31 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

जयपुर पोलो ग्राउंड पर केंद्र का नोटिस: 15 एकड़ से अधिक भूमि सरकारी घोषित, IPA को राहत नहीं

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
जयपुर पोलो ग्राउंड पर केंद्र का नोटिस: 15 एकड़ से अधिक भूमि सरकारी घोषित, IPA को राहत नहीं

सारांश

केंद्र सरकार ने जयपुर पोलो ग्राउंड को सरकारी भूमि घोषित करते हुए नोटिस लगाया — तीन अदालतें IPA की राहत अर्जी ठुकरा चुकी हैं। दिल्ली जिमखाना क्लब के बाद यह दूसरा बड़ा मामला है, जो लुटियंस दिल्ली में लीज भूमि वापसी की व्यापक सरकारी रणनीति का संकेत देता है।

मुख्य बातें

आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय ने 13 जून को जयपुर पोलो ग्राउंड में नोटिस लगाकर 15 एकड़ से अधिक भूमि को सरकारी घोषित किया।
पटियाला हाउस कोर्ट के जज धीरेंद्र राणा ने 20 मई के बेदखली आदेश पर रोक लगाने से इनकार किया।
दिल्ली उच्च न्यायालय ने 8 जून को IPA की रिट याचिका निपटाते हुए कोई अंतरिम राहत नहीं दी।
केंद्र सरकार इस भूमि का उपयोग महत्वपूर्ण सरकारी और रक्षा-संबंधी कार्यक्रमों के लिए करना चाहती है।
पिछले महीने दिल्ली जिमखाना क्लब की 27.3 एकड़ संपत्ति को भी इसी तरह नोटिस मिला था और उसे भी अदालत से राहत नहीं मिली।

आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय ने शनिवार, 13 जून को नई दिल्ली के जयपुर पोलो ग्राउंड में एक सार्वजनिक नोटिस लगाया, जिसमें 15 एकड़ से अधिक के इस भूखंड को आधिकारिक रूप से सरकारी भूमि घोषित किया गया। यह कार्रवाई एक न्यायिक फैसले के ठीक एक दिन बाद हुई, जिसमें अदालत ने केंद्र सरकार के बेदखली आदेश पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था।

मुख्य घटनाक्रम

नोटिस में अनधिकृत कब्जे के खिलाफ स्पष्ट चेतावनी दी गई है। यह कदम केंद्र सरकार और इंडियन पोलो एसोसिएशन (IPA) के बीच चल रहे विवाद की पृष्ठभूमि में उठाया गया है। IPA लंबे समय से इस मैदान का प्रबंधन करता आया है, जो राजधानी के बीचों-बीच और प्रधानमंत्री के आधिकारिक आवास के निकट हाई-सिक्योरिटी क्षेत्र में स्थित है।

केंद्र सरकार का कहना है कि इस भूमि की आवश्यकता महत्वपूर्ण सरकारी और रक्षा-संबंधी कार्यक्रमों के आयोजन के लिए है। 20 मई को मंत्रालय ने पोलो ग्राउंड खाली करने का आदेश जारी किया था।

अदालत का रुख

पटियाला हाउस कोर्ट के वेकेशन जज धीरेंद्र राणा ने शुक्रवार, 12 जून को स्पष्ट किया कि वे बेदखली आदेश के अमल पर रोक लगाने के पक्ष में नहीं हैं। न्यायाधीश ने कहा, "जहां तक सुनवाई की अगली तारीख तक विवादित आदेश के अमल पर रोक लगाने की बात है, तो मैं इस अनुरोध को स्वीकार करने के पक्ष में नहीं हूं। इसी तरह का अनुरोध प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश, पीएचसी और दिल्ली उच्च न्यायालय के समक्ष भी किया गया था और अपीलकर्ता को कोई राहत नहीं दी गई थी। इसलिए, न्यायिक अनुशासन और औचित्य को ध्यान में रखते हुए, मैं अगली तारीख तक भी विवादित आदेश के अमल पर रोक लगाने के पक्ष में नहीं हूं।"

गौरतलब है कि दिल्ली उच्च न्यायालय ने 8 जून को IPA की रिट याचिका का निपटारा करते हुए बेदखली के विरुद्ध कोई अंतरिम सुरक्षा देने से इनकार कर दिया था। इस प्रकार तीन अलग-अलग न्यायिक मंचों ने IPA को राहत देने से मना किया है।

दिल्ली जिमखाना क्लब से समानांतर मामला

यह ऐसे समय में आया है जब मंत्रालय ने पिछले महीने लैंड एंड डेवलपमेंट ऑफिस के माध्यम से दिल्ली जिमखाना क्लब को भी इसी तरह का नोटिस जारी किया था। 2, सफदरजंग रोड स्थित 27.3 एकड़ की उस संपत्ति के बारे में नोटिस में कहा गया था कि वह रक्षा बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और सार्वजनिक सुरक्षा उद्देश्यों के लिए अत्यंत आवश्यक है।

