दिल्ली सरकारी स्कूल किताब घोटाला: AAP के सौरभ भारद्वाज का 40% कमीशनखोरी का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
आम आदमी पार्टी (AAP) के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने 23 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में आरोप लगाया कि रेखा गुप्ता सरकार के शिक्षा विभाग द्वारा सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों के लिए छपवाई गई मुफ्त किताबों में कथित तौर पर भारी अनियमितताएँ हुई हैं। भारद्वाज का दावा है कि टेंडर में 80 जीएसएम कागज की शर्त होने के बावजूद वास्तविक छपाई में केवल 60 से 65 जीएसएम का घटिया कागज इस्तेमाल किया गया, जिससे कथित तौर पर लागत में 40 प्रतिशत तक की कमीशनखोरी संभव हुई।
मुख्य आरोप और सबूत
भारद्वाज ने प्रेस वार्ता में कक्षा आठ की एनसीईआरटी की मल्हार पुस्तक के दो संस्करण दिखाए — एक निजी बुक स्टोर से खरीदी गई और दूसरी दिल्ली सरकार की ओर से छपवाई गई। उनके अनुसार, सरकारी किताब का कागज पतला और धूसर रंग का है, जबकि बाज़ार में उपलब्ध एनसीईआरटी की किताब ए-4 आकार और 80 जीएसएम के मानक पर छपी है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकारी किताबों में अक्षरों का आकार इतना छोटा है कि विद्यार्थियों को पढ़ने में कठिनाई हो सकती है। भारद्वाज ने सवाल उठाया कि टेंडर की शर्तों का पालन सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी किस अधिकारी की थी और इस कथित गड़बड़ी में कौन-कौन से लोग शामिल हैं।
सरकार से जवाब की माँग
AAP नेता ने शिक्षा मंत्री आशीष सूद और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता से सीधे सवाल किया कि किताबों की छपाई में कथित 40 प्रतिशत कमीशन किसने लिया। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि सरकारी किताब के पहले पृष्ठ पर मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की तस्वीर छापी गई है, जबकि किताबों की गुणवत्ता बेहद खराब है।
गौरतलब है कि यह आरोप ऐसे समय में आए हैं जब शिक्षा सत्र का आधा समय बीत जाने के बावजूद कई सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों को अभी तक किताबें वितरित नहीं की गई हैं।
भ्रष्टाचार के पुराने आरोपों से जोड़ा
भारद्वाज ने इस मामले को अकेला नहीं बताया। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सरकार आने के बाद दिल्ली में दवाओं, साइकिलों, चावल और दिल्ली जल बोर्ड के टेंडर में भी कथित अनियमितताओं के मामले सामने आ चुके हैं। उनके अनुसार, किताबों की छपाई में भी उसी तरह की कमीशनखोरी होने का संदेह है जैसा साइकिल खरीद मामले में कथित तौर पर हुआ था।
यह ऐसे समय में आया है जब दिल्ली में AAP और BJP के बीच राजनीतिक तनाव चरम पर है और विपक्ष लगातार सत्ताधारी सरकार को सार्वजनिक सेवाओं में कथित लापरवाही के लिए घेर रहा है।
आम जनता और अभिभावकों पर असर
भारद्वाज ने चेताया कि सरकारी स्कूलों में समय पर और अच्छी गुणवत्ता की किताबें न मिलने से अभिभावकों का रुझान निजी स्कूलों की ओर बढ़ सकता है। उन्होंने बताया कि दिल्ली में पिछले वर्ष भी निजी स्कूलों की फीस बढ़ाई गई थी और इस वर्ष भी फीस वृद्धि हुई है, जिससे मध्यमवर्गीय परिवारों पर दोहरी मार पड़ रही है।
उनका तर्क है कि सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता में गिरावट और निजी स्कूलों की बढ़ती फीस एक साथ मिलकर शिक्षा को आम परिवारों के लिए और महंगा बना देती है। इस पर अभी शिक्षा मंत्री आशीष सूद या मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
क्या होगा आगे
AAP ने संकेत दिया है कि वह इस मामले को विधानसभा और अन्य मंचों पर उठाएगी। भारद्वाज ने माँग की है कि टेंडर प्रक्रिया की स्वतंत्र जाँच कराई जाए और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई हो। सरकार की आधिकारिक प्रतिक्रिया और संभावित जाँच आदेश इस विवाद की अगली कड़ी तय करेंगे।