22 सितंबर 2026
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'आप' कार्यालय के पते पर 58 जीएसटी रजिस्ट्रेशन: सौरभ भारद्वाज ने लगाया राजनीतिक साजिश का आरोप

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'आप' कार्यालय के पते पर 58 जीएसटी रजिस्ट्रेशन: सौरभ भारद्वाज ने लगाया राजनीतिक साजिश का आरोप

सारांश

AAP के दिल्ली अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज का बड़ा दावा — पार्टी के राष्ट्रीय कार्यालय के पते पर जुलाई-सितंबर 2026 के बीच 58 जीएसटी रजिस्ट्रेशन हुए। पंजाब चुनाव से पहले शेल कंपनियों और ड्रग तस्करी से जोड़कर बदनाम करने की साजिश का आरोप — जिसकी स्वतंत्र जाँच अभी बाकी है।

मुख्य बातें

सौरभ भारद्वाज ने दावा किया कि 19 जुलाई से 15 सितंबर 2026 के बीच AAP के राष्ट्रीय कार्यालय ( 1, कैनिंग लेन, नई दिल्ली ) के पते पर 58 जीएसटी रजिस्ट्रेशन हुए।
भारद्वाज ने इसे पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले AAP को बदनाम करने की राजनीतिक साजिश बताया — हालाँकि स्वतंत्र जाँच के निष्कर्ष अभी सामने नहीं आए हैं।
रजिस्ट्रेशन में इंपोर्ट-एक्सपोर्ट व्यवसाय दर्ज होने का दावा; विकास चौधरी समेत कई नामों का उल्लेख।
19 सितंबर 2026 को प्रिंसिपल चीफ कमिश्नर जीएसटी, कमिश्नर ऑफ ट्रेड एंड टैक्सेस और दिल्ली पुलिस कमिश्नर को शिकायत दी गई, लेकिन अब तक कोई जवाब नहीं।
भारद्वाज ने 2022 पंजाब चुनाव से पहले खालिस्तान-फंडिंग और दिल्ली चुनाव से पहले शराब घोटाले के आरोपों का भी संदर्भ दिया।

आम आदमी पार्टी (AAP) के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने 22 सितंबर 2026 को आरोप लगाया कि 19 जुलाई से 15 सितंबर 2026 के बीच पार्टी के राष्ट्रीय कार्यालय के पते — 1, कैनिंग लेन, नई दिल्ली — पर 58 अलग-अलग कंपनियों और कारोबारों के जीएसटी रजिस्ट्रेशन कर दिए गए। भारद्वाज ने इसे पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले AAP को बदनाम करने की सुनियोजित साजिश बताते हुए केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं — हालाँकि ये आरोप राजनीतिक स्तर पर लगाए गए हