मिशन कर्मयोगी में उत्तर प्रदेश अव्वल: डॉ. जितेंद्र सिंह ने लखनऊ में बताया यूपी क्यों है देश का रोल मॉडल
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने 23 अक्टूबर 2026 को लखनऊ में आयोजित उत्तर क्षेत्रीय कार्यशाला में घोषित किया कि उत्तर प्रदेश ने मिशन कर्मयोगी के तहत देश में प्रथम स्थान प्राप्त कर प्रशासनिक सुधारों और क्षमता विकास में राष्ट्रीय नेतृत्व स्थापित किया है। उन्होंने कहा कि आई-गॉट कर्मयोगी प्लेटफॉर्म पर उत्तर प्रदेश के 19 लाख से अधिक कार्मिकों का पंजीकरण और सर्वाधिक प्रशिक्षण पाठ्यक्रम पूरे करना प्रदेश की असाधारण उपलब्धि है।
मुख्य घटनाक्रम
लखनऊ में आयोजित उत्तर क्षेत्रीय कार्यशाला में आठ राज्यों और चार केंद्रशासित प्रदेशों की भागीदारी रही। कार्यशाला में आधुनिक प्रशिक्षण पद्धतियाँ अपनाने और प्रशिक्षण संस्थानों की क्षमता बढ़ाने पर विशेष ज़ोर दिया गया। डॉ. जितेंद्र सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यूपी प्रशासन का सहयोग और मुख्यमंत्री की व्यक्तिगत रुचि कार्यक्रमों की सफलता में निर्णायक भूमिका निभाती है।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2014 से केंद्र सरकार ने राजपत्रित अधिकारियों से दस्तावेज़ सत्यापन की अनिवार्यता समाप्त करने और भर्ती प्रक्रिया में साक्षात्कार व्यवस्था हटाने जैसे सुधार किए, ताकि चयन में भेदभाव की आशंकाएँ कम हों।
आई-गॉट कर्मयोगी पर उत्तर प्रदेश की उपलब्धियाँ
देशभर में आई-गॉट कर्मयोगी प्लेटफॉर्म पर लगभग 1.70 करोड़ कार्मिक पंजीकृत हैं, जिनमें से उत्तर प्रदेश के 19 लाख से अधिक उपयोगकर्ता शामिल हैं। मुख्य सचिव एस.पी. गोयल ने बताया कि प्रदेश में ई-पोर्टल के माध्यम से लगभग 3.75 करोड़ पाठ्यक्रम पूर्ण किए गए हैं और कुल 47 करोड़ से अधिक लर्निंग आवर्स दर्ज किए गए हैं।
गौरतलब है कि उन्नति पोर्टल पर यूपी के 350 से अधिक प्रशिक्षण संस्थान एवं प्रशिक्षण इकाइयाँ पंजीकृत हो चुकी हैं, जो देश में सर्वाधिक हैं। प्रदेश में योग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे विषयों पर बड़ी संख्या में प्रशिक्षण पाठ्यक्रम भी पूरे किए गए हैं।
प्रशासनिक सुधारों की दिशा
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि प्रशासन में 'रूल बेस्ड' दृष्टिकोण से आगे बढ़कर 'रोल बेस्ड' कार्यप्रणाली अपनाना समय की माँग है। मिशन कर्मयोगी और आई-गॉट कर्मयोगी प्लेटफॉर्म इसी सोच को ज़मीन पर उतारने के साधन हैं। उन्होंने रोज़गार मेले, केंद्रीयकृत लोक शिकायत निवारण एवं निगरानी प्रणाली (CPGRAMS) और डिजिटल जीवन प्रमाणपत्र जैसी पहलों का भी उल्लेख किया, जिनमें बायोमेट्रिक और फेस रिकग्निशन तकनीक के इस्तेमाल से पेंशनभोगियों को सीधा लाभ मिला है।
क्षमता निर्माण आयोग का दृष्टिकोण
क्षमता निर्माण आयोग की अध्यक्ष एस. राधा चौहान ने कहा कि 'विकसित भारत' के लक्ष्य को पाने के लिए सक्षम, दक्ष और नागरिक-केंद्रित सिविल सेवाओं का निर्माण अनिवार्य है। उन्होंने बताया कि अप्रैल में आयोजित साधना सप्ताह के दौरान उन्नति अभियान, कर्मयोगी कर्तव्य कार्यक्रम और कर्मयोगी क्वालिटी फ्रेमवर्क जैसी पहलें शुरू की गईं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि कर्मयोगी कर्तव्य कार्यक्रम विशेष रूप से अग्रिम पंक्ति के कर्मचारियों में सेवा भाव विकसित करने पर केंद्रित है, जबकि क्वालिटी फ्रेमवर्क का उद्देश्य प्रशिक्षण की समग्र गुणवत्ता सुनिश्चित करना है।
आगे की राह
मुख्य सचिव एस.पी. गोयल ने कहा कि शासन की योजनाओं की सफलता उनकी संख्या से नहीं, बल्कि इस बात से तय होती है कि उनका लाभ आम नागरिकों तक कितनी प्रभावी, पारदर्शी और समान रूप से पहुँच रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशों के अनुरूप प्रशासन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और नई तकनीकों के उपयोग को और अधिक बढ़ावा देने की योजना है। यह ऐसे समय में आया है जब देश के अन्य राज्य भी प्रशासनिक क्षमता सुधार की दिशा में उत्तर प्रदेश के अनुभव से सीखने की कोशिश कर रहे हैं।