6 जुलाई 2026
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दिल्ली हाईकोर्ट ने जिमखाना क्लब खाली कराने के नोटिस पर केंद्र से 28 जुलाई तक माँगा जवाब

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दिल्ली हाईकोर्ट ने जिमखाना क्लब खाली कराने के नोटिस पर केंद्र से 28 जुलाई तक माँगा जवाब

सारांश

औपनिवेशिक काल में बना दिल्ली जिमखाना क्लब अब कानूनी लड़ाई के केंद्र में है। केंद्र सरकार के बेदखली नोटिस को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर दिल्ली हाईकोर्ट ने 28 जुलाई तक जवाब माँगा है — 5,600 सदस्यों और दर्जनों कर्मचारियों का भविष्य दाँव पर है।

मुख्य बातें

दिल्ली उच्च न्यायालय ने 6 जुलाई 2026 को केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर 28 जुलाई तक जवाब माँगा।
याचिकाएँ विजय खुराना (क्लब सदस्य) और स्टाफ वेलफेयर एसोसिएशन ने दाखिल की हैं।
केंद्र के भूमि एवं विकास कार्यालय ने सफदरजंग रोड परिसर खाली कराने के लिए 'कारण बताओ नोटिस' जारी किया था।
जस्टिस अवनीश झिंगन ने पहले अंतरिम राहत और केंद्र के संचार पर रोक लगाने से इनकार किया था।
एसजी तुषार मेहता ने आश्वासन दिया कि अगली सुनवाई तक कोई जबरदस्ती बेदखली नहीं होगी।
1913 में स्थापित जिमखाना क्लब के लगभग 5,600 स्थायी सदस्य हैं; इमारत रॉबर्ट टी.
रसेल ने 1930 के दशक में डिज़ाइन की थी।

दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार, 6 जुलाई 2026 को केंद्र सरकार को नोटिस जारी करते हुए जवाब माँगा — यह नोटिस दिल्ली जिमखाना क्लब के सदस्य विजय खुराना और क्लब के स्टाफ वेलफेयर एसोसिएशन द्वारा दाखिल उन याचिकाओं पर आया, जिनमें लुटियंस दिल्ली स्थित ऐतिहासिक परिसर से उन्हें बेदखल करने के लिए केंद्र द्वारा जारी 'कारण बताओ नोटिस' को चुनौती दी गई है। अदालत ने अगली सुनवाई 28 जुलाई के लिए निर्धारित की है।

मुख्य घटनाक्रम

जस्टिस अवनीश झिंगन की एकल पीठ के समक्ष हुई सुनवाई में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता केंद्र की ओर से वर्चुअल माध्यम से उपस्थित हुए और जवाब दाखिल करने के लिए समय माँगा, यह कहते हुए कि आवेदन उन्हें महज एक दिन पहले मिले थे। केंद्र की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा भी पेश हुए, जबकि याचिकाकर्ताओं का पक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी और जयंत मेहता ने रखा।

ये याचिकाएँ उन सिविल मुकदमों में दाखिल की गई हैं, जिनमें केंद्र के उस कदम को चुनौती दी गई है जिसके तहत भूमि एवं विकास कार्यालय (Land and Development Office) के एस्टेट अधिकारी ने सफदरजंग रोड स्थित परिसर पर काबिज लोगों को बेदखल करने की प्रक्रिया शुरू करते हुए 'कारण बताओ नोटिस' जारी किया था।

पूर्व की सुनवाई और अदालत का रुख

गौरतलब है कि इससे पहले दिल्ली उच्च न्यायालय ने क्लब परिसर का कब्जा वापस लेने के केंद्र के कदम के विरुद्ध अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया था। जस्टिस झिंगन ने सिविल मुकदमों में समन जारी करते हुए केंद्र के संचार पर रोक लगाने से भी मना कर दिया था।

उस सुनवाई में एसजी मेहता ने अदालत को आश्वस्त किया था कि किसी को भी जबरदस्ती नहीं हटाया जाएगा और कोई भी कार्रवाई कानून के अनुसार तथा पूर्व नोटिस देने के बाद ही की जाएगी। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया था कि उस समय रिकॉर्ड पर ऐसा कोई साक्ष्य नहीं था जिससे पता चले कि पब्लिक प्रेमिसेस एक्ट के तहत कार्यवाही शुरू हो चुकी है।

