23 अक्टूबर 2026
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सीएम योगी का बड़ा ऐलान: उपाम बनेगा AI सेंटर, नागरिक संतुष्टि होगी लोकसेवक का रिपोर्ट कार्ड

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सीएम योगी का बड़ा ऐलान: उपाम बनेगा AI सेंटर, नागरिक संतुष्टि होगी लोकसेवक का रिपोर्ट कार्ड

सारांश

योगी आदित्यनाथ ने 'ऑफिस-ऑफिस' की परंपरा पर सीधा प्रहार करते हुए कहा — नागरिक संतुष्टि ही असली रिपोर्ट कार्ड है। उपाम को AI हब बनाने, पंचायत कर्मियों को प्रशिक्षित करने और ACR को प्रदर्शन से जोड़ने की तीन घोषणाएँ UP प्रशासन में बड़े बदलाव का संकेत हैं।

मुख्य बातें

सीएम योगी आदित्यनाथ ने 23 अक्टूबर 2026 को लोकभवन, लखनऊ में मिशन कर्मयोगी की 'साधना श्रृंखला' उत्तरी क्षेत्रीय कार्यशाला को संबोधित किया।
राम मनोहर लोहिया उपाम को AI सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित किया जाएगा।
अधिकारियों की उपलब्धियाँ और कार्य-प्रदर्शन ACR तथा पदोन्नति से जोड़े जाएंगे।
उत्तर प्रदेश के 19.26 लाख से अधिक कार्मिक iGOT पोर्टल पर पंजीकृत; अब तक लगभग चार करोड़ पाठ्यक्रम पूर्ण।
कार्यशाला में 8 राज्यों और 4 केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधि सम्मिलित हुए।
प्रदेश में 36 सेक्टोरल नीतियाँ तैयार; 334 से अधिक प्रशिक्षण संस्थान उन्नति पोर्टल से जुड़े।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 23 अक्टूबर 2026 को लखनऊ के लोकभवन में स्पष्ट किया कि जब तक कोई बुज़ुर्ग, किसान, महिला या ज़रूरतमंद नागरिक सरकारी कार्यालयों के चक्कर काटता रहे, तब तक लोक सेवा का असली उद्देश्य पूरा नहीं होता। उन्होंने कहा कि नागरिक संतुष्टि ही किसी भी लोकसेवक का सच्चा रिपोर्ट कार्ड है। मिशन कर्मयोगी के अंतर्गत 'साधना श्रृंखला' की उत्तरी क्षेत्रीय कार्यशाला को संबोधित करते हुए उन्होंने तीन अहम पहलों की घोषणा की।

तीन प्रमुख घोषणाएँ

मुख्यमंत्री ने कार्यशाला में तीन महत्वपूर्ण निर्णयों का ऐलान किया। पहला — डॉ. राम मनोहर लोहिया उत्तर प्रदेश प्रशासन एवं प्रबंधन अकादमी (उपाम) को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित किया जाएगा। दूसरा — ग्राम पंचायतों, नगर पंचायतों, नगर पालिका परिषदों और नगर निगमों के कार्मिकों की क्षमता विकास पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। तीसरा — 'राइट पर्सन फॉर द राइट रोल' की अवधारणा को व्यावहारिक रूप दिया जाएगा, जिसमें अधिकारियों और कर्मचारियों की उपलब्धियों तथा कार्य-प्रदर्शन को वार्षिक गोपनीय आख्या (ACR) और पदोन्नति से जोड़ा जाएगा।

'ऑफिस-ऑफिस' वाली व्यवस्था पर तीखा प्रहार

योगी ने लोकप्रिय व्यंग्य धारावाहिक 'ऑफिस-ऑफिस' का संदर्भ देते हुए कहा कि एक सामान्य काम के लिए नागरिक का विभिन्न कार्यालयों में भटकना पूरे प्रशासनिक तंत्र पर सवाल उठाता है। उन्होंने कहा कि समस्याओं को जानबूझकर लटकाना और जानकारी के अभाव में समाधान न दे पाना — दोनों स्थितियाँ प्रशासन के लिए गंभीर हैं। उनके अनुसार, कर्मचारी अक्सर अपने अधिकारों और पदोन्नति को लेकर सजग रहते हैं, परंतु दायित्वों के प्रति अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखाते।

गोरखपुर सड़क निर्माण का व्यावहारिक उदाहरण

मुख्यमंत्री ने गोरखपुर में एक सड़क चौड़ीकरण परियोजना का उदाहरण दिया। उन्होंने बताया कि उन्होंने एक सड़क को दो लेन से चार लेन बनाने के निर्देश दिए थे, किंतु अभियंताओं ने उसे ज़मीन से लगभग तीन मीटर ऊँचा उठा दिया। इससे आसपास की घनी आबादी का आवागमन बाधित हो गया। शिकायत मिलने पर वह स्वयं मौके पर पहुँचे और सुधार के निर्देश दिए। उन्होंने इससे यह संदेश दिया कि डिग्री और नियुक्ति पत्र किसी को स्वतः सक्षम अधिकारी नहीं बना देते — परिस्थितियों के अनुरूप निर्णय लेने की क्षमता और नागरिकों की ज़रूरत को समझना भी उतना ही ज़रूरी है।

