12 अगस्त 2026
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एयलॉन लेवी का बड़ा बयान: 'इस्लामिक नाटो' से साबित, पाकिस्तान निष्पक्ष मध्यस्थ नहीं

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एयलॉन लेवी का बड़ा बयान: 'इस्लामिक नाटो' से साबित, पाकिस्तान निष्पक्ष मध्यस्थ नहीं

सारांश

इजरायल के पूर्व प्रवक्ता एयलॉन लेवी ने नई दिल्ली में दो-टूक कहा — सऊदी-पाक-तुर्किए का 'इस्लामिक नाटो' पाकिस्तान को मध्यस्थता के अयोग्य ठहराता है, और हमास से हथियार छुड़ाने की उम्मीद रखना बुनियादी गलतफहमी है।

मुख्य बातें

इजरायल के पूर्व राष्ट्रीय प्रवक्ता एयलॉन लेवी ने 11 अगस्त को नई दिल्ली में बयान दिया।
लेवी के अनुसार सऊदी अरब-पाकिस्तान-तुर्किए के रक्षा समझौते से सिद्ध होता है कि पाकिस्तान निष्पक्ष मध्यस्थ नहीं हो सकता।
हमास कभी स्वेच्छा से हथियार नहीं छोड़ेगा — इस पर आधारित कोई भी योजना गलतफहमी पर टिकी है: लेवी।
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा मुहम्मद आसिफ के 'इजरायल कैंसर है' वाले कथित बयान का उन्होंने विशेष रूप से उल्लेख किया।
लेवी ने इस गठजोड़ को तुर्किए की ड्रोन तकनीक, सऊदी की ऊर्जा और पाकिस्तान की परमाणु क्षमता का संयोजन बताया।

इजरायल के पूर्व राष्ट्रीय प्रवक्ता एयलॉन लेवी ने 11 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में दिए एक बयान में कहा कि सऊदी अरब-पाकिस्तान-तुर्किए के बीच बने रक्षा समझौते — जिसे 'इस्लामिक नाटो' कहा जा रहा है — से यह स्पष्ट हो जाता है कि पाकिस्तान किसी भी संघर्ष में निष्पक्ष मध्यस्थ की भूमिका नहीं निभा सकता। उन्होंने यह भी कहा कि हमास से स्वेच्छा से हथियार छोड़ने की उम्मीद रखना एक बुनियादी गलतफहमी है।

हमास पर लेवी का स्पष्ट रुख

लेवी ने कहा, 'कोई भी यह नहीं मानता कि हमास अपनी मर्जी से हथियार छोड़ देगा और यह एक गलतफहमी है कि हमास से ऐसा करने की उम्मीद करने वाला प्लान बनाया जाए। हमास ने यह साफ कर दिया है कि वह अपने हथियार नहीं छोड़ना चाहता और उनका इस्तेमाल इजरायल को गाजा से वापस जाने के लिए मजबूर करने के लिए करना चाहता है।' उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि इजरायल कभी भी उस संगठन को — जिसने 7 अक्टूबर को हमला किया था — अपनी सीमा के निकट पुनः स्थापित नहीं होने देगा।

इस्लामिक नाटो और पाकिस्तान की भूमिका

सऊदी अरब-पाकिस्तान-तुर्किए के रक्षा समझौते पर टिप्पणी करते हुए लेवी ने कहा, 'इस्लामिक नाटो बनने से यह बहुत साफ हो गया है कि पाकिस्तान कोई निष्पक्ष मध्यस्थ नहीं है। यह इस इलाके के दूसरे कट्टरपंथी तत्वों के साथ मिलकर काम कर रहा है।' उनके अनुसार यह गठजोड़ पूरक सामरिक क्षमताओं को एकत्रित करता है — अरब जगत की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था सऊदी अरब, यूरोप की सबसे बड़ी थल सेना वाला तुर्किए, और मुस्लिम जगत की एकमात्र परमाणु शक्ति पाकिस्तान

पाकिस्तानी रक्षा मंत्री के बयान का संदर्भ

लेवी ने पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा मुहम्मद आसिफ के उस बयान का उल्लेख किया जिसमें उन्होंने कथित तौर पर इजरायल को 'कैंसर' बताया था, यहूदियों के बारे में आपत्तिजनक टिप्पणी की थी, और इस्लामिक दुनिया को इजरायल के विरुद्ध एकजुट होने का आह्वान किया था। लेवी ने इन बयानों को पाकिस्तान की मध्यस्थ के रूप में अयोग्यता के प्रमाण के रूप में प्रस्तुत किया।

