सीएम योगी का बड़ा ऐलान: उपाम बनेगा AI सेंटर, नागरिक संतुष्टि होगी लोकसेवक का रिपोर्ट कार्ड
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 23 अक्टूबर 2026 को लखनऊ के लोकभवन में स्पष्ट किया कि जब तक कोई बुज़ुर्ग, किसान, महिला या ज़रूरतमंद नागरिक सरकारी कार्यालयों के चक्कर काटता रहे, तब तक लोक सेवा का असली उद्देश्य पूरा नहीं होता। उन्होंने कहा कि नागरिक संतुष्टि ही किसी भी लोकसेवक का सच्चा रिपोर्ट कार्ड है। मिशन कर्मयोगी के अंतर्गत 'साधना श्रृंखला' की उत्तरी क्षेत्रीय कार्यशाला को संबोधित करते हुए उन्होंने तीन अहम पहलों की घोषणा की।
तीन प्रमुख घोषणाएँ
मुख्यमंत्री ने कार्यशाला में तीन महत्वपूर्ण निर्णयों का ऐलान किया। पहला — डॉ. राम मनोहर लोहिया उत्तर प्रदेश प्रशासन एवं प्रबंधन अकादमी (उपाम) को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित किया जाएगा। दूसरा — ग्राम पंचायतों, नगर पंचायतों, नगर पालिका परिषदों और नगर निगमों के कार्मिकों की क्षमता विकास पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। तीसरा — 'राइट पर्सन फॉर द राइट रोल' की अवधारणा को व्यावहारिक रूप दिया जाएगा, जिसमें अधिकारियों और कर्मचारियों की उपलब्धियों तथा कार्य-प्रदर्शन को वार्षिक गोपनीय आख्या (ACR) और पदोन्नति से जोड़ा जाएगा।
'ऑफिस-ऑफिस' वाली व्यवस्था पर तीखा प्रहार
योगी ने लोकप्रिय व्यंग्य धारावाहिक 'ऑफिस-ऑफिस' का संदर्भ देते हुए कहा कि एक सामान्य काम के लिए नागरिक का विभिन्न कार्यालयों में भटकना पूरे प्रशासनिक तंत्र पर सवाल उठाता है। उन्होंने कहा कि समस्याओं को जानबूझकर लटकाना और जानकारी के अभाव में समाधान न दे पाना — दोनों स्थितियाँ प्रशासन के लिए गंभीर हैं। उनके अनुसार, कर्मचारी अक्सर अपने अधिकारों और पदोन्नति को लेकर सजग रहते हैं, परंतु दायित्वों के प्रति अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखाते।
गोरखपुर सड़क निर्माण का व्यावहारिक उदाहरण
मुख्यमंत्री ने गोरखपुर में एक सड़क चौड़ीकरण परियोजना का उदाहरण दिया। उन्होंने बताया कि उन्होंने एक सड़क को दो लेन से चार लेन बनाने के निर्देश दिए थे, किंतु अभियंताओं ने उसे ज़मीन से लगभग तीन मीटर ऊँचा उठा दिया। इससे आसपास की घनी आबादी का आवागमन बाधित हो गया। शिकायत मिलने पर वह स्वयं मौके पर पहुँचे और सुधार के निर्देश दिए। उन्होंने इससे यह संदेश दिया कि डिग्री और नियुक्ति पत्र किसी को स्वतः सक्षम अधिकारी नहीं बना देते — परिस्थितियों के अनुरूप निर्णय लेने की क्षमता और नागरिकों की ज़रूरत को समझना भी उतना ही ज़रूरी है।
मिशन कर्मयोगी और उत्तर प्रदेश की उपलब्धि
इस कार्यशाला का आयोजन उपाम और भारत सरकार के क्षमता विकास आयोग के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। इसमें 8 राज्यों और 4 केंद्र शासित प्रदेशों के अधिकारी एवं प्रतिनिधि शामिल हुए। योगी ने बताया कि उत्तर प्रदेश के 19.26 लाख से अधिक सरकारी कार्मिक iGOT कर्मयोगी पोर्टल पर पंजीकृत हैं और अब तक लगभग चार करोड़ प्रशिक्षण पाठ्यक्रम पूरे किए जा चुके हैं। प्रदेश के 334 से अधिक प्रशिक्षण संस्थान उन्नति पोर्टल से जुड़े हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि प्रशिक्षण की सफलता महज़ आँकड़ों से नहीं, बल्कि बेहतर निर्णयों, सरल प्रक्रियाओं और बेहतर जनसेवाओं से मापी जानी चाहिए।
क्या होगा आगे
क्षमता विकास आयोग की अध्यक्ष एस. राधा चौहान के साथ मिलकर उपाम को आधुनिक तकनीक और क्षमता विकास के केंद्र के रूप में आकार दिया जाएगा। उत्तर प्रदेश पहले ही 36 सेक्टोरल नीतियाँ तैयार कर नीतिगत ठहराव से बाहर निकल चुका है। मुख्यमंत्री के अनुसार, विकसित भारत का लक्ष्य केवल बेहतर नीतियों से नहीं, बल्कि उन्हें प्रभावी ढंग से लागू करने वाले सक्षम, संवेदनशील और परिणामोन्मुखी प्रशासन से हासिल होगा।