10 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

12 वर्षों में भारत बना ग्लोबल डिजिटल पावर: एआई, सेमीकंडक्टर और क्वांटम तकनीक में नई छलांग

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
12 वर्षों में भारत बना ग्लोबल डिजिटल पावर: एआई, सेमीकंडक्टर और क्वांटम तकनीक में नई छलांग

सारांश

12 वर्षों में भारत ने डिजिटल उपभोक्ता से डिजिटल निर्माता का सफर तय किया है। ₹10,300 करोड़ का एआई मिशन, ₹76,000 करोड़ का सेमीकंडक्टर कार्यक्रम और क्वांटम नेटवर्क में निर्धारित समय से छह वर्ष आगे की उपलब्धि — ये आँकड़े बताते हैं कि भारत की डिजिटल महत्वाकांक्षा अब सिर्फ नीति-दस्तावेज़ों तक सीमित नहीं रही।

मुख्य बातें

ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क 2019 के 19.35 लाख रूट किलोमीटर से बढ़कर 2025 तक 42.36 लाख रूट किलोमीटर हो गया।
इंटरनेट कनेक्शन 2014 के 25.15 करोड़ से बढ़कर 2026 में 102.86 करोड़ तक पहुँचे; 1 जीबी डेटा की कीमत ₹269 से घटकर ₹8–10 हुई।
राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन के तहत 38 सुपरकंप्यूटर स्थापित, संयुक्त क्षमता 47 पेटाफ्लॉप्स ; स्वदेशी 'परम रुद्र' श्रृंखला विकसित।
जून 2026 तक सेमीकंडक्टर क्षेत्र में ₹1.64 लाख करोड़ की 12 परियोजनाओं को मंजूरी; आईएसएम 2.0 की घोषणा।
भारत ने 1,000 किलोमीटर क्वांटम संचार नेटवर्क निर्धारित समय से छह वर्ष पहले प्रदर्शित किया; अमरावती में 'क्वांटम वैली' की आधारशिला रखी गई।
डेटा सेंटर क्षमता 2020 के 375 मेगावाट से 2025 तक 1,500 मेगावाट तक पहुँचने का अनुमान; 1.8 लाख स्टार्टअप में से 89% एआई का उपयोग कर रहे हैं।

भारत ने पिछले 12 वर्षों में डिजिटल क्षेत्र में एक ऐतिहासिक कायापलट किया है। एक आधिकारिक फैक्ट शीट के अनुसार, जो 22 जून 2026 को जारी की गई, कभी महज एक विशाल उपभोक्ता बाज़ार के रूप में पहचाना जाने वाला भारत आज आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), सेमीकंडक्टर, क्वांटम तकनीक, सुपरकंप्यूटिंग और डेटा सेंटर जैसी अत्याधुनिक तकनीकों में वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान स्थापित कर चुका है। डिजिटल इंडिया अभियान और डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (डीपीआई) के विस्तार ने इस रूपांतरण की नींव रखी है।

डिजिटल कनेक्टिविटी में क्रांतिकारी बदलाव

2015 में शुरू हुए डिजिटल इंडिया कार्यक्रम ने देशभर में ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क के विस्तार को गति दी। 2019 में यह नेटवर्क 19.35 लाख रूट किलोमीटर था, जो 2025 तक बढ़कर 42.36 लाख रूट किलोमीटर हो गया — यानी लगभग दोगुना विस्तार। इसी अवधि में देश के 99.9 प्रतिशत जिलों तक 5जी सेवाएँ पहुँच चुकी हैं, जो दुनिया के सबसे तेज़ 5जी विस्तारों में से एक माना जा रहा है।

इंटरनेट कनेक्शनों की संख्या 2014 के 25.15 करोड़ से बढ़कर 2026 में 102.86 करोड़ तक पहुँच गई। ब्रॉडबैंड कनेक्शन 6.1 करोड़ से उछलकर दिसंबर 2025 तक 99.56 करोड़ हो गए। फैक्ट शीट के अनुसार, 1 जीबी डेटा की औसत लागत ₹269 से घटकर मात्र ₹8–10 रह गई है, जबकि प्रति व्यक्ति मासिक डेटा खपत 61.66 एमबी से बढ़कर 24.01 जीबी हो गई है।

