दिल्ली का छात्र आंदोलन संविधान और राष्ट्र विरोधी था: RSS के अतुल लिमये का संभाजीनगर में बड़ा बयान
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सह-सरकार्यवाह अतुल लिमये ने 2 अगस्त 2026 को महाराष्ट्र के संभाजीनगर में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुआ छात्र आंदोलन संविधान और राष्ट्र के विरुद्ध एक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया गया। उन्होंने ABVP कार्यकर्ताओं से आग्रह किया कि इस आंदोलन को केवल राजनीतिक नज़रिए से न देखकर उसकी वैचारिक जड़ों का गहन अध्ययन किया जाए।
आंदोलन पर लिमये का आकलन
लिमये ने कहा कि शुरुआती दौर में NEET-UG 2026 पेपर लीक जैसे शिक्षा से जुड़े मुद्दे पर छात्रों का उठ खड़ा होना स्वाभाविक था। उनके अनुसार, छात्र शिक्षा प्रणाली में सुधार चाहते थे, परंतु कुछ समय बाद यह आंदोलन ऐसे तत्वों के हाथों में चला गया जिन्होंने इसकी दिशा और उद्देश्य को मूल रूप से बदल दिया।
उन्होंने स्पष्ट किया, 'यह आंदोलन संविधान के विरुद्ध एक हथियार के रूप में उपयोग किया गया और भारत के विरोध में खड़ा किया गया — इस अर्थ से इसे देखना ज़रूरी है।' साथ ही उन्होंने ABVP से कहा कि इसे केवल भाजपा-विरोधी दृष्टिकोण से न आँका जाए।
युवा शक्ति और राष्ट्र निर्माण
लिमये ने कहा कि यदि भारत को विकसित देश बनाना है तो युवा शक्ति का बड़ा योगदान अनिवार्य है। उन्होंने सवाल उठाया कि इस युवा शक्ति में कौन से संस्कार, कौन से सपने और कौन सी सोच होनी चाहिए — इसे बेहद सावधानी और गहराई के साथ तय करना होगा। उनके अनुसार, छात्रों की ऊर्जा को राष्ट्र निर्माण के कार्यों में लगाना ज़रूरी है और इस दिशा में ABVP को नेतृत्व की भूमिका निभानी चाहिए।
आंदोलन की कार्यप्रणाली पर सवाल
लिमये ने कहा कि इस आंदोलन को केवल एक विरोध प्रदर्शन मानकर छोड़ना उचित नहीं होगा। उन्होंने कई प्रश्न सामने रखे — आंदोलन की शुरुआत कैसे हुई, इसकी कार्यप्रणाली क्या थी, किन संगठनों और समूहों का समर्थन मिला, इसके पीछे वैचारिक आधार क्या था, और यह अचानक इतने व्यापक स्तर पर कैसे पहुँच गया। उन्होंने इन सवालों पर गंभीरता से विचार करने की ज़रूरत बताई।
ABVP को दिशा-निर्देश
संभाजीनगर में आयोजित इस कार्यक्रम में लिमये ने ABVP कार्यकर्ताओं को संदेश दिया कि छात्र संगठनों को ऐसी शक्तियों के प्रति सतर्क रहना चाहिए जो वैध शिक्षा-संबंधी माँगों को राष्ट्रविरोधी एजेंडे में बदल देती हैं। उन्होंने कहा कि यह ऐसे समय में आया है जब देश के युवाओं की भूमिका विकसित भारत के निर्माण में निर्णायक मानी जा रही है।