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दिल्ली जिमखाना क्लब विवाद: हाईकोर्ट में केंद्र ने कहा — कानूनी प्रक्रिया से होगा कब्जा, 5 जून की डेडलाइन पर स्पष्टीकरण

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दिल्ली जिमखाना क्लब विवाद: हाईकोर्ट में केंद्र ने कहा — कानूनी प्रक्रिया से होगा कब्जा, 5 जून की डेडलाइन पर स्पष्टीकरण

सारांश

लुटियंस दिल्ली का 112 साल पुराना जिमखाना क्लब अब कानूनी दांव पर है। केंद्र ने हाईकोर्ट में कहा — जबरन नहीं, कानून से होगा कब्जा। लेकिन 27.3 एकड़ की ज़मीन, PM आवास की पड़ोसी, और 5,600 सदस्यों वाले इस क्लब का भविष्य अब अदालत के हाथ में है।

मुख्य बातें

दिल्ली हाईकोर्ट में दिल्ली जिमखाना क्लब की बेदखली को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई हुई।
केंद्र के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने स्पष्ट किया — पुलिस बल से नहीं, केवल कानूनी प्रक्रिया से होगा कब्जा।
5 जून की स्वैच्छिक हैंडओवर डेडलाइन के बाद भी बिना कानूनी प्रक्रिया के बेदखली नहीं होगी।
क्लब का 27.3 एकड़ परिसर सफदरजंग रोड पर स्थित है, जो PM आवास के निकट है; अधिग्रहण का आधार 'सार्वजनिक सुरक्षा' बताया गया है।
सदस्यों की मेंबरशिप बनी रहेगी ; वैकल्पिक भूमि का प्रस्ताव भी दिया जाएगा।
हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को 8 सप्ताह में जवाब दाखिल करने का आदेश दिया।

दिल्ली हाईकोर्ट में 27 मई 2025 को दिल्ली जिमखाना क्लब को खाली कराने के केंद्र सरकार के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर अहम सुनवाई हुई, जिसमें केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने स्पष्ट किया कि क्लब परिसर पर कब्जा केवल कानून में तय प्रक्रिया के अनुसार ही लिया जाएगा — पुलिस बल से जबरन बेदखली नहीं होगी। लुटियंस दिल्ली के सफदरजंग रोड पर स्थित 27.3 एकड़ के इस ऐतिहासिक परिसर को केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय ने 'सार्वजनिक सुरक्षा' के आधार पर अपने अधिकार में लेने का नोटिस भेजा है।

मुख्य घटनाक्रम

मंगलवार की सुनवाई में जिमखाना सदस्यों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने बहस की। उन्होंने कोर्ट को बताया कि सरकार ने 5 जून तक क्लब को स्वेच्छा से हैंडओवर करने का आदेश दिया है, जबकि यह मामला पहले से राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) के समक्ष विचाराधीन है।

सिंघवी ने यह भी आरोप लगाया कि क्लब की मूल 15 सदस्यीय कमेटी को सरकार ने अपने नामित सदस्यों से बदल दिया है। इसके अलावा, राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) ने भी पुरानी कमेटी को बदलने का आदेश दिया था।

केंद्र सरकार की दलील

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि क्लॉज़ 4 के तहत एक व्यवस्थित प्रक्रिया तय की गई है, जिसके अंतर्गत लीज की शर्तें निर्धारित की जा सकती हैं। उन्होंने कहा, 'हम बस जाकर इसे खाली नहीं कराएंगे।' मेहता ने यह भी स्पष्ट किया कि अधिग्रहण के प्रावधानों में मुआवज़े का उल्लेख है — चाहे वह नकद राशि हो या वैकल्पिक भूमि।

मेहता ने यह भी बताया कि केंद्र सरकार द्वारा गठित जिमखाना मैनेजिंग कमेटी ने स्वयं इस बेदखली आदेश का विरोध करते हुए सरकार को लिखा है। कोर्ट ने मेहता के इस बयान को रिकॉर्ड पर लेने की अनुमति माँगी।

सदस्यता और मुआवज़े पर स्पष्टीकरण

हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ताओं के वकील को स्पष्ट किया कि यदि जमीन सरकार के अधिकार में भी चली जाती है, तो क्लब सदस्यों की मेंबरशिप बनी रहेगी। मेहता ने पुष्टि की कि सदस्यों को वैकल्पिक भूमि का प्रस्ताव भी दिया जाएगा।

