जामताड़ा एनकाउंटर: गैंगस्टर सुजीत सिन्हा ढेर, 75+ मामलों के आरोपी के पूरे नेटवर्क पर झारखंड पुलिस का शिकंजा
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड के कुख्यात गैंगस्टर सुजीत सिन्हा की 3 अगस्त की रात जामताड़ा में पुलिस मुठभेड़ में मौत हो गई — हत्या, रंगदारी, अपहरण और आर्म्स एक्ट सहित 75 से अधिक आपराधिक मामलों में वांछित इस गैंगस्टर के खात्मे के साथ राज्य में दो दशकों से चले आ रहे संगठित अपराध के एक बड़े अध्याय का अंत हुआ। कोयलांचल और पलामू समेत कई जिलों में दहशत का पर्याय बने सुजीत की मौत के बाद झारखंड पुलिस ने उसके पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने का अभियान तेज़ कर दिया है।
एनकाउंटर का पूरा घटनाक्रम
पलामू के मेदिनीनगर निवासी सुजीत सिन्हा को रविवार शाम साहिबगंज मंडल कारा से धनबाद मंडल कारा स्थानांतरित किया जा रहा था। कैदी वाहन साहिबगंज-गोविंदपुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर सुपाईडीह और केंदबोना के बीच पहुँचा तो सुरक्षा काफिले की एक गाड़ी का अगला टायर पंचर हो गया।
पुलिस के अनुसार, इसी दौरान उसे दूसरे वाहन में बैठाने की प्रक्रिया चल रही थी कि सुजीत ने मौके का फायदा उठाकर एक जवान का हथियार छीन लिया और भागने की कोशिश में पुलिस टीम पर फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में वह गंभीर रूप से घायल हुआ और बाद में उसकी मौत हो गई।
फॉरेंसिक जाँच और मजिस्ट्रेट जाँच
सोमवार सुबह घटना की सूचना फैलते ही बड़ी संख्या में स्थानीय लोग घटनास्थल पर पहुँच गए। जामताड़ा पुलिस ने पूरे इलाके को घेरकर फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) की टीम से साक्ष्य एकत्र कराए और घटनाक्रम का दस्तावेज़ीकरण किया।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के दिशा-निर्देशों के अनुरूप पोस्टमार्टम डॉक्टरों के बोर्ड द्वारा कराया जा रहा है और पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी भी की जा रही है। साथ ही मुठभेड़ की मजिस्ट्रेट जाँच शुरू कर दी गई है।
कैसे बना सुजीत सिन्हा कोयलांचल का सबसे खतरनाक गैंगस्टर
सुजीत सिन्हा ने अपराध की दुनिया में हजारीबाग के कुख्यात डॉन सुशील श्रीवास्तव के शूटर के रूप में कदम रखा था। बाद में उसने अपना अलग गिरोह खड़ा किया और धनबाद, बोकारो, रामगढ़, रांची, पलामू, लातेहार, चतरा समेत कई जिलों में रंगदारी का जाल फैला लिया।
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, उसका गिरोह कोयला कारोबारियों, रेलवे ठेकेदारों, बिल्डरों और अन्य व्यवसायियों से लेवी वसूलने के लिए कुख्यात था। गौरतलब है कि पलामू के दोहरे हत्याकांड में आजीवन कारावास की सज़ा काट रहे सुजीत ने जेल में रहते हुए भी मोबाइल और गुर्गों के ज़रिए गिरोह का संचालन जारी रखा।
नेटवर्क की जड़ें और अंतरराज्यीय कनेक्शन
जाँच में सामने आया है कि सुजीत सिन्हा का नेटवर्क धनबाद के फरार गैंगस्टर प्रिंस खान के गिरोह से भी जुड़ा था। पुलिस और केंद्रीय एजेंसियाँ कथित हवाला नेटवर्क, विदेश से संचालित रंगदारी सिंडिकेट और आधुनिक हथियारों की आपूर्ति से जुड़े पहलुओं की भी जाँच कर रही हैं।
पुलिस का दावा है कि उसकी पत्नी रिया सिन्हा और अन्य सहयोगी कथित तौर पर रंगदारी से प्राप्त धन के प्रबंधन और नेटवर्क संचालन में सक्रिय भूमिका निभा रहे थे। हाल के महीनों में पुलिस ने गिरोह से जुड़े कई लोगों को गिरफ्तार किया था और हथियार तथा अन्य आपत्तिजनक सामग्री बरामद करने का दावा किया था।
एनकाउंटर के बाद अलर्ट और आगे की कार्रवाई
सुजीत सिन्हा की मौत के बाद झारखंड पुलिस ने धनबाद, रांची, पलामू, रामगढ़, जामताड़ा और अन्य संवेदनशील जिलों में हाई अलर्ट जारी किया है। पुलिस को आशंका है कि गिरोह के बचे हुए सदस्य या प्रतिद्वंद्वी गिरोह सक्रिय हो सकते हैं, इसी के मद्देनज़र खुफिया तंत्र को भी सतर्क कर दिया गया है। यह ऐसे समय में आया है जब झारखंड में संगठित अपराध और हवाला नेटवर्क के खिलाफ केंद्रीय और राज्य एजेंसियाँ मिलकर अभियान चला रही हैं।