क्या सुप्रीम कोर्ट ने सुखना झील के सूखने पर चिंता जताई?

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क्या सुप्रीम कोर्ट ने सुखना झील के सूखने पर चिंता जताई?

सारांश

सुप्रीम कोर्ट ने सुखना झील के सूखने पर चिंता जताई है। जानिए कैसे राजनीतिक संरक्षण और बिल्डर माफिया झील के अस्तित्व को खतरे में डाल रहे हैं। क्या कोर्ट के हस्तक्षेप से झील को बचाया जा सकेगा?

Key Takeaways

  • सुखना झील का सूखना गंभीर चिंता का विषय है।
  • बिल्डर माफिया और राजनीतिक संरक्षण झील के विनाश में योगदान दे रहे हैं।
  • सुप्रीम कोर्ट ने इको-सेंसिटिव जोन पर पुनर्विचार का आदेश दिया है।
  • पर्यावरण संरक्षण के लिए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है।
  • यह मामला अरावली रेंज के संरक्षण से जुड़ा है।

नई दिल्ली, 21 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। सुप्रीम कोर्ट ने चंडीगढ़ की प्रसिद्ध सुखना झील के सूखने की स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता में एक पीठ ने बुधवार को अरावली पहाड़ियों से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान इस विषय को उठाया।

शीर्ष न्यायालय ने कठोर शब्दों में कहा कि झील को और कितना सूखने दिया जाएगा? अधिकारियों और बिल्डर माफिया की सांठ-गांठ के कारण झील पूरी तरह से नष्ट हो चुकी है। सीजेआई ने हरियाणा सरकार को चेतावनी दी कि पुरानी गलतियों को दोहराने से बचें।

सुखना झील चंडीगढ़ का एक प्रमुख पर्यटन स्थल और प्राकृतिक सौंदर्य का प्रतीक रही है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में अवैध निर्माण और पर्यावरणीय उपेक्षा के कारण इसका जल स्तर लगातार घट रहा है। कोर्ट ने कहा कि कुछ राजनीतिक संरक्षण के साथ बिल्डर माफिया सक्रिय हैं, जिससे झील का विनाश हो रहा है।

याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट से अनुरोध किया कि पंजाब सरकार द्वारा पहले जारी किए गए आदेशों का पालन सुनिश्चित किया जाए। कोर्ट को बताया गया कि साल 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब सरकार को निर्देश दिया था कि सुखना झील के चारों ओर केवल 100 मीटर क्षेत्र को इको-सेंसिटिव जोन घोषित करने के निर्णय पर पुनर्विचार किया जाए।

विशेषज्ञों का मानना है कि झील की सुरक्षा के लिए यह जोन कम से कम 1 से 3 किलोमीटर का होना चाहिए। पंजाब सरकार ने कोर्ट को सूचित किया कि वह इस सुझाव से सहमत है और इस पर विचार कर रही है।

हालांकि, समय की कमी के कारण बुधवार को मामले की पूरी सुनवाई नहीं हो सकी। कोर्ट ने सुनवाई को चार सप्ताह के लिए टाल दिया है। इस दौरान कोर्ट ने पर्यावरण संरक्षण पर जोर देते हुए कहा कि ऐसी झीलों और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा करना जरूरी है, नहीं तो अपूरणीय नुकसान हो जाएगा।

यह मामला अरावली रेंज के संरक्षण से संबंधित है, लेकिन सुखना झील का उल्लेख करके कोर्ट ने पर्यावरणीय मुद्दों पर अपनी गंभीरता को दर्शाया है। विशेषज्ञों और पर्यावरण प्रेमियों को उम्मीद है कि कोर्ट के हस्तक्षेप से झील को बचाने के ठोस कदम उठाए जाएंगे।

Point of View

बल्कि यह हमारे पर्यावरण की सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण चेतावनी भी है। हमें अपने प्राकृतिक संसाधनों के प्रति जागरूक रहना होगा और संरक्षण के लिए ठोस कदम उठाने होंगे।
NationPress
21/01/2026

Frequently Asked Questions

सुखना झील क्यों सूख रही है?
सुखना झील का सूखना अवैध निर्माण और पर्यावरणीय उपेक्षा के कारण हो रहा है।
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में क्या निर्देश दिए?
सुप्रीम कोर्ट ने सुखना झील के चारों ओर इको-सेंसिटिव जोन का पुनर्विचार करने का निर्देश दिया।
इस मुद्दे पर क्या राजनीतिक संरक्षण का प्रभाव है?
बिल्डर माफिया राजनीतिक संरक्षण के सहारे सुखना झील को नुकसान पहुँचा रहे हैं।
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