सुपरकंप्यूटिंग और 'परम रुद्र' की उड़ान

₹4,500 करोड़ के राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन (एनएसएम) के तहत देश के प्रमुख संस्थानों में 38 सुपरकंप्यूटर स्थापित किए जा चुके हैं, जिनकी संयुक्त कंप्यूटिंग क्षमता 47 पेटाफ्लॉप्स है। इस मिशन की सबसे उल्लेखनीय उपलब्धि स्वदेशी 'परम रुद्र' सुपरकंप्यूटर श्रृंखला का विकास है, जो उच्च प्रदर्शन कंप्यूटिंग में भारत की आत्मनिर्भरता को रेखांकित करती है।

सेमीकंडक्टर मिशन: चिप निर्माण में नई दिशा

दिसंबर 2021 में शुरू किए गए ₹76,000 करोड़ के सेमीकंडक्टर इंडिया कार्यक्रम ने भारत को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स आपूर्ति शृंखला का हिस्सा बनाने की दिशा में काम किया है। केंद्रीय बजट 2026-27 में भारत सेमीकंडक्टर मिशन (आईएसएम) 2.0 की घोषणा भी की गई है। जून 2026 तक ₹1.64 लाख करोड़ की 12 बड़ी परियोजनाओं को मंजूरी मिल चुकी है, जिनमें एक सेमीकंडक्टर फैब, दो कंपाउंड सेमीकंडक्टर यूनिट और नौ पैकेजिंग इकाइयाँ शामिल हैं। इनसे आयात पर निर्भरता कम होने की उम्मीद है।

क्वांटम तकनीक: निर्धारित समय से छह वर्ष आगे

अप्रैल 2023 में शुरू किए गए ₹6,003.65 करोड़ के राष्ट्रीय क्वांटम मिशन के तहत देश के प्रमुख संस्थानों में चार विशेष क्वांटम अनुसंधान केंद्र स्थापित किए गए हैं, जहाँ 150 से अधिक शोधकर्ता कार्यरत हैं। भारत ने 1,000 किलोमीटर लंबा सुरक्षित क्वांटम संचार नेटवर्क सफलतापूर्वक प्रदर्शित किया है — यह उपलब्धि निर्धारित समय से छह वर्ष पहले हासिल की गई। फरवरी 2026 में आंध्र प्रदेश के अमरावती में देश की पहली 'क्वांटम वैली' की आधारशिला रखी गई।

एआई मिशन और डेटा सेंटर विस्तार

2024 में शुरू किए गए ₹10,300 करोड़ से अधिक के इंडिया एआई मिशन के तहत 38,000 से अधिक जीपीयू क्षमता वाली साझा कंप्यूटिंग सुविधा विकसित की जा रही है। 'एआई कोश' प्लेटफॉर्म पर 12,115 से अधिक डेटासेट और 306 एआई मॉडल उपलब्ध कराए गए हैं। मार्च 2026 तक भारत में लगभग 1.8 लाख स्टार्टअप सक्रिय हैं, जिनमें से 89 प्रतिशत किसी न किसी रूप में एआई तकनीक का उपयोग कर रहे हैं।

