दिल्ली हाई कोर्ट का सवाल: पोलो क्लब और जिम खाना की ज़मीन क्यों चाहिए सरकार को?
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली हाई कोर्ट ने 8 जून 2026 को दिल्ली जिम खाना क्लब, इंडियन पोलो क्लब और दिल्ली रेस क्लब की ज़मीन वापस लेने के केंद्र सरकार के फैसले पर तीखे सवाल उठाए। न्यायमूर्ति नीना बंसल कृष्णा ने टिप्पणी की कि प्रदूषण से पहले ही दम घुट रही दिल्ली में लुटियंस ज़ोन का बचा-खुचा हरित क्षेत्र भी सरकार अपने कब्ज़े में लेना चाहती है।
मामले की पृष्ठभूमि
यह सुनवाई इंडियन पोलो एसोसिएशन की उस याचिका पर हुई जिसमें ज़मीन खाली करने के केंद्र सरकार के नोटिस को चुनौती दी गई थी। एसोसिएशन का तर्क है कि यह ज़मीन दशकों से क्लब के उपयोग में है और इसे अचानक खाली कराना उचित नहीं है।
न्यायालय की तीखी टिप्पणियाँ
न्यायमूर्ति कृष्णा ने कहा, 'सरकार को पोलो क्लब या जिम खाना की ज़मीन क्यों चाहिए? पिछले 200 वर्षों से सरकार को इन ज़मीनों की ज़रूरत नहीं पड़ी — अब ग्राउंड खाली कराकर सरकार क्या करना चाहती है, वही बेहतर जानती होगी।' उन्होंने आगे कहा कि दिल्ली में हर तरफ निर्माण और बहुमंजिला इमारतों से शहर की साँस घुट रही है।
न्यायालय ने यह भी कहा कि एनडीएमसी इलाकों में जो थोड़ी-बहुत राहत बची थी, वह भी अब समाप्त होती जा रही है। न्यायमूर्ति कृष्णा की टिप्पणी थी — 'अगर ऐसे ही ऊँची इमारतें बनती रहीं तो इस शहर का दम घुट जाएगा। 20 मंजिला इमारतें बनाना क्या जनहित में है?'
सरकार का पक्ष
केंद्र सरकार की ओर से पेश अधिवक्ता आशीष दीक्षित ने कहा कि यह ज़मीन जनकल्याण के लिए खाली कराई जा रही है। उनका तर्क था कि सरकार के पास ज़मीन सीमित है और देश की बढ़ती आबादी की ज़रूरतों के मद्देनज़र इन्हीं ज़मीनों का उपयोग करना होगा। उन्होंने यह भी कहा कि पोलो क्लब से केवल चुनिंदा 300 लोग ही लाभ उठा रहे हैं।
न्यायालय का आदेश और आगे की कार्यवाही
हाई कोर्ट ने अपनी तीखी टिप्पणियों के बावजूद इंडियन पोलो एसोसिएशन को कोई अंतरिम राहत नहीं दी। याचिका का निपटारा करते हुए न्यायालय ने पटियाला हाउस कोर्ट को निर्देश दिया कि वह एसोसिएशन की लंबित याचिका पर 10 जून को सुनवाई कर शीघ्र निर्णय ले।
यह मामला ऐसे समय में आया है जब दिल्ली में शहरी विकास बनाम पर्यावरण संरक्षण की बहस तेज़ होती जा रही है। लुटियंस दिल्ली के हरित क्षेत्र और ऐतिहासिक क्लबों की ज़मीन का भविष्य अब अदालत के फैसले पर निर्भर करेगा।