दिल्ली जिमखाना क्लब: ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

1913 में स्थापित दिल्ली जिमखाना क्लब भारत के सबसे पुराने और प्रतिष्ठित सामाजिक संस्थानों में से एक है, जिसके लगभग 5,600 स्थायी सदस्य हैं और एक लंबी प्रतीक्षा सूची है। मौजूदा इमारत 1930 के दशक के आरंभ में आर्किटेक्ट रॉबर्ट टी. रसेल ने डिज़ाइन की थी — वही वास्तुकार जिन्होंने कनॉट प्लेस और कमांडर-इन-चीफ के पुराने आवास का भी डिज़ाइन तैयार किया था। यह परिसर औपनिवेशिक काल की वास्तुकला और दिल्ली के सामाजिक इतिहास का एक अभिन्न हिस्सा माना जाता है।

आम जनता और सदस्यों पर असर

यह विवाद केवल एक क्लब की बेदखली तक सीमित नहीं है — इससे क्लब के 5,600 से अधिक सदस्यों और वहाँ कार्यरत कर्मचारियों की आजीविका सीधे प्रभावित होती है। स्टाफ वेलफेयर एसोसिएशन का अदालत में जाना यह दर्शाता है कि बेदखली की कार्रवाई से न केवल सदस्यता बल्कि रोज़गार भी खतरे में है।

क्या होगा आगे

अदालत ने केंद्र को 28 जुलाई तक अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। तब तक एसजी मेहता के आश्वासन के अनुसार कोई जबरदस्ती बेदखली नहीं होगी। यह मामला यह तय करेगा कि क्या केंद्र सरकार औपनिवेशिक काल के इस प्रतिष्ठित परिसर का कब्जा वापस ले सकती है और किन कानूनी शर्तों पर।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन 28 जुलाई की सुनवाई यह तय करेगी कि क्या प्रक्रियागत खामियाँ इस बेदखली को रोक सकती हैं।
RashtraPress
6 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिल्ली जिमखाना क्लब को बेदखली नोटिस क्यों दिया गया?
केंद्र सरकार के भूमि एवं विकास कार्यालय के एस्टेट अधिकारी ने सफदरजंग रोड स्थित औपनिवेशिक काल के क्लब परिसर का कब्जा वापस लेने की प्रक्रिया शुरू करते हुए 'कारण बताओ नोटिस' जारी किया। केंद्र का कहना है कि यह सरकारी भूमि है और उसे वापस लिया जाना चाहिए।
दिल्ली हाईकोर्ट ने इस मामले में अब तक क्या फैसला दिया है?
दिल्ली उच्च न्यायालय ने अब तक अंतरिम राहत और केंद्र के संचार पर रोक लगाने से इनकार किया है। 6 जुलाई 2026 को कोर्ट ने केंद्र को नोटिस जारी कर 28 जुलाई तक जवाब माँगा है और तब तक जबरदस्ती बेदखली न करने का आश्वासन लिया है।
याचिकाएँ किसने और किस आधार पर दाखिल की हैं?
याचिकाएँ क्लब सदस्य विजय खुराना और स्टाफ वेलफेयर एसोसिएशन ने दाखिल की हैं। उनका तर्क है कि केंद्र द्वारा जारी 'कारण बताओ नोटिस' कानूनी प्रक्रिया का उल्लंघन करता है और बेदखली की कार्रवाई उचित नहीं है।
दिल्ली जिमखाना क्लब का इतिहास क्या है?
दिल्ली जिमखाना क्लब की स्थापना 1913 में हुई थी और यह भारत के सबसे पुराने सामाजिक संस्थानों में से एक है। इसकी मौजूदा इमारत 1930 के दशक में आर्किटेक्ट रॉबर्ट टी. रसेल ने डिज़ाइन की थी और इसके लगभग 5,600 स्थायी सदस्य हैं।
इस मामले में आगे क्या होगा?
अदालत ने केंद्र को 28 जुलाई 2026 तक जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। उस सुनवाई में यह तय होगा कि क्या बेदखली की प्रक्रिया जारी रह सकती है या याचिकाकर्ताओं को कोई राहत मिलती है।
राष्ट्र प्रेस
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