अमेरिका-ईरान मध्यस्थता में पाकिस्तान की भूमिका पर सवाल, ऑस्ट्रेलिया टुडे की रिपोर्ट में बड़ा दावा
सारांश
मुख्य बातें
इस्लामाबाद की अमेरिका-ईरान परमाणु वार्ता में 'केंद्रीय मध्यस्थ' की छवि को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं। ऑस्ट्रेलिया टुडे की एक हालिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पाकिस्तान की यह कूटनीतिक छवि काफी हद तक एक सुनियोजित प्रचार अभियान का नतीजा है, न कि ज़मीनी कूटनीतिक उपलब्धियों का। रिपोर्ट के अनुसार, इस कथित भूमिका के कई प्रमुख पहलू व्यवहार में साकार होने में नाकाम रहे।
वाशिंगटन में पेड लॉबिंग का आरोप
रिपोर्टों के अनुसार, वाशिंगटन में पाकिस्तान की मौजूदा कूटनीतिक स्थिति को काफी समय से पाकिस्तानी सैन्य प्रतिष्ठान की 'पेड लॉबिंग' का परिणाम माना जाता रहा है। ड्रॉपसाइट न्यूज़ की कवरेज का हवाला देते हुए ऑस्ट्रेलिया टुडे ने कहा कि बाहर से जो तस्वीर पेश की गई — बढ़ते कूटनीतिक प्रभाव की — वह वास्तव में 'अंदरूनी राजनीतिक इंजीनियरिंग, बदलते गठबंधनों और बाहरी रणनीतिक स्थिति-निर्माण' की जटिल सच्चाई से मेल नहीं खाती।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि यह कोई अकेली घटना नहीं है, बल्कि एक बड़े रुझान का हिस्सा है जिसमें पाकिस्तान के संदिग्ध सुरक्षा तंत्र ने वाशिंगटन और पश्चिमी मीडिया में अपनी पसंद की कहानियाँ गढ़ने की क्षमता को और पैना किया है — जबकि वास्तविक कूटनीतिक नतीजे अभी भी अनिश्चित बने हुए हैं।
इमरान खान की बर्खास्तगी: एक निर्णायक मोड़
ड्रॉपसाइट न्यूज़ के हवाले से रिपोर्ट में बताया गया कि पाकिस्तान यहाँ तक कैसे पहुँचा, इसे समझने के लिए अमेरिका-पाकिस्तान संबंधों के लंबे इतिहास को देखना होगा — जिसमें 'बदलती रणनीतिक जरूरतें, नागरिक शासन में सैन्य हस्तक्षेप और तालमेल व मनमुटाव के बार-बार आने वाले चक्र' शामिल हैं।
2022 में पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को सत्ता से हटाना एक अहम मोड़ साबित हुआ। इसके बाद पाकिस्तान की विदेश नीति पश्चिमी साझेदारों के साथ विश्वास बहाल करने और चीन तथा खाड़ी देशों के साथ व्यावहारिक संबंध बनाए रखने के दोहरे लक्ष्य पर केंद्रित हो गई।
चीन-पाकिस्तान संबंधों में दरार
रिपोर्ट में यह भी रेखांकित किया गया कि तथाकथित 'ऑल-वेदर' मित्र माने जाने वाले चीन और पाकिस्तान के संबंधों में तनाव स्पष्ट रूप से दिखने लगा है। बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) के तहत महत्वपूर्ण परियोजनाओं में देरी, सुरक्षा चिंताओं और कर्ज़ चुकाने के विवादों ने इस खटास को और बढ़ाया है।
इस पृष्ठभूमि में, इस्लामाबाद को वाशिंगटन में अपनी प्रासंगिकता साबित करने की और अधिक ज़रूरत महसूस हुई — और अमेरिका-ईरान मध्यस्थता की भूमिका इसी रणनीति का हिस्सा प्रतीत होती है।
भीड़-भरे मध्यस्थता परिदृश्य में पाकिस्तान
ऑस्ट्रेलिया टुडे की रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से कहा गया: 'इस पृष्ठभूमि में, अमेरिका-ईरान कूटनीति में एक केंद्रीय मध्यस्थ के रूप में पाकिस्तान की छवि किसी बेमिसाल कूटनीतिक सफलता से अधिक, ओमान, तुर्किए, सऊदी अरब और चीन जैसे प्रतिस्पर्धी देशों से भरे मध्यस्थता परिदृश्य में भू-राजनीतिक दृश्यता हासिल करने की एक बड़ी कोशिश का हिस्सा लगती है।'
आलोचकों का कहना है कि जब तक ठोस और सत्यापन-योग्य कूटनीतिक परिणाम सामने नहीं आते, पाकिस्तान की यह 'मध्यस्थ' छवि एक कुशलता से गढ़ी गई कथा से अधिक कुछ नहीं है। आने वाले हफ्ते बताएँगे कि इस्लामाबाद की यह रणनीतिक पुनर्स्थापना वास्तव में कितनी टिकाऊ है।