12 वर्षों में भारत बना ग्लोबल डिजिटल पावर: एआई, सेमीकंडक्टर और क्वांटम तकनीक में नई छलांग
सारांश
मुख्य बातें
भारत ने पिछले 12 वर्षों में डिजिटल क्षेत्र में एक ऐतिहासिक कायापलट किया है। एक आधिकारिक फैक्ट शीट के अनुसार, जो 22 जून 2026 को जारी की गई, कभी महज एक विशाल उपभोक्ता बाज़ार के रूप में पहचाना जाने वाला भारत आज आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), सेमीकंडक्टर, क्वांटम तकनीक, सुपरकंप्यूटिंग और डेटा सेंटर जैसी अत्याधुनिक तकनीकों में वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान स्थापित कर चुका है। डिजिटल इंडिया अभियान और डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (डीपीआई) के विस्तार ने इस रूपांतरण की नींव रखी है।
डिजिटल कनेक्टिविटी में क्रांतिकारी बदलाव
2015 में शुरू हुए डिजिटल इंडिया कार्यक्रम ने देशभर में ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क के विस्तार को गति दी। 2019 में यह नेटवर्क 19.35 लाख रूट किलोमीटर था, जो 2025 तक बढ़कर 42.36 लाख रूट किलोमीटर हो गया — यानी लगभग दोगुना विस्तार। इसी अवधि में देश के 99.9 प्रतिशत जिलों तक 5जी सेवाएँ पहुँच चुकी हैं, जो दुनिया के सबसे तेज़ 5जी विस्तारों में से एक माना जा रहा है।
इंटरनेट कनेक्शनों की संख्या 2014 के 25.15 करोड़ से बढ़कर 2026 में 102.86 करोड़ तक पहुँच गई। ब्रॉडबैंड कनेक्शन 6.1 करोड़ से उछलकर दिसंबर 2025 तक 99.56 करोड़ हो गए। फैक्ट शीट के अनुसार, 1 जीबी डेटा की औसत लागत ₹269 से घटकर मात्र ₹8–10 रह गई है, जबकि प्रति व्यक्ति मासिक डेटा खपत 61.66 एमबी से बढ़कर 24.01 जीबी हो गई है।
सुपरकंप्यूटिंग और 'परम रुद्र' की उड़ान
₹4,500 करोड़ के राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन (एनएसएम) के तहत देश के प्रमुख संस्थानों में 38 सुपरकंप्यूटर स्थापित किए जा चुके हैं, जिनकी संयुक्त कंप्यूटिंग क्षमता 47 पेटाफ्लॉप्स है। इस मिशन की सबसे उल्लेखनीय उपलब्धि स्वदेशी 'परम रुद्र' सुपरकंप्यूटर श्रृंखला का विकास है, जो उच्च प्रदर्शन कंप्यूटिंग में भारत की आत्मनिर्भरता को रेखांकित करती है।
सेमीकंडक्टर मिशन: चिप निर्माण में नई दिशा
दिसंबर 2021 में शुरू किए गए ₹76,000 करोड़ के सेमीकंडक्टर इंडिया कार्यक्रम ने भारत को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स आपूर्ति शृंखला का हिस्सा बनाने की दिशा में काम किया है। केंद्रीय बजट 2026-27 में भारत सेमीकंडक्टर मिशन (आईएसएम) 2.0 की घोषणा भी की गई है। जून 2026 तक ₹1.64 लाख करोड़ की 12 बड़ी परियोजनाओं को मंजूरी मिल चुकी है, जिनमें एक सेमीकंडक्टर फैब, दो कंपाउंड सेमीकंडक्टर यूनिट और नौ पैकेजिंग इकाइयाँ शामिल हैं। इनसे आयात पर निर्भरता कम होने की उम्मीद है।
क्वांटम तकनीक: निर्धारित समय से छह वर्ष आगे
अप्रैल 2023 में शुरू किए गए ₹6,003.65 करोड़ के राष्ट्रीय क्वांटम मिशन के तहत देश के प्रमुख संस्थानों में चार विशेष क्वांटम अनुसंधान केंद्र स्थापित किए गए हैं, जहाँ 150 से अधिक शोधकर्ता कार्यरत हैं। भारत ने 1,000 किलोमीटर लंबा सुरक्षित क्वांटम संचार नेटवर्क सफलतापूर्वक प्रदर्शित किया है — यह उपलब्धि निर्धारित समय से छह वर्ष पहले हासिल की गई। फरवरी 2026 में आंध्र प्रदेश के अमरावती में देश की पहली 'क्वांटम वैली' की आधारशिला रखी गई।
एआई मिशन और डेटा सेंटर विस्तार
2024 में शुरू किए गए ₹10,300 करोड़ से अधिक के इंडिया एआई मिशन के तहत 38,000 से अधिक जीपीयू क्षमता वाली साझा कंप्यूटिंग सुविधा विकसित की जा रही है। 'एआई कोश' प्लेटफॉर्म पर 12,115 से अधिक डेटासेट और 306 एआई मॉडल उपलब्ध कराए गए हैं। मार्च 2026 तक भारत में लगभग 1.8 लाख स्टार्टअप सक्रिय हैं, जिनमें से 89 प्रतिशत किसी न किसी रूप में एआई तकनीक का उपयोग कर रहे हैं।
डेटा सेंटर क्षमता के मोर्चे पर भी उल्लेखनीय प्रगति हुई है। 2020 में देश की डेटा सेंटर क्षमता लगभग 375 मेगावाट थी, जो 2025 तक 1,500 मेगावाट तक पहुँचने का अनुमान है। मुंबई, नवी मुंबई, हैदराबाद, बेंगलुरु, नोएडा और जामनगर प्रमुख डेटा सेंटर हब के रूप में उभर रहे हैं, जबकि गुजरात, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और आंध्र प्रदेश में बड़े हाइपरस्केल और एआई-केंद्रित डेटा सेंटर विकसित हो रहे हैं। यह विस्तार भारत को वैश्विक क्लाउड और एआई अवसंरचना के एक अपरिहार्य केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक निर्णायक कदम है।