डेटा सेंटर क्षमता के मोर्चे पर भी उल्लेखनीय प्रगति हुई है। 2020 में देश की डेटा सेंटर क्षमता लगभग 375 मेगावाट थी, जो 2025 तक 1,500 मेगावाट तक पहुँचने का अनुमान है। मुंबई, नवी मुंबई, हैदराबाद, बेंगलुरु, नोएडा और जामनगर प्रमुख डेटा सेंटर हब के रूप में उभर रहे हैं, जबकि गुजरात, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और आंध्र प्रदेश में बड़े हाइपरस्केल और एआई-केंद्रित डेटा सेंटर विकसित हो रहे हैं। यह विस्तार भारत को वैश्विक क्लाउड और एआई अवसंरचना के एक अपरिहार्य केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक निर्णायक कदम है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इन्हें संदर्भ में रखना ज़रूरी है — इंटरनेट कनेक्शनों की संख्या और डेटा खपत में वृद्धि काफी हद तक बाज़ार-प्रेरित रही है, न कि केवल सरकारी नीति का परिणाम। सेमीकंडक्टर फैब और क्वांटम नेटवर्क जैसी उपलब्धियाँ वास्तविक हैं, परंतु असली कसौटी यह है कि ये परियोजनाएँ व्यावसायिक उत्पादन और रोज़गार सृजन में कब और कितना योगदान देती हैं। ₹76,000 करोड़ के सेमीकंडक्टर कार्यक्रम की घोषणा के पाँच वर्ष बाद भी भारत का चिप आयात बिल उच्च बना हुआ है — यह अंतर नीतिगत महत्वाकांक्षा और ज़मीनी क्रियान्वयन के बीच की खाई को दर्शाता है।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत के डिजिटल परिवर्तन में पिछले 12 वर्षों में क्या प्रमुख बदलाव आए हैं?
आधिकारिक आँकड़ों के अनुसार, इंटरनेट कनेक्शन 2014 के 25.15 करोड़ से बढ़कर 2026 में 102.86 करोड़ हो गए और 1 जीबी डेटा की कीमत ₹269 से घटकर ₹8–10 रह गई। इसके साथ ही एआई, सेमीकंडक्टर, क्वांटम तकनीक और सुपरकंप्यूटिंग में बड़े मिशन शुरू किए गए हैं।
भारत सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 क्या है और इसमें कितना निवेश होगा?
केंद्रीय बजट 2026-27 में घोषित आईएसएम 2.0 मूल ₹76,000 करोड़ के सेमीकंडक्टर इंडिया कार्यक्रम का विस्तार है। जून 2026 तक ₹1.64 लाख करोड़ की 12 परियोजनाओं को मंजूरी दी जा चुकी है, जिनमें एक सेमीकंडक्टर फैब, दो कंपाउंड सेमीकंडक्टर यूनिट और नौ पैकेजिंग इकाइयाँ शामिल हैं।
राष्ट्रीय क्वांटम मिशन की प्रमुख उपलब्धियाँ क्या हैं?
अप्रैल 2023 में शुरू हुए ₹6,003.65 करोड़ के इस मिशन के तहत भारत ने 1,000 किलोमीटर लंबा सुरक्षित क्वांटम संचार नेटवर्क निर्धारित समय से छह वर्ष पहले प्रदर्शित किया। फरवरी 2026 में अमरावती में देश की पहली 'क्वांटम वैली' की आधारशिला भी रखी गई।
इंडिया एआई मिशन के तहत अब तक क्या हासिल हुआ है?
2024 में ₹10,300 करोड़ से अधिक के निवेश के साथ शुरू इस मिशन के तहत 38,000 से अधिक जीपीयू क्षमता की साझा कंप्यूटिंग सुविधा विकसित की जा रही है। 'एआई कोश' प्लेटफॉर्म पर 12,115 से अधिक डेटासेट और 306 एआई मॉडल उपलब्ध कराए गए हैं।
भारत का डेटा सेंटर उद्योग कितनी तेज़ी से बढ़ रहा है?
2020 में देश की डेटा सेंटर क्षमता लगभग 375 मेगावाट थी, जो 2025 तक 1,500 मेगावाट तक पहुँचने का अनुमान है। मुंबई, हैदराबाद, बेंगलुरु और नोएडा प्रमुख हब के रूप में उभर रहे हैं, जबकि गुजरात और आंध्र प्रदेश में हाइपरस्केल डेटा सेंटर विकसित हो रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 3 महीने पहले
  4. 5 महीने पहले
  5. 7 महीने पहले
  6. 10 महीने पहले
  7. 1 साल पहले
  8. 1 साल पहले