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दिल्ली जिमखाना क्लब बेदखली नोटिस: सदस्य विजय खुराना ने हाईकोर्ट में दी चुनौती, 26 मई को सुनवाई

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दिल्ली जिमखाना क्लब बेदखली नोटिस: सदस्य विजय खुराना ने हाईकोर्ट में दी चुनौती, 26 मई को सुनवाई

सारांश

केंद्र सरकार ने 'सार्वजनिक सुरक्षा' का हवाला देकर दिल्ली जिमखाना क्लब के 27.3 एकड़ ऐतिहासिक परिसर को 5 जून तक खाली करने का नोटिस दिया है। क्लब सदस्य ने दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी है और 26 मई को सुनवाई तय हुई है।

मुख्य बातें

विजय खुराना ने दिल्ली उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर केंद्र सरकार के बेदखली आदेश को चुनौती दी।
केंद्रीय आवास मंत्रालय ने 22 मई को नोटिस जारी कर क्लब को 5 जून तक 27.3 एकड़ परिसर खाली करने का निर्देश दिया।
नोटिस में 'रक्षा ढाँचे को सुदृढ़ करने' और 'सार्वजनिक सुरक्षा' को आधार बनाया गया है।
वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी की माँग पर न्यायमूर्ति अवनीश झिंगन ने 26 मई को सुनवाई निर्धारित की।
1913 में स्थापित यह क्लब 5,600 स्थायी सदस्यों वाला देश का प्रतिष्ठित संस्थान है, जो PM आवास के निकट स्थित है।
इंडियन पोलो एसोसिएशन को भी इसी आधार पर बेदखली नोटिस जारी किया गया है।

दिल्ली जिमखाना क्लब के सदस्य विजय खुराना ने दिल्ली उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर केंद्र सरकार के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसके तहत 2, सफदरजंग रोड स्थित क्लब के 27.3 एकड़ परिसर को 'सार्वजनिक सुरक्षा' के आधार पर वापस लेने की तैयारी की जा रही है। न्यायालय ने इस मामले में 26 मई को सुनवाई करने पर सहमति दे दी है।

बेदखली नोटिस की पृष्ठभूमि

केंद्रीय आवास और शहरी कार्य मंत्रालय ने भूमि एवं विकास कार्यालय के माध्यम से क्लब प्रबंधन को बेदखली का नोटिस भेजा। उप भूमि एवं विकास अधिकारी सुचित गोयल द्वारा 22 मई को जारी इस नोटिस में क्लब को 5 जून तक परिसर खाली कर सरकार को सौंपने का निर्देश दिया गया है।

नोटिस में कहा गया है कि यह परिसर रक्षा ढाँचे को सुदृढ़ करने और अन्य आवश्यक सार्वजनिक सुरक्षा कार्यों के लिए 'बेहद महत्वपूर्ण' है। साथ ही, आसपास की अन्य सरकारी भूमियों को भी वापस लिए जाने का उल्लेख किया गया है।

पट्टा समझौते का हवाला

नोटिस में स्थायी पट्टा समझौते के खंड 4 का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि किसी सार्वजनिक उद्देश्य के लिए आवश्यकता पड़ने पर सरकार परिसर पर पुनः कब्ज़ा लेने की अधिकारी है। नोटिस के अनुसार, 'इन्हीं अधिकारों का प्रयोग करते हुए भारत के राष्ट्रपति ने भूमि एवं विकास कार्यालय के माध्यम से पट्टा समाप्त कर संपत्ति पर तत्काल पुनः कब्ज़ा लेने का आदेश दिया है।' इसके तहत पूरी भूमि, उस पर बनी इमारतें, ढाँचे, लॉन और समस्त सुविधाएँ राष्ट्रपति के अधिकार में आ जाएँगी।

हाईकोर्ट में सुनवाई की माँग

सोमवार को सर्वोच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने न्यायमूर्ति अवनीश झिंगन के समक्ष इस याचिका पर जल्द सुनवाई की माँग रखी। न्यायालय ने अनुरोध स्वीकार करते हुए 26 मई को सुनवाई निर्धारित की।