मिशन कर्मयोगी और उत्तर प्रदेश की उपलब्धि

इस कार्यशाला का आयोजन उपाम और भारत सरकार के क्षमता विकास आयोग के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। इसमें 8 राज्यों और 4 केंद्र शासित प्रदेशों के अधिकारी एवं प्रतिनिधि शामिल हुए। योगी ने बताया कि उत्तर प्रदेश के 19.26 लाख से अधिक सरकारी कार्मिक iGOT कर्मयोगी पोर्टल पर पंजीकृत हैं और अब तक लगभग चार करोड़ प्रशिक्षण पाठ्यक्रम पूरे किए जा चुके हैं। प्रदेश के 334 से अधिक प्रशिक्षण संस्थान उन्नति पोर्टल से जुड़े हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि प्रशिक्षण की सफलता महज़ आँकड़ों से नहीं, बल्कि बेहतर निर्णयों, सरल प्रक्रियाओं और बेहतर जनसेवाओं से मापी जानी चाहिए।

क्या होगा आगे

क्षमता विकास आयोग की अध्यक्ष एस. राधा चौहान के साथ मिलकर उपाम को आधुनिक तकनीक और क्षमता विकास के केंद्र के रूप में आकार दिया जाएगा। उत्तर प्रदेश पहले ही 36 सेक्टोरल नीतियाँ तैयार कर नीतिगत ठहराव से बाहर निकल चुका है। मुख्यमंत्री के अनुसार, विकसित भारत का लक्ष्य केवल बेहतर नीतियों से नहीं, बल्कि उन्हें प्रभावी ढंग से लागू करने वाले सक्षम, संवेदनशील और परिणामोन्मुखी प्रशासन से हासिल होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल क्रियान्वयन का है। 19.26 लाख कार्मिकों के iGOT पंजीकरण और चार करोड़ पाठ्यक्रमों के बावजूद यदि ज़मीनी सेवाओं में सुधार मापने योग्य नहीं है, तो आँकड़े केवल दिखावे तक सीमित रहेंगे। ACR को नागरिक-सेवा प्रदर्शन से जोड़ना एक सकारात्मक संरचनात्मक कदम है — परंतु इसकी सफलता निष्पक्ष मूल्यांकन तंत्र पर निर्भर करेगी, जो भारतीय नौकरशाही में ऐतिहासिक रूप से कमज़ोर रहा है। गोरखपुर सड़क का उदाहरण बताता है कि व्यक्तिगत हस्तक्षेप तो हो सकता है, लेकिन संस्थागत जवाबदेही के बिना हर मामले में मुख्यमंत्री मौके पर नहीं पहुँच सकते।
RashtraPress
23 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मिशन कर्मयोगी की 'साधना श्रृंखला' कार्यशाला क्या है?
यह उपाम और भारत सरकार के क्षमता विकास आयोग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित एक क्षेत्रीय प्रशिक्षण कार्यशाला है, जिसमें 8 राज्यों और 4 केंद्र शासित प्रदेशों के अधिकारी शामिल हुए। इसका उद्देश्य लोकसेवकों की कार्यक्षमता और जनसेवा की गुणवत्ता बेहतर करना है।
उपाम को AI सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनाने का क्या अर्थ है?
डॉ. राम मनोहर लोहिया उत्तर प्रदेश प्रशासन एवं प्रबंधन अकादमी (उपाम) को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा एनालिटिक्स और डिजिटल तकनीक के प्रशिक्षण केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। इससे सरकारी अधिकारी आधुनिक शासन-तकनीक में दक्ष बन सकेंगे।
ACR को प्रदर्शन से जोड़ने की योजना कैसे काम करेगी?
अधिकारियों और कर्मचारियों की उपलब्धियों, कार्य-प्रदर्शन और 'सक्सेस स्टोरी' को उनकी वार्षिक गोपनीय आख्या (ACR) और पदोन्नति से जोड़ा जाएगा। इसका लक्ष्य 'राइट पर्सन फॉर द राइट रोल' की अवधारणा को व्यावहारिक रूप देना है ताकि योग्यता के अनुरूप ज़िम्मेदारियाँ तय हों।
उत्तर प्रदेश में अब तक मिशन कर्मयोगी के क्या परिणाम रहे हैं?
उत्तर प्रदेश के 19.26 लाख से अधिक सरकारी कार्मिक iGOT कर्मयोगी पोर्टल पर पंजीकृत हैं और अब तक लगभग चार करोड़ प्रशिक्षण पाठ्यक्रम पूरे किए जा चुके हैं। प्रदेश के 334 से अधिक प्रशिक्षण संस्थान उन्नति पोर्टल से जुड़े हैं।
सीएम योगी के अनुसार प्रशिक्षण की सफलता कैसे मापी जाएगी?
योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट किया कि प्रशिक्षण की वास्तविक सफलता प्रमाणपत्रों या पंजीकरण आँकड़ों से नहीं, बल्कि इस आधार पर मापी जानी चाहिए कि प्रशिक्षण के बाद निर्णय कितने बेहतर हुए, प्रक्रियाएँ कितनी सरल हुईं और नागरिकों को कितनी अच्छी सेवा मिली।
राष्ट्र प्रेस
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