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अमरावती अस्पताल अग्निकांड: तीन नवजातों की मौत पर पाँच स्वास्थ्य अधिकारी निलंबित, दो कंपनियाँ ब्लैकलिस्ट होंगी

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अमरावती अस्पताल अग्निकांड: तीन नवजातों की मौत पर पाँच स्वास्थ्य अधिकारी निलंबित, दो कंपनियाँ ब्लैकलिस्ट होंगी

सारांश

अमरावती अस्पताल की एसएनसीयू में आग — और तीन नवजातों की मौत — ने महाराष्ट्र के स्वास्थ्य तंत्र की उस लापरवाही को उजागर किया जो वर्षों से छुपी थी। फायर अलार्म बंद, वेंटिलेटर बिना सर्विस के — और अब पाँच निलंबन, दो कंपनियाँ ब्लैकलिस्ट। सवाल यह है कि यह सुधार टिकेगा या अगले हादसे तक भुला दिया जाएगा।

मुख्य बातें

महाराष्ट्र सरकार ने अमरावती जिला महिला अस्पताल के एसएनसीयू अग्निकांड में पाँच वरिष्ठ स्वास्थ्य अधिकारियों और कर्मचारियों को निलंबित किया।
आग 24 अगस्त को लगी थी, जिसमें तीन नवजात शिशुओं की मौत हुई और 36 शिशुओं को सुरक्षित बचाया गया।
जाँच रिपोर्ट में फायर अलार्म, स्प्रिंकलर सिस्टम बंद और वेंटिलेटर सर्विसिंग न होने जैसी गंभीर लापरवाही सामने आई।
एम/एस एओवी इंटरनेशनल एलएलपी को दोषी पाया गया; शिलार कंपनी के खिलाफ भी ब्लैकलिस्टिंग की प्रक्रिया शुरू।
राज्य के सभी अस्पतालों का विद्युत और अग्नि सुरक्षा ऑडिट तीन महीने के भीतर कराने के निर्देश।
सभी एसएनसीयू और एनआईसीयू में सीसीटीवी कैमरे और अनिवार्य फायर सेफ्टी मॉक ड्रिल लागू होंगे।

महाराष्ट्र सरकार ने अमरावती जिला महिला अस्पताल की विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाई (एसएनसीयू) में 24 अगस्त को लगी भीषण आग में तीन नवजात शिशुओं की मौत के मामले में स्वास्थ्य विभाग के पाँच वरिष्ठ अधिकारियों और कर्मचारियों को निलंबित करने के आदेश जारी किए हैं। एक उच्चस्तरीय जाँच समिति की रिपोर्ट आने के बाद सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग ने दोषियों के विरुद्ध यह सख्त कार्रवाई की है।

कौन-कौन निलंबित हुए

निलंबित किए गए अधिकारियों में अकोला सर्कल के उप स्वास्थ्य सेवा निदेशक, अमरावती महिला अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक, अतिरिक्त जिला सिविल सर्जन (अमरावती), प्रशासनिक अधिकारी और अस्पताल के इलेक्ट्रीशियन शामिल हैं। सरकार ने इन सभी को प्रथम दृष्टि में निगरानी और पर्यवेक्षण में हुई गंभीर लापरवाही का दोषी माना है।

इन अधिकारियों के विरुद्ध महाराष्ट्र सिविल सेवा (अनुशासन एवं अपील) नियम, 1979 के नियम-8 के तहत विभागीय कार्रवाई शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं। संविदा कर्मचारियों और लोक निर्माण विभाग (PWD) के जिम्मेदार अधिकारियों पर भी दंडात्मक कार्रवाई के आदेश जारी किए गए हैं।

जाँच में क्या सामने आया

उच्चस्तरीय जाँच समिति की रिपोर्ट में तकनीकी निरीक्षण और उपकरणों के रखरखाव में कई गंभीर चूकें उजागर हुई हैं। रिपोर्ट के अनुसार, वेंटिलेटरों की समय पर सर्विसिंग नहीं की गई थी, फायर अलार्म और स्प्रिंकलर सिस्टम काम नहीं कर रहे थे, और फायर पंप हाउस बंद पाया गया।

जाँच में एम/एस एओवी इंटरनेशनल एलएलपी को दोषी पाया गया है और कंपनी को ब्लैकलिस्ट करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अतिरिक्त, शिलार कंपनी की सेवाओं में भी प्रथम दृष्टया खामियाँ पाए जाने पर फॉरेंसिक रिपोर्ट जल्द उपलब्ध कराने और उसे भी ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया शुरू करने के आदेश दिए गए हैं।

गौरतलब है कि आग लगने के दौरान 36 नवजात शिशुओं को सुरक्षित बचाकर अन्य अस्पतालों में स्थानांतरित किया गया था। जान जोखिम में डालकर शिशुओं को बचाने वाले कर्मचारियों को सम्मानित करने के भी निर्देश दिए गए हैं।

भविष्य के लिए सुधारात्मक कदम

महाराष्ट्र सरकार ने भविष्य में ऐसी दुर्घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए व्यापक सुधारों की घोषणा की है। सरकार ने सभी एसएनसीयू और एनआईसीयू में सीसीटीवी कैमरे लगाने और प्रत्येक अस्पताल में नियमित फायर सेफ्टी मॉक ड्रिल अनिवार्य करने के निर्देश दिए हैं।

