सौरभ भारद्वाज का कांग्रेस पर तीखा प्रहार: छात्र आंदोलन पर 'बार-बार रुख बदलने' का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
आम आदमी पार्टी (AAP) के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने 23 जुलाई 2026 को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) और उसके नेता राहुल गांधी पर गंभीर आरोप लगाते हुए एक विस्तृत बयान जारी किया। भारद्वाज ने दावा किया कि कांग्रेस से जुड़े सोशल मीडिया समूहों ने चल रहे छात्र आंदोलन को लेकर अपना रुख बार-बार बदला और हर बार एक नई राजनीतिक रणनीति अपनाई।
मुख्य आरोप: शुरुआत में आंदोलन का मज़ाक
भारद्वाज के अनुसार, प्रारंभ में कांग्रेस समर्थक सोशल मीडिया समूहों ने सीजेपी और अभिजीत दिपके की आलोचना की तथा पूरे अभियान को 'सोशल मीडिया का बुलबुला' करार दिया। उन्होंने दावा किया कि जब अभिजीत दिपके 6 जून को भारत पहुँचे, तो जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन का उपहास उड़ाया गया और उसे महज 200 लोगों की भीड़ वाला आयोजन बताया गया — यहाँ तक कहा गया कि वहाँ प्रदर्शनकारियों से अधिक यूट्यूबर्स मौजूद थे।
राहुल गांधी को 'आंदोलन का चेहरा' बनाने की कोशिश का आरोप
भारद्वाज ने आगे आरोप लगाया कि इस चरण के बाद राहुल गांधी के कार्यक्रमों और सभाओं को बड़े पैमाने पर प्रचारित किया गया और उन्हें आंदोलन के नेतृत्वकर्ता के रूप में स्थापित करने का प्रयास किया गया। हालाँकि उनका दावा है कि इन कार्यक्रमों में उपस्थित अधिकांश लोग आम युवा नहीं, बल्कि कांग्रेस कार्यकर्ता थे। उन्होंने यह भी कहा कि राहुल गांधी इस पूरे दौर में लगभग एक महीने तक विदेश में रहे और उस अवधि में कांग्रेस समर्थकों ने इस विषय पर कोई सक्रिय प्रतिक्रिया नहीं दी।
20 जुलाई के प्रदर्शन और श्रेय की राजनीति
भारद्वाज के अनुसार, 20 जुलाई को सीजेपी के प्रदर्शन में बड़ी संख्या में युवा और जेन-ज़ी वर्ग के लोग शामिल हुए। उनका आरोप है कि इसके बाद कांग्रेस ने उसी आंदोलन का श्रेय लेने की कोशिश शुरू कर दी। उन्होंने यह भी कहा कि राहुल गांधी प्रधानमंत्री आवास के निकट बैठे और मीडिया के ज़रिये युवाओं से वहाँ आने की अपील की, जिससे जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन का प्रभाव कम करने की कोशिश की गई। भारद्वाज का दावा है कि यह प्रयास जनता और आंदोलनकारियों ने स्वीकार नहीं किया, और आंदोलन से जुड़े कुछ लोगों ने भी इस रणनीति का खुलकर विरोध किया।
कांग्रेस की 'चक्रीय रणनीति' पर निशाना
अपने बयान के अंत में भारद्वाज ने कहा कि जब कांग्रेस की यह रणनीति सफल नहीं हुई, तो उसके समर्थक एक बार फिर शुरुआती रुख पर लौट आए और सीजेपी तथा आंदोलन से जुड़े लोगों पर सवाल उठाने लगे। उन्होंने इसे कांग्रेस की 'बार-बार दोहराई जाने वाली राजनीतिक रणनीति' बताया। गौरतलब है कि यह बयान ऐसे समय में आया है जब छात्र आंदोलन को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच श्रेय की राजनीति चरम पर है।
कांग्रेस की ओर से इन आरोपों पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। आने वाले दिनों में इस राजनीतिक वाकयुद्ध के और तेज़ होने की संभावना है।