दिल्ली जिमखाना क्लब विवाद: हाईकोर्ट में केंद्र ने कहा — कानूनी प्रक्रिया से होगा कब्जा, 5 जून की डेडलाइन पर स्पष्टीकरण
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली हाईकोर्ट में 27 मई 2025 को दिल्ली जिमखाना क्लब को खाली कराने के केंद्र सरकार के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर अहम सुनवाई हुई, जिसमें केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने स्पष्ट किया कि क्लब परिसर पर कब्जा केवल कानून में तय प्रक्रिया के अनुसार ही लिया जाएगा — पुलिस बल से जबरन बेदखली नहीं होगी। लुटियंस दिल्ली के सफदरजंग रोड पर स्थित 27.3 एकड़ के इस ऐतिहासिक परिसर को केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय ने 'सार्वजनिक सुरक्षा' के आधार पर अपने अधिकार में लेने का नोटिस भेजा है।
मुख्य घटनाक्रम
मंगलवार की सुनवाई में जिमखाना सदस्यों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने बहस की। उन्होंने कोर्ट को बताया कि सरकार ने 5 जून तक क्लब को स्वेच्छा से हैंडओवर करने का आदेश दिया है, जबकि यह मामला पहले से राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) के समक्ष विचाराधीन है।
सिंघवी ने यह भी आरोप लगाया कि क्लब की मूल 15 सदस्यीय कमेटी को सरकार ने अपने नामित सदस्यों से बदल दिया है। इसके अलावा, राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) ने भी पुरानी कमेटी को बदलने का आदेश दिया था।
केंद्र सरकार की दलील
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि क्लॉज़ 4 के तहत एक व्यवस्थित प्रक्रिया तय की गई है, जिसके अंतर्गत लीज की शर्तें निर्धारित की जा सकती हैं। उन्होंने कहा, 'हम बस जाकर इसे खाली नहीं कराएंगे।' मेहता ने यह भी स्पष्ट किया कि अधिग्रहण के प्रावधानों में मुआवज़े का उल्लेख है — चाहे वह नकद राशि हो या वैकल्पिक भूमि।
मेहता ने यह भी बताया कि केंद्र सरकार द्वारा गठित जिमखाना मैनेजिंग कमेटी ने स्वयं इस बेदखली आदेश का विरोध करते हुए सरकार को लिखा है। कोर्ट ने मेहता के इस बयान को रिकॉर्ड पर लेने की अनुमति माँगी।
सदस्यता और मुआवज़े पर स्पष्टीकरण
हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ताओं के वकील को स्पष्ट किया कि यदि जमीन सरकार के अधिकार में भी चली जाती है, तो क्लब सदस्यों की मेंबरशिप बनी रहेगी। मेहता ने पुष्टि की कि सदस्यों को वैकल्पिक भूमि का प्रस्ताव भी दिया जाएगा।
मामले की पृष्ठभूमि
1913 में स्थापित दिल्ली जिमखाना क्लब देश के सबसे पुराने और प्रतिष्ठित सामाजिक संस्थानों में से एक है। 1930 के दशक में वास्तुकार रॉबर्ट टी. रसेल द्वारा डिज़ाइन किया गया यह परिसर वरिष्ठ नौकरशाहों, राजनयिकों और सैन्य अधिकारियों का ऐतिहासिक केंद्र रहा है। क्लब में करीब 5,600 स्थायी सदस्य हैं और सदस्यता के लिए दशकों लंबी प्रतीक्षा सूची है।
यह परिसर प्रधानमंत्री के आधिकारिक आवास 7, लोक कल्याण मार्ग के निकट स्थित है। हाईकोर्ट ने उल्लेख किया कि इस मामले में पहले भी मुकदमेबाजी का इतिहास रहा है — लीज शर्तों के उल्लंघन पर कार्यवाही शुरू हुई थी, जो बाद में सुलझाई गई, और फिर गवर्निंग बॉडी द्वारा कुप्रबंधन के आरोप पर एनसीएलटी का दरवाजा खटखटाया गया।
हाईकोर्ट का आदेश और आगे की राह
हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को समन जारी करते हुए 8 सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। अब अगली सुनवाई में सरकार का विस्तृत जवाब और एनसीएलटी की कार्यवाही का समन्वय इस विवाद की दिशा तय करेगा।