गठजोड़ की सामरिक ताकत पर विश्लेषण

लेवी के अनुसार इस त्रिपक्षीय समझौते में तुर्किए की ड्रोन तकनीक, सऊदी अरब की ऊर्जा आपूर्ति क्षमता, और पाकिस्तान के परमाणु हथियार तथा — उनके शब्दों में — 'आतंकवादी समूहों का समर्थन' शामिल है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब मध्य-पूर्व में तनाव चरम पर है और गाजा संघर्ष विराम वार्ता अनिश्चितता के दौर में है।

आगे की स्थिति

गौरतलब है कि लेवी का यह बयान भारत दौरे के दौरान आया, जो स्वयं पाकिस्तान के साथ जटिल संबंधों में है। विश्लेषकों के अनुसार इस्लामिक नाटो की अवधारणा अभी औपचारिक संधि का रूप नहीं ले पाई है, लेकिन तीनों देशों के बीच बढ़ती रक्षा सहयोग की प्रवृत्ति क्षेत्रीय शक्ति-संतुलन को प्रभावित कर सकती है। इजरायल-हमास युद्धविराम वार्ता और मध्यस्थता की दिशा आने वाले हफ्तों में और स्पष्ट होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेवी इसे एक स्थापित खतरे के रूप में प्रस्तुत करते हैं — जो उनके देश के हित में एक स्पष्ट कथा-निर्माण है। मुख्यधारा की कवरेज जो अक्सर चूकती है वह यह है कि पाकिस्तान की 'मध्यस्थता' की क्षमता पर सवाल उठाना इजरायल की उस रणनीति का हिस्सा है जो किसी भी तीसरे पक्ष की भूमिका को सीमित करना चाहती है। ख्वाजा आसिफ के बयानों का चयनात्मक उद्धरण इस कथा को पुष्ट करता है, लेकिन पूरे क्षेत्रीय संदर्भ को नहीं दर्शाता।
RashtraPress
12 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एयलॉन लेवी कौन हैं और उनका बयान क्यों अहम है?
एयलॉन लेवी इजरायल के पूर्व राष्ट्रीय प्रवक्ता हैं जो गाजा युद्ध के दौरान इजरायली सरकार का आधिकारिक पक्ष रखते थे। उनका बयान इसलिए अहम है क्योंकि यह भारत दौरे के दौरान दिया गया और पाकिस्तान की मध्यस्थ भूमिका पर सीधा प्रश्न उठाता है।
'इस्लामिक नाटो' क्या है जिसका लेवी ने जिक्र किया?
सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किए के बीच बढ़ते रक्षा सहयोग को कुछ विश्लेषक 'इस्लामिक नाटो' कह रहे हैं। लेवी के अनुसार यह गठजोड़ तीनों देशों की पूरक सामरिक क्षमताओं — ऊर्जा, थल सेना और परमाणु शक्ति — को एकत्रित करता है।
पाकिस्तान को निष्पक्ष मध्यस्थ क्यों नहीं माना जा सकता — लेवी का तर्क क्या है?
लेवी का तर्क है कि इस्लामिक नाटो में पाकिस्तान की सक्रिय भागीदारी और रक्षा मंत्री ख्वाजा मुहम्मद आसिफ के इजरायल-विरोधी कथित बयान यह सिद्ध करते हैं कि पाकिस्तान एक पक्षधर देश है, न कि तटस्थ। ऐसे में उसकी मध्यस्थ भूमिका विश्वसनीय नहीं हो सकती।
हमास के हथियारों पर इजरायल का क्या रुख है?
लेवी के अनुसार इजरायल का स्पष्ट रुख है कि हमास स्वेच्छा से कभी हथियार नहीं छोड़ेगा। हमास ने खुद स्पष्ट किया है कि वह अपने हथियारों का उपयोग इजरायल को गाजा से हटाने के लिए करना चाहता है, इसलिए इस आधार पर कोई भी शांति योजना बनाना व्यर्थ है।
ख्वाजा मुहम्मद आसिफ ने इजरायल के बारे में क्या कहा था?
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा मुहम्मद आसिफ ने कथित तौर पर इजरायल को 'कैंसर' बताया था और इस्लामिक दुनिया को इजरायल के खिलाफ एकजुट होने का आह्वान किया था। लेवी ने इन बयानों को पाकिस्तान की मध्यस्थ के रूप में अयोग्यता के प्रमाण के रूप में उद्धृत किया।
राष्ट्र प्रेस
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