया, जो सरकार को सार्वजनिक उद्देश्य के लिए जमीन वापस लेने का अधिकार देती है। इस भूमि को अब राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के अधिकार क्षेत्र में लाने की प्रक्रिया शुरू की गई है।
कांग्रेस के सवाल
कांग्रेस नेता सुरेंद्र राजपूत ने आरोप लगाया कि यह जमीन प्रधानमंत्री के आधिकारिक आवास 7, लोक कल्याण मार्ग के विस्तार के लिए ली जा रही है। उन्होंने सार्वजनिक रूप से सवाल उठाया कि प्रधानमंत्री को रहने के लिए आखिर कितनी जमीन चाहिए। कांग्रेस ने इस कदम को सार्वजनिक हित के नाम पर सत्ता के विस्तार की कोशिश बताया।
भाजपा का पलटवार
भाजपा आईटी विभाग के प्रमुख अमित मालवीय ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर सुरेंद्र राजपूत का वीडियो साझा करते हुए कांग्रेस पर पलटवार किया। मालवीय ने कहा कि कांग्रेस नेता सोनिया गांधी का 10 जनपथ स्थित आवास 15,181 वर्ग मीटर में फैला है, जबकि 7 लोक कल्याण मार्ग का क्षेत्रफल 14,101 वर्ग मीटर है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, 'लगता है सोनिया गांधी ने सुरेंद्र राजपूत को नोट भेजा है।' भाजपा ने कांग्रेस पर दोहरे मापदंड और विशेषाधिकार की राजनीति करने का आरोप लगाया।
क्लब का ऐतिहासिक महत्व
ब्रिटिश काल में स्थापित दिल्ली जिमखाना क्लब लुटियंस दिल्ली के वीवीआईपी इलाके में प्रधानमंत्री आवास के बेहद करीब स्थित है। यह क्लब दशकों से सत्ता के गलियारों से जुड़े प्रभावशाली लोगों की पसंदीदा जगह रही है। गौरतलब है कि इसी क्षेत्र में इंडियन पोलो एसोसिएशन को भी जमीन खाली करने का नोटिस भेजा गया है, जहाँ भी सरकार ने सुरक्षा और रक्षा से जुड़े सार्वजनिक उद्देश्यों का हवाला दिया है।
क्लब प्रबंधन और आगे की राह
क्लब प्रबंधन ने मंत्रालय से तत्काल बैठक की माँग की है ताकि सदस्यों और कर्मचारियों के हितों पर स्थिति स्पष्ट हो सके। साथ ही, क्लब प्रशासन इस फैसले को न्यायालय में चुनौती देने पर भी विचार कर रहा है। 5 जून की समयसीमा नज़दीक आने के साथ यह मामला कानूनी और राजनीतिक दोनों मोर्चों पर और तीखा होने की संभावना है।