मामले की पृष्ठभूमि

1913 में स्थापित दिल्ली जिमखाना क्लब देश के सबसे पुराने और प्रतिष्ठित सामाजिक संस्थानों में से एक है। 1930 के दशक में वास्तुकार रॉबर्ट टी. रसेल द्वारा डिज़ाइन किया गया यह परिसर वरिष्ठ नौकरशाहों, राजनयिकों और सैन्य अधिकारियों का ऐतिहासिक केंद्र रहा है। क्लब में करीब 5,600 स्थायी सदस्य हैं और सदस्यता के लिए दशकों लंबी प्रतीक्षा सूची है।

यह परिसर प्रधानमंत्री के आधिकारिक आवास 7, लोक कल्याण मार्ग के निकट स्थित है। हाईकोर्ट ने उल्लेख किया कि इस मामले में पहले भी मुकदमेबाजी का इतिहास रहा है — लीज शर्तों के उल्लंघन पर कार्यवाही शुरू हुई थी, जो बाद में सुलझाई गई, और फिर गवर्निंग बॉडी द्वारा कुप्रबंधन के आरोप पर एनसीएलटी का दरवाजा खटखटाया गया।

हाईकोर्ट का आदेश और आगे की राह

हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को समन जारी करते हुए 8 सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। अब अगली सुनवाई में सरकार का विस्तृत जवाब और एनसीएलटी की कार्यवाही का समन्वय इस विवाद की दिशा तय करेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

और अब हाईकोर्ट तक — यह मुकदमेबाजी का लंबा सफर दिखाता है कि संस्थागत स्वायत्तता और सरकारी नियंत्रण के बीच की खींचतान कितनी गहरी है। कोर्ट में 'कानूनी प्रक्रिया' का आश्वासन राहत देता है, लेकिन असली परीक्षा यह है कि मुआवज़े और वैकल्पिक भूमि के वादे कितने ठोस साबित होते हैं।
RashtraPress
12 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिल्ली जिमखाना क्लब विवाद क्या है?
केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय ने लुटियंस दिल्ली के सफदरजंग रोड पर स्थित दिल्ली जिमखाना क्लब के 27.3 एकड़ परिसर को 'सार्वजनिक सुरक्षा' के आधार पर अपने अधिकार में लेने का नोटिस भेजा है। क्लब के पदाधिकारियों ने इस आदेश को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी है।
केंद्र सरकार ने हाईकोर्ट में क्या कहा?
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट में स्पष्ट किया कि क्लब पर कब्जा केवल कानून में तय प्रक्रिया के अनुसार होगा — पुलिस बल से जबरन बेदखली नहीं की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि अधिग्रहण के तहत मुआवज़ा — नकद या वैकल्पिक भूमि के रूप में — दिया जाएगा।
5 जून की डेडलाइन का क्या मतलब है?
सरकार ने क्लब प्रबंधन को 5 जून तक स्वेच्छा से परिसर हैंडओवर करने का आदेश दिया था। हालाँकि, हाईकोर्ट में केंद्र ने स्पष्ट किया कि यदि क्लब 5 जून को स्वेच्छा से खाली नहीं करता, तो भी बिना कानूनी बेदखली प्रक्रिया के कब्जा नहीं लिया जाएगा।
क्लब के सदस्यों की मेंबरशिप पर क्या असर पड़ेगा?
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि जमीन सरकार के अधिकार में चली भी जाती है, तो मौजूदा सदस्यों की मेंबरशिप बनी रहेगी। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने यह भी बताया कि सदस्यों को वैकल्पिक भूमि का प्रस्ताव दिया जाएगा।
दिल्ली जिमखाना क्लब का इतिहास क्या है?
1913 में स्थापित दिल्ली जिमखाना क्लब देश के सबसे पुराने सामाजिक संस्थानों में से एक है। 1930 के दशक में वास्तुकार रॉबर्ट टी. रसेल द्वारा डिज़ाइन किए गए इस परिसर में करीब 5,600 स्थायी सदस्य हैं और सदस्यता के लिए दशकों लंबी प्रतीक्षा सूची है।
राष्ट्र प्रेस
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