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दिल्ली जिमखाना क्लब की 27.3 एकड़ जमीन 5 जून को सरकार लेगी वापस, रक्षा इंफ्रास्ट्रक्चर का हवाला

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दिल्ली जिमखाना क्लब की 27.3 एकड़ जमीन 5 जून को सरकार लेगी वापस, रक्षा इंफ्रास्ट्रक्चर का हवाला

सारांश

1913 में स्थापित दिल्ली जिमखाना क्लब का 113 साल का सफर 5 जून को थम सकता है। केंद्र सरकार ने लीज क्लॉज का हवाला देते हुए 27.3 एकड़ की संपत्ति वापस लेने का नोटिस जारी किया है — रक्षा इंफ्रास्ट्रक्चर और सार्वजनिक सुरक्षा को कारण बताया गया है।

मुख्य बातें

केंद्र सरकार ने 22 मई 2026 को दिल्ली जिमखाना क्लब को बेदखली नोटिस जारी किया।
2 सफदरजंग रोड पर स्थित 27.3 एकड़ की संपत्ति 5 जून 2026 को सरकारी कब्जे में जाएगी।
रक्षा इंफ्रास्ट्रक्चर मज़बूती और सार्वजनिक सुरक्षा को आधिकारिक कारण बताया गया है।
लीज डीड के क्लॉज 4 के तहत भारत के राष्ट्रपति ने लीज समाप्त कर पुनः प्रवेश का आदेश दिया।
क्लब की स्थापना जुलाई 1913 में हुई थी; स्थायी सदस्य संख्या लगभग 5,600 , प्रतीक्षा सूची 40 वर्षों तक लंबी।
आम नागरिक श्रेणी में सदस्यता के लिए ₹7 लाख से अधिक की आवेदन शुल्क देनी होती है।

केंद्र सरकार ने 22 मई 2026 को जारी एक आधिकारिक नोटिस के ज़रिए दिल्ली जिमखाना क्लब को सूचित किया कि 2 सफदरजंग रोड पर स्थित 27.3 एकड़ की उसकी पूरी संपत्ति 5 जून 2026 को सरकारी अधिकार में ले ली जाएगी। नोटिस में कहा गया है कि यह जमीन रक्षा इंफ्रास्ट्रक्चर को मज़बूत करने और सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़े ज़रूरी कार्यों के लिए अनिवार्य है।

नोटिस की मुख्य बातें

उप-भूमि एवं विकास अधिकारी सुचित गोयल द्वारा जारी इस नोटिस में क्लब की जनरल कमेटी और सेक्रेटरी को निर्देश दिया गया है कि वे 5 जून को भूमि एवं विकास कार्यालय के प्रतिनिधियों को संपत्ति का शांतिपूर्ण कब्जा सौंपें। नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि ऐसा न करने पर कानूनी प्रावधानों के तहत कब्जा ले लिया जाएगा।

केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय ने नोटिस में कहा कि यह जमीन ज़रूरी संस्थागत आवश्यकताओं, शासन के इंफ्रास्ट्रक्चर और जनहित परियोजनाओं के लिए आवश्यक है। यह कदम आसपास की अन्य सरकारी भूमियों को वापस लेने की व्यापक प्रक्रिया का हिस्सा बताया जा रहा है।

कानूनी आधार

नोटिस में लीज डीड के क्लॉज 4 का हवाला दिया गया है, जिसके अनुसार यदि लीज पर दी गई जमीन किसी सार्वजनिक उद्देश्य के लिए आवश्यक हो, तो लीज देने वाले को उस संपत्ति में पुनः प्रवेश का अधिकार प्राप्त है। इसी प्रावधान के तहत भारत के राष्ट्रपति ने भूमि एवं विकास कार्यालय के माध्यम से लीज को समाप्त करते हुए संपत्ति में तत्काल पुनः प्रवेश का आदेश दिया है।

नोटिस के अनुसार, जमीन का संपूर्ण भाग — उस पर खड़ी सभी इमारतें, ढाँचे, लॉन और फिटिंग्स सहित — राष्ट्रपति के अधिकार में आ जाएगा।

क्लब का ऐतिहासिक महत्व

दिल्ली जिमखाना क्लब की स्थापना जुलाई 1913 में हुई थी और यह भारत के सबसे पुराने व प्रतिष्ठित संभ्रांत सामाजिक संस्थानों में गिना जाता है। इसकी मुख्य इमारतें 1930 के दशक की शुरुआत में बनाई गई थीं और इनका डिज़ाइन प्रसिद्ध वास्तुकार रॉबर्ट टी. रसेल ने तैयार किया था — वही रसेल जिन्होंने कनॉट प्लेस और तीन मूर्ति भवन (तत्कालीन कमांडर-इन-चीफ निवास) जैसी इमारतें भी बनाई थीं।