उस नोटिस में परपेचुअल लीज डीड के क्लॉज 4 का हवाला दिया गया था, जिसके अंतर्गत सार्वजनिक प्रयोजन के लिए संपत्ति का कब्जा वापस लेने का अधिकार लीज देने वाले के पास सुरक्षित है। दिल्ली उच्च न्यायालय ने जिमखाना क्लब को भी अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया।

1913 में औपनिवेशिक काल में स्थापित दिल्ली जिमखाना क्लब देश के सबसे पुराने सामाजिक संस्थानों में से एक है और वरिष्ठ नौकरशाहों, राजनयिकों, सेना अधिकारियों तथा प्रभावशाली नागरिकों का पारंपरिक मिलन-स्थल रहा है।

आगे क्या होगा

पटियाला हाउस कोर्ट में मामले की अगली सुनवाई की तारीख निर्धारित है, जहाँ IPA की अपील पर विचार होगा। हालाँकि अब तक किसी भी अदालत ने बेदखली पर रोक नहीं लगाई है, इसलिए केंद्र सरकार की कार्रवाई जारी रहने की संभावना है। लुटियंस दिल्ली में लीज पर दी गई ऐसी अन्य संपत्तियों के भविष्य पर भी नजरें टिकी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक सुनियोजित रणनीति के हिस्से लगते हैं, जिसके तहत केंद्र लुटियंस दिल्ली में दशकों पुरानी लीज व्यवस्थाओं को समाप्त कर रहा है। तीन अलग-अलग अदालतों का IPA को राहत देने से इनकार यह दर्शाता है कि कानूनी पक्ष सरकार के साथ है। असली सवाल यह है कि 'सरकारी और रक्षा-संबंधी कार्यक्रम' की आड़ में इन प्रमुख भूखंडों का दीर्घकालिक उपयोग क्या होगा — और क्या इसका पारदर्शी खुलासा होगा।
RashtraPress
31 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जयपुर पोलो ग्राउंड विवाद क्या है?
केंद्र सरकार ने नई दिल्ली में 15 एकड़ से अधिक के जयपुर पोलो ग्राउंड को सरकारी भूमि घोषित करते हुए 13 जून को नोटिस लगाया। इंडियन पोलो एसोसिएशन (IPA) लंबे समय से इस मैदान का प्रबंधन करता आया है, लेकिन केंद्र इसे सरकारी और रक्षा-संबंधी कार्यक्रमों के लिए वापस लेना चाहता है।
अदालत ने IPA को राहत क्यों नहीं दी?
पटियाला हाउस कोर्ट के जज धीरेंद्र राणा ने न्यायिक अनुशासन का हवाला देते हुए कहा कि दिल्ली उच्च न्यायालय और प्रधान जिला न्यायाधीश पहले ही IPA को राहत देने से इनकार कर चुके हैं। दिल्ली उच्च न्यायालय ने 8 जून को IPA की रिट याचिका निपटाते हुए बेदखली के विरुद्ध कोई अंतरिम सुरक्षा नहीं दी थी।
केंद्र सरकार इस जमीन का उपयोग किस लिए करना चाहती है?
सरकार के अनुसार जयपुर पोलो ग्राउंड का उपयोग महत्वपूर्ण सरकारी और रक्षा-संबंधी कार्यक्रमों के आयोजन के लिए किया जाएगा। यह भूखंड प्रधानमंत्री के आधिकारिक आवास के निकट हाई-सिक्योरिटी क्षेत्र में स्थित है।
दिल्ली जिमखाना क्लब का मामला इससे कैसे जुड़ा है?
पिछले महीने आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय ने दिल्ली जिमखाना क्लब की 2, सफदरजंग रोड स्थित 27.3 एकड़ संपत्ति को भी इसी तरह नोटिस जारी किया था। उस मामले में भी दिल्ली उच्च न्यायालय ने क्लब को अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया।
IPA के लिए आगे क्या विकल्प बचे हैं?
पटियाला हाउस कोर्ट में मामले की अगली सुनवाई की तारीख निर्धारित है। हालाँकि अब तक तीन न्यायिक मंचों ने राहत देने से इनकार किया है, इसलिए IPA के पास उच्चतर न्यायालय में अपील का विकल्प शेष है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 3 सप्ताह पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 2 महीने पहले
  4. 2 महीने पहले
  5. 2 महीने पहले
  6. 2 महीने पहले
  7. 2 महीने पहले
  8. 1 साल पहले