योगी आदित्यनाथ बोले- जनता की धारणा बदलना ही सुशासन की असली परीक्षा, UP अब शीर्ष-3 अर्थव्यवस्थाओं में
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 3 जुलाई 2025 को लखनऊ में कहा कि किसी भी सरकार की वास्तविक छवि उसके प्रचार से नहीं, बल्कि जनता की धारणा से तय होती है — और यही धारणा बदलना सुशासन की सबसे बड़ी कसौटी है। वे सीजी सिटी, सुल्तानपुर रोड पर स्थित डॉ. राम मनोहर लोहिया उत्तर प्रदेश प्रशासन एवं प्रबंधन अकादमी के नवनिर्मित परिसर के लोकार्पण समारोह को संबोधित कर रहे थे।
नए परिसर का लोकार्पण
22 एकड़ से अधिक क्षेत्रफल में फैले और लगभग ₹464 करोड़ की लागत से निर्मित इस अत्याधुनिक परिसर को प्रशासनिक प्रशिक्षण का नया केंद्र बताया गया। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर राज्य के अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि प्रशासनिक तंत्र ही सरकार और आमजन के बीच सबसे महत्वपूर्ण सेतु है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि यह सेतु मजबूत हो, तो सरकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक सुनिश्चित रूप से पहुँचता है।
नौ वर्षों की विकास यात्रा
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि 2017 से पहले लगभग दो-तीन दशकों तक उत्तर प्रदेश की पहचान पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा था। उनके अनुसार इसके लिए केवल नौकरशाही नहीं, बल्कि तत्कालीन राजनीतिक नेतृत्व भी जिम्मेदार था, और इसका खामियाजा देश के सबसे अधिक आबादी वाले राज्य तथा राष्ट्रीय विकास दोनों को उठाना पड़ा। उन्होंने दावा किया कि पिछले नौ वर्षों में प्रदेश ने 'पहचान के संकट' से बाहर निकलकर नई कार्यसंस्कृति विकसित की है और अब वह देश की शीर्ष तीन अर्थव्यवस्थाओं में स्थान बनाने की दिशा में अग्रसर है।
तकनीक और पारदर्शिता का उदाहरण
मुख्यमंत्री ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) का उदाहरण देते हुए कहा कि सांसद रहते हुए उन्हें राशन वितरण में गड़बड़ियों की सर्वाधिक शिकायतें मिलती थीं। उन्होंने बताया कि सरकार बनने के बाद ई-पॉस मशीनों के माध्यम से पारदर्शिता लाई गई, जिससे पात्र लाभार्थियों तक राशन पहुँचना सुनिश्चित हुआ और शिकायतों में उल्लेखनीय कमी आई। उन्होंने कहा कि गरीब का हक छीनने की प्रवृत्ति पर अंकुश लगाना सरकार की प्राथमिकता रही है।
टीमवर्क और सकारात्मक कार्यसंस्कृति का आह्वान
अधिकारियों को संबोधित करते हुए योगी आदित्यनाथ ने कहा कि किसी भी संस्था की सफलता सामूहिक प्रयासों से ही संभव होती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नकारात्मक सोच और व्यक्तिकेंद्रित कार्यशैली बेहतर परिणाम नहीं दे सकती। उनके अनुसार, प्रशासनिक व्यवस्था में नवाचार, अनुभव और सकारात्मक दृष्टिकोण को साथ लेकर चलने से ही एक बेहतर शासन मॉडल विकसित किया जा सकता है।
आगे की राह
यह लोकार्पण ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश सरकार प्रशासनिक क्षमता निर्माण को अपनी प्राथमिकताओं में रख रही है। गौरतलब है कि राज्य में निवेश आकर्षण, कानून-व्यवस्था और बड़े आयोजनों के प्रबंधन को लेकर केंद्र सरकार भी उत्तर प्रदेश को एक मॉडल राज्य के रूप में प्रस्तुत करती रही है। नई अकादमी से प्रशिक्षित अधिकारी इस दिशा में शासन की जमीनी कड़ी बनेंगे, ऐसी उम्मीद जताई जा रही है।