यह क्लब 7 लोक कल्याण मार्ग स्थित प्रधानमंत्री आवास के निकट है और शीर्ष नौकरशाहों, राजनयिकों तथा सैन्य अधिकारियों के लिए प्रमुख मिलन स्थल रहा है। गौरतलब है कि इस क्लब में स्थायी सदस्यों की अधिकतम संख्या लगभग 5,600 तय है और प्रतिवर्ष केवल लगभग 100 नए स्थायी सदस्य ही शामिल किए जाते हैं।

सदस्यता की लंबी प्रतीक्षा

क्लब में सदस्यता के इच्छुक लोगों की प्रतीक्षा सूची इतनी लंबी है कि कुछ आवेदकों को 40 वर्षों से अधिक का इंतज़ार करना पड़ता है। सरकारी और रक्षा कर्मियों के लिए एक निर्धारित कोटा है, जबकि आम नागरिक श्रेणी के आवेदकों को प्रतीक्षा सूची में स्थान सुरक्षित करने के लिए ₹7 लाख से अधिक की आवेदन शुल्क जमा करनी होती है।

आगे क्या होगा

यह ऐसे समय में आया है जब लुटियंस दिल्ली के संवेदनशील क्षेत्र में सरकारी भूमि के पुनर्ग्रहण की प्रक्रिया तेज़ हो रही है। 5 जून 2026 के बाद संपत्ति पर सरकार का नियंत्रण होगा और रक्षा व सार्वजनिक उद्देश्यों के लिए इसके उपयोग की योजना बनाई जाएगी। क्लब प्रबंधन की ओर से अभी तक कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

सैन्य और कूटनीतिक अभिजात वर्ग का अनौपचारिक केंद्र रहा है। 'रक्षा इंफ्रास्ट्रक्चर' का हवाला देना एक व्यापक उद्देश्य का संकेत देता है, लेकिन सरकार ने अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया कि 27.3 एकड़ की इस संपत्ति का ठीक-ठीक उपयोग क्या होगा। आलोचकों का कहना है कि बिना पारदर्शी पुनर्उपयोग योजना के इस तरह के पुनर्ग्रहण से सार्वजनिक जवाबदेही के सवाल उठते हैं। यह देखना बाकी है कि क्या यह जमीन वास्तव में जनसाधारण के हित में लगाई जाएगी या यह एक और सरकारी संस्थागत उपयोग में बदल जाएगी।
RashtraPress
8 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिल्ली जिमखाना क्लब की जमीन सरकार क्यों वापस ले रही है?
केंद्र सरकार ने कहा है कि 2 सफदरजंग रोड पर स्थित 27.3 एकड़ की यह संपत्ति रक्षा इंफ्रास्ट्रक्चर को मज़बूत करने और सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़े ज़रूरी कार्यों के लिए अनिवार्य है। यह लुटियंस दिल्ली में आसपास की सरकारी भूमियों को वापस लेने की व्यापक प्रक्रिया का हिस्सा भी बताया जा रहा है।
दिल्ली जिमखाना क्लब को कब तक खाली करना होगा?
22 मई 2026 को जारी नोटिस के अनुसार क्लब को 5 जून 2026 को संपत्ति का शांतिपूर्ण कब्जा सरकारी प्रतिनिधियों को सौंपना होगा। ऐसा न करने पर कानूनी प्रावधानों के तहत कब्जा लिया जाएगा।
किस कानूनी आधार पर यह कार्रवाई की जा रही है?
लीज डीड के क्लॉज 4 के तहत यदि लीज पर दी गई जमीन सार्वजनिक उद्देश्य के लिए ज़रूरी हो तो लीज देने वाले को पुनः प्रवेश का अधिकार है। इसी प्रावधान का उपयोग करते हुए भारत के राष्ट्रपति ने भूमि एवं विकास कार्यालय के माध्यम से लीज रद्द कर दी है।
दिल्ली जिमखाना क्लब का इतिहास क्या है?
दिल्ली जिमखाना क्लब की स्थापना जुलाई 1913 में हुई थी और इसकी मुख्य इमारतें 1930 के दशक में वास्तुकार रॉबर्ट टी. रसेल ने डिज़ाइन की थीं। यह क्लब शीर्ष नौकरशाहों, राजनयिकों और सैन्य अधिकारियों के लिए प्रमुख मिलन स्थल रहा है और भारत के सबसे प्रतिष्ठित संभ्रांत सामाजिक संस्थानों में गिना जाता है।
दिल्ली जिमखाना क्लब की सदस्यता कितनी मुश्किल है?
क्लब में स्थायी सदस्यों की अधिकतम संख्या लगभग 5,600 है और प्रतिवर्ष केवल लगभग 100 नए सदस्य शामिल होते हैं। आम नागरिक श्रेणी में सदस्यता के लिए ₹7 लाख से अधिक की आवेदन शुल्क देनी होती है और कुछ आवेदकों को 40 वर्षों से अधिक प्रतीक्षा करनी पड़ती है।
राष्ट्र प्रेस
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