जामताड़ा मुठभेड़ में गैंगस्टर सुजीत सिन्हा ढेर, झारखंड के 50+ मामलों का आरोपी
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड का कुख्यात गैंगस्टर सुजीत सिन्हा 3 अगस्त 2026 की देर रात जामताड़ा जिले में पुलिस मुठभेड़ में मारा गया। आधिकारिक पुलिस सूत्रों ने इसकी पुष्टि की है। हत्या, रंगदारी और अपहरण सहित 50 से अधिक आपराधिक मामलों में वांछित सिन्हा को उस समय मौत हो गई जब वह पुलिस हिरासत में था और एक जेल से दूसरी जेल स्थानांतरित किया जा रहा था।
मुठभेड़ की परिस्थितियाँ
पुलिस के अनुसार, सुजीत सिन्हा को साहिबगंज मंडल कारा से धनबाद जेल स्थानांतरित किया जा रहा था। कैदी वाहन जब जामताड़ा जिले से गुजर रहा था, तब सिन्हा ने शौच जाने का बहाना बनाकर वाहन रुकवाया। इसी दौरान उसने कथित तौर पर एक तैनात पुलिसकर्मी का हथियार छीनकर भागने का प्रयास किया और गोलीबारी शुरू कर दी।
पुलिस ने जवाबी कार्रवाई की, जिसमें सिन्हा गंभीर रूप से घायल हो गया और मौके पर ही उसकी मृत्यु हो गई। घटना के बाद फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) की टीम और वरिष्ठ पुलिस अधिकारी घटनास्थल पर पहुँचे। मामले की विस्तृत जाँच शुरू कर दी गई है और पुलिस की ओर से आधिकारिक बयान की प्रतीक्षा है।
कौन था सुजीत सिन्हा
सुजीत सिन्हा मूल रूप से पलामू जिले के मेदिनीनगर क्षेत्र का निवासी था। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, उसने अपने आपराधिक जीवन की शुरुआत कुख्यात अपराधी सुशील श्रीवास्तव गिरोह से की थी। बाद में उसने अपना अलग गैंग खड़ा किया और कोयला कारोबारियों, ठेकेदारों, बिल्डरों तथा अन्य व्यवसायियों से रंगदारी वसूलने का व्यापक नेटवर्क तैयार किया।
पिछले दो दशकों में उसने धनबाद, रामगढ़, रांची, पलामू, लातेहार, चतरा, हजारीबाग और अन्य जिलों में सक्रिय अपराध नेटवर्क संचालित किया। उसके खिलाफ हत्या, रंगदारी, अपहरण और आर्म्स एक्ट सहित विभिन्न धाराओं में 50 से अधिक मामले दर्ज थे।
जेल से भी चलाता रहा गिरोह
जाँच एजेंसियों के अनुसार, सिन्हा लंबे समय तक जेल में रहने के बावजूद अपने सहयोगियों के माध्यम से गिरोह का संचालन करता रहा। यह ऐसे समय में आया है जब झारखंड पुलिस संगठित अपराध नेटवर्क के खिलाफ अभियान तेज कर रही है। हाल के वर्षों में उसके नेटवर्क से जुड़े कई लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका था।
आगे की जाँच
गौरतलब है कि पुलिस हिरासत में हुई मुठभेड़ों की स्वतंत्र जाँच की माँग अक्सर उठती है। FSL टीम की मौजूदगी और वरिष्ठ अधिकारियों का घटनास्थल पर पहुँचना इस दिशा में प्रक्रियागत कदम है। पुलिस का विस्तृत आधिकारिक बयान आने के बाद मामले की पूरी तस्वीर स्पष्ट होगी।