दिल्ली जिमखाना क्लब खाली करने के आदेश पर तारिक अनवर बोले — सौ साल पुरानी विरासत बंद करना अनुचित
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस सांसद तारिक अनवर ने 25 मई 2025 को केंद्र सरकार के उस आदेश की कड़ी आलोचना की, जिसमें दिल्ली जिमखाना क्लब को 5 जून तक परिसर खाली करने का निर्देश दिया गया है। अनवर ने इस फैसले को 'जल्दबाजी में लिया गया' करार देते हुए कहा कि लगभग सौ साल पुरानी इस संस्था को महज सुरक्षा के नाम पर बंद करना उचित नहीं है।
क्लब की ऐतिहासिक और सामाजिक अहमियत
तारिक अनवर ने कहा कि दिल्ली जिमखाना क्लब केवल एक सामाजिक संस्था नहीं, बल्कि देश की प्रशासनिक और सामाजिक विरासत का अभिन्न हिस्सा है। उन्होंने बताया कि यहाँ बड़ी संख्या में सेवानिवृत्त अधिकारी, कर्मचारी और समाज के विभिन्न वर्गों के लोग आते हैं, और यह उनके लिए संवाद तथा सामाजिक गतिविधियों का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब कई ऐतिहासिक संस्थाओं के भविष्य पर पहले से ही सवाल उठ रहे हैं।
सरकार के फैसले पर सवाल
अनवर ने पूछा कि अचानक नोटिस जारी कर क्लब को खाली कराने का निर्णय क्यों लिया गया और क्या इसे वास्तव में सुरक्षा कारणों से उचित ठहराया जा सकता है। उनके अनुसार, 'सिर्फ सुरक्षा के नाम पर इतने पुराने संस्थान को बंद करना सही नहीं है।' उन्होंने माँग की कि सरकार को इस मुद्दे पर सभी पक्षों से बातचीत करनी चाहिए थी और कोई संतुलित समाधान निकालना चाहिए था।
कर्नाटक सत्ता संघर्ष पर प्रतिक्रिया
कर्नाटक में जारी सत्ता संघर्ष पर भी तारिक अनवर ने अपनी राय रखी। मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री को कांग्रेस हाईकमान द्वारा तलब किए जाने पर उन्होंने कहा कि अब फैसला पार्टी नेतृत्व को ही करना है। उनके अनुसार, 'इस मामले को लंबे समय तक टाला नहीं जा सकता और हाईकमान को जल्द कोई स्पष्ट निर्णय लेना होगा।'
यूसीसी और महंगाई पर रुख
असम विधानसभा में यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) विधेयक पेश किए जाने पर अनवर ने कहा कि यदि कोई कानून लोगों की सुरक्षा और हित में हो, तो उस पर आपत्ति का सवाल नहीं उठता — लेकिन किसी भी कानून को लागू करने से पहले व्यापक चर्चा और सहमति ज़रूरी है।
बढ़ती महंगाई पर कांग्रेस सांसद ने केंद्र सरकार पर सीधा निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि डीजल, पेट्रोल, गैस और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में लगातार वृद्धि से आम जनता पर भारी बोझ पड़ रहा है। अनवर का यह भी कहना था कि चुनावों के दौरान सरकार ने जानबूझकर कीमतें नियंत्रित रखीं ताकि चुनाव परिणाम प्रभावित न हों, और अब हालात बेकाबू होते जा रहे हैं। विपक्ष के अनुसार, इस संभावित संकट को लेकर सरकार को पहले ही आगाह किया जा चुका था।
आगे क्या
5 जून की समयसीमा नज़दीक आने के साथ यह देखना होगा कि क्लब प्रबंधन और सदस्य कानूनी या प्रशासनिक रास्ते अपनाते हैं या नहीं। राजनीतिक दबाव बढ़ने की स्थिति में सरकार कोई मध्यमार्ग निकाल सकती है, हालाँकि अभी तक ऐसे किसी संकेत की पुष्टि नहीं हुई है।