क्लब का ऐतिहासिक महत्व

औपनिवेशिक काल में 1913 में स्थापित दिल्ली जिमखाना क्लब देश के सबसे पुराने और प्रतिष्ठित सामाजिक संस्थानों में गिना जाता है। इसका वर्तमान परिसर 1930 के दशक में वास्तुकार रॉबर्ट टी. रसेल ने तैयार किया था, जिन्होंने कनॉट प्लेस और तत्कालीन कमांडर-इन-चीफ के आवास — जिसे बाद में तीन मूर्ति भवन कहा गया — का डिज़ाइन भी बनाया था।

क्लब में करीब 5,600 स्थायी सदस्य हैं और सदस्यता के लिए दशकों लंबी प्रतीक्षा सूची बताई जाती है। यह परिसर प्रधानमंत्री के आधिकारिक आवास 7, लोक कल्याण मार्ग के निकट स्थित है।

इंडियन पोलो एसोसिएशन को भी नोटिस

गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री आवास के सामने स्थित इंडियन पोलो एसोसिएशन को भी इसी आधार पर बेदखली नोटिस भेजा है। यह ऐसे समय में आया है जब लुटियंस दिल्ली में सुरक्षा ढाँचे के पुनर्गठन की व्यापक कवायद चल रही है। अब सभी की निगाहें 26 मई की सुनवाई पर टिकी हैं, जिसमें न्यायालय की प्रारंभिक टिप्पणियाँ इस विवाद की दिशा तय करेंगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि लुटियंस दिल्ली के भू-राजनीतिक पुनर्गठन का संकेत है। इंडियन पोलो एसोसिएशन को भी समानांतर नोटिस यह बताता है कि यह किसी एक संस्था पर नहीं, बल्कि पूरे इलाके पर केंद्रित कार्रवाई है। स्थायी पट्टे के खंड 4 का हवाला तकनीकी रूप से वैध हो सकता है, लेकिन जब तक 'रक्षा ढाँचे' की परिभाषा सार्वजनिक नहीं होती, तब तक यह तर्क न्यायिक जाँच की कसौटी पर परखा जाएगा। 26 मई की सुनवाई तय करेगी कि अदालत इस 'तात्कालिकता' को वैध मानती है या नहीं।
RashtraPress
10 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिल्ली जिमखाना क्लब को बेदखली नोटिस क्यों मिला?
केंद्रीय आवास और शहरी कार्य मंत्रालय ने 22 मई को भूमि एवं विकास कार्यालय के माध्यम से नोटिस जारी किया, जिसमें रक्षा ढाँचे को सुदृढ़ करने और सार्वजनिक सुरक्षा कार्यों को आधार बताया गया। नोटिस में स्थायी पट्टा समझौते के खंड 4 का हवाला देते हुए राष्ट्रपति के आदेश पर पट्टा समाप्त करने की बात कही गई है।
क्लब को परिसर कब तक खाली करना है?
नोटिस के अनुसार दिल्ली जिमखाना क्लब को 5 जून तक 27.3 एकड़ का पूरा परिसर — भूमि, इमारतें, ढाँचे, लॉन और सभी सुविधाएँ — सरकार को सौंपनी हैं।
हाईकोर्ट में याचिका किसने और क्यों दायर की?
क्लब के सदस्य विजय खुराना ने दिल्ली उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर केंद्र सरकार के इस आदेश को चुनौती दी है। वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने न्यायमूर्ति अवनीश झिंगन के समक्ष जल्द सुनवाई की माँग रखी, जिसे स्वीकार करते हुए 26 मई की तारीख निर्धारित की गई।
दिल्ली जिमखाना क्लब का इतिहास क्या है?
दिल्ली जिमखाना क्लब की स्थापना 1913 में औपनिवेशिक काल में हुई थी और यह देश के सबसे पुराने सामाजिक संस्थानों में से एक है। इसका वर्तमान परिसर 1930 के दशक में वास्तुकार रॉबर्ट टी. रसेल ने डिज़ाइन किया था; क्लब में करीब 5,600 स्थायी सदस्य हैं और सदस्यता के लिए दशकों लंबी प्रतीक्षा सूची है।
क्या किसी अन्य संस्था को भी ऐसा नोटिस मिला है?
हाँ, केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री आवास के सामने स्थित इंडियन पोलो एसोसिएशन को भी इसी आधार पर बेदखली नोटिस भेजा है, जिसमें रक्षा ढाँचे और सार्वजनिक सुरक्षा कार्यों की आवश्यकता का हवाला दिया गया है।
राष्ट्र प्रेस
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