एयलॉन लेवी का बड़ा बयान: 'इस्लामिक नाटो' से साबित, पाकिस्तान निष्पक्ष मध्यस्थ नहीं
सारांश
मुख्य बातें
इजरायल के पूर्व राष्ट्रीय प्रवक्ता एयलॉन लेवी ने 11 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में दिए एक बयान में कहा कि सऊदी अरब-पाकिस्तान-तुर्किए के बीच बने रक्षा समझौते — जिसे 'इस्लामिक नाटो' कहा जा रहा है — से यह स्पष्ट हो जाता है कि पाकिस्तान किसी भी संघर्ष में निष्पक्ष मध्यस्थ की भूमिका नहीं निभा सकता। उन्होंने यह भी कहा कि हमास से स्वेच्छा से हथियार छोड़ने की उम्मीद रखना एक बुनियादी गलतफहमी है।
हमास पर लेवी का स्पष्ट रुख
लेवी ने कहा, 'कोई भी यह नहीं मानता कि हमास अपनी मर्जी से हथियार छोड़ देगा और यह एक गलतफहमी है कि हमास से ऐसा करने की उम्मीद करने वाला प्लान बनाया जाए। हमास ने यह साफ कर दिया है कि वह अपने हथियार नहीं छोड़ना चाहता और उनका इस्तेमाल इजरायल को गाजा से वापस जाने के लिए मजबूर करने के लिए करना चाहता है।' उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि इजरायल कभी भी उस संगठन को — जिसने 7 अक्टूबर को हमला किया था — अपनी सीमा के निकट पुनः स्थापित नहीं होने देगा।
इस्लामिक नाटो और पाकिस्तान की भूमिका
सऊदी अरब-पाकिस्तान-तुर्किए के रक्षा समझौते पर टिप्पणी करते हुए लेवी ने कहा, 'इस्लामिक नाटो बनने से यह बहुत साफ हो गया है कि पाकिस्तान कोई निष्पक्ष मध्यस्थ नहीं है। यह इस इलाके के दूसरे कट्टरपंथी तत्वों के साथ मिलकर काम कर रहा है।' उनके अनुसार यह गठजोड़ पूरक सामरिक क्षमताओं को एकत्रित करता है — अरब जगत की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था सऊदी अरब, यूरोप की सबसे बड़ी थल सेना वाला तुर्किए, और मुस्लिम जगत की एकमात्र परमाणु शक्ति पाकिस्तान।
पाकिस्तानी रक्षा मंत्री के बयान का संदर्भ
लेवी ने पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा मुहम्मद आसिफ के उस बयान का उल्लेख किया जिसमें उन्होंने कथित तौर पर इजरायल को 'कैंसर' बताया था, यहूदियों के बारे में आपत्तिजनक टिप्पणी की थी, और इस्लामिक दुनिया को इजरायल के विरुद्ध एकजुट होने का आह्वान किया था। लेवी ने इन बयानों को पाकिस्तान की मध्यस्थ के रूप में अयोग्यता के प्रमाण के रूप में प्रस्तुत किया।
गठजोड़ की सामरिक ताकत पर विश्लेषण
लेवी के अनुसार इस त्रिपक्षीय समझौते में तुर्किए की ड्रोन तकनीक, सऊदी अरब की ऊर्जा आपूर्ति क्षमता, और पाकिस्तान के परमाणु हथियार तथा — उनके शब्दों में — 'आतंकवादी समूहों का समर्थन' शामिल है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब मध्य-पूर्व में तनाव चरम पर है और गाजा संघर्ष विराम वार्ता अनिश्चितता के दौर में है।
आगे की स्थिति
गौरतलब है कि लेवी का यह बयान भारत दौरे के दौरान आया, जो स्वयं पाकिस्तान के साथ जटिल संबंधों में है। विश्लेषकों के अनुसार इस्लामिक नाटो की अवधारणा अभी औपचारिक संधि का रूप नहीं ले पाई है, लेकिन तीनों देशों के बीच बढ़ती रक्षा सहयोग की प्रवृत्ति क्षेत्रीय शक्ति-संतुलन को प्रभावित कर सकती है। इजरायल-हमास युद्धविराम वार्ता और मध्यस्थता की दिशा आने वाले हफ्तों में और स्पष्ट होगी।