अमरावती अस्पताल अग्निकांड: 3 नवजातों की मौत पर 5 स्वास्थ्य अधिकारी निलंबित, दो कंपनियाँ ब्लैकलिस्ट
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र सरकार ने अमरावती जिला महिला अस्पताल की विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाई (एसएनसीयू) में 24 अगस्त को लगी भीषण आग में तीन नवजात शिशुओं की मौत के मामले में स्वास्थ्य विभाग के पाँच वरिष्ठ अधिकारियों एवं कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। उच्चस्तरीय जाँच समिति की रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग ने दोषियों के विरुद्ध यह कड़ी कार्रवाई की है।
कौन-कौन हुए निलंबित
निलंबित अधिकारियों में अकोला सर्कल के उप स्वास्थ्य सेवा निदेशक, अमरावती महिला अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक, अतिरिक्त जिला सिविल सर्जन (अमरावती), प्रशासनिक अधिकारी तथा अस्पताल के इलेक्ट्रीशियन शामिल हैं। सरकार ने इन सभी को प्रथम दृष्टया निगरानी एवं पर्यवेक्षण में घोर लापरवाही का दोषी माना है।
इनके विरुद्ध महाराष्ट्र सिविल सेवा (अनुशासन एवं अपील) नियम, 1979 के नियम-8 के अंतर्गत विभागीय कार्यवाही शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं। संविदा कर्मचारियों तथा लोक निर्माण विभाग (PWD) के जिम्मेदार अधिकारियों पर भी दंडात्मक कार्रवाई के आदेश जारी किए गए हैं।
जाँच रिपोर्ट में सामने आई गंभीर खामियाँ
उच्चस्तरीय जाँच समिति की रिपोर्ट में तकनीकी रखरखाव और निगरानी में कई गंभीर चूकें उजागर हुई हैं। रिपोर्ट के अनुसार, वेंटिलेटरों की समय पर सर्विसिंग नहीं की गई थी। इसके अतिरिक्त, फायर अलार्म और स्प्रिंकलर सिस्टम दुर्घटना के समय काम नहीं कर रहे थे और फायर पंप हाउस बंद पाया गया — जो अग्नि सुरक्षा प्रोटोकॉल का खुला उल्लंघन है।
गौरतलब है कि आग लगने के दौरान अस्पताल के कर्मचारियों ने जान की परवाह किए बिना 36 नवजात शिशुओं को सुरक्षित बाहर निकाल कर अन्य अस्पतालों में स्थानांतरित किया। इन वीर कर्मचारियों को सम्मानित करने के भी निर्देश सरकार ने दिए हैं।
दो कंपनियों पर कार्रवाई, ब्लैकलिस्टिंग के आदेश
जाँच में एम/एस एओवी इंटरनेशनल एलएलपी को दोषी पाया गया है, जिसके बाद उसे ब्लैकलिस्ट करने के निर्देश दिए गए हैं। शिलार कंपनी की सेवाओं में भी प्रथम दृष्टया गंभीर खामियाँ सामने आई हैं। इस कंपनी के संबंध में फॉरेंसिक रिपोर्ट जल्द उपलब्ध कराने और उसे भी ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया शुरू करने के आदेश दिए गए हैं।
सरकार की भविष्य की सुरक्षा योजना
महाराष्ट्र सरकार ने ऐसी दुर्घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए व्यापक सुधारों की घोषणा की है। सभी एसएनसीयू और एनआईसीयू में सीसीटीवी कैमरे लगाने और प्रत्येक अस्पताल में नियमित फायर सेफ्टी मॉक ड्रिल अनिवार्य करने के निर्देश दिए गए हैं।
स्वास्थ्य सेवा आयुक्त संजय काटकर को PWD, विद्युत, अग्निशमन, बायोटेक्निकल और रखरखाव विभागों के साथ नियमित समीक्षा बैठकें करने तथा अस्पतालों की सुरक्षा पर प्रभावी निगरानी रखने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। राज्य के सभी जिला कलेक्टरों, जिला परिषदों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों और नगर आयुक्तों को तीन महीने के भीतर अपने क्षेत्र के समस्त अस्पतालों का विद्युत एवं अग्नि सुरक्षा ऑडिट पूरा कराने के निर्देश दिए गए हैं।
यह ऐसे समय में आया है जब देश भर में अस्पतालों में अग्नि सुरक्षा मानकों की अनदेखी पर सवाल उठते रहे हैं। राज्य सरकार ने सार्वजनिक और निजी — दोनों प्रकार के अस्पतालों में फायर सेफ्टी ऑडिट, निगरानी और अनुपालन रिपोर्टिंग सुनिश्चित करने का संकल्प लिया है।