अग्नि सुरक्षा, विद्युत सुरक्षा और चिकित्सा उपकरणों के रखरखाव से संबंधित मानक संचालन प्रक्रियाओं (एसओपी) को सख्ती से लागू करने के आदेश भी जारी किए गए हैं। स्वास्थ्य सेवा आयुक्त संजय काटकर को PWD, विद्युत, अग्निशमन, बायोटेक्निकल और रखरखाव विभागों के साथ नियमित समीक्षा बैठकें करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

राज्यव्यापी ऑडिट का निर्देश

राज्य के सभी जिला कलेक्टरों, जिला परिषदों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों और नगर आयुक्तों को अपने-अपने क्षेत्रों के सभी अस्पतालों का विद्युत और अग्नि सुरक्षा ऑडिट तीन महीने के भीतर पूरा कराने के निर्देश दिए गए हैं। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में अस्पताल अग्निकांडों की घटनाएँ चिंता का विषय बनी हुई हैं।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि सार्वजनिक और निजी, दोनों तरह के अस्पतालों में फायर सेफ्टी ऑडिट, निगरानी और अनुपालन रिपोर्टिंग सुनिश्चित की जाएगी। अमरावती अग्निकांड की यह जाँच और कार्रवाई महाराष्ट्र के सरकारी स्वास्थ्य तंत्र की जवाबदेही तय करने की दिशा में एक निर्णायक कदम मानी जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

स्प्रिंकलर निष्क्रिय और वेंटिलेटर बिना सर्विस के: यह व्यवस्थागत उदासीनता का परिणाम है। निलंबन और ब्लैकलिस्टिंग ज़रूरी कदम हैं, लेकिन भारत में अस्पताल अग्निकांडों के बाद यही चक्र बार-बार दोहराया जाता है — जाँच, कार्रवाई, और फिर भूलना। असली परीक्षा यह है कि राज्यव्यापी अग्नि सुरक्षा ऑडिट का तीन महीने का निर्देश क्या वाकई लागू होगा, या यह भी कागज़ पर ही रहेगा। जब तक अनुपालन की जवाबदेही नियमित और सार्वजनिक नहीं होती, सुधारों की घोषणाएँ महज़ प्रशासनिक औपचारिकता बनकर रह जाएंगी।
RashtraPress
13 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अमरावती अस्पताल अग्निकांड में कितने नवजातों की मौत हुई और कितने बचाए गए?
24 अगस्त को लगी आग में अमरावती जिला महिला अस्पताल की एसएनसीयू में तीन नवजात शिशुओं की मौत हो गई। हालाँकि, 36 अन्य नवजात शिशुओं को सुरक्षित बचाकर अन्य अस्पतालों में स्थानांतरित कर दिया गया था।
किन अधिकारियों को निलंबित किया गया है?
निलंबित अधिकारियों में अकोला सर्कल के उप स्वास्थ्य सेवा निदेशक, अमरावती महिला अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक, अतिरिक्त जिला सिविल सर्जन (अमरावती), प्रशासनिक अधिकारी और अस्पताल का इलेक्ट्रीशियन शामिल हैं। इनके विरुद्ध महाराष्ट्र सिविल सेवा (अनुशासन एवं अपील) नियम, 1979 के नियम-8 के तहत विभागीय कार्रवाई शुरू की गई है।
जाँच रिपोर्ट में आग के क्या कारण सामने आए?
उच्चस्तरीय जाँच समिति की रिपोर्ट के अनुसार, वेंटिलेटरों की समय पर सर्विसिंग नहीं की गई थी, फायर अलार्म और स्प्रिंकलर सिस्टम काम नहीं कर रहे थे, और फायर पंप हाउस बंद पाया गया। इन सभी को तकनीकी निरीक्षण और रखरखाव में गंभीर लापरवाही के रूप में चिह्नित किया गया है।
किन कंपनियों को ब्लैकलिस्ट किया जाएगा?
जाँच में एम/एस एओवी इंटरनेशनल एलएलपी को दोषी पाया गया है और उसे तत्काल ब्लैकलिस्ट करने के निर्देश दिए गए हैं। शिलार कंपनी की सेवाओं में भी प्रथम दृष्टया खामियाँ पाए जाने पर फॉरेंसिक रिपोर्ट के बाद उसे भी ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया शुरू करने के आदेश दिए गए हैं।
महाराष्ट्र सरकार ने भविष्य में ऐसी घटनाएँ रोकने के लिए क्या कदम उठाए हैं?
सरकार ने सभी एसएनसीयू और एनआईसीयू में सीसीटीवी कैमरे लगाने, नियमित फायर सेफ्टी मॉक ड्रिल अनिवार्य करने और राज्य के सभी अस्पतालों का विद्युत व अग्नि सुरक्षा ऑडिट तीन महीने के भीतर कराने के निर्देश दिए हैं। स्वास्थ्य सेवा आयुक्त संजय काटकर को संबंधित विभागों के साथ नियमित समीक्षा बैठकें करने की जिम्मेदारी भी सौंपी गई है।
राष्ट्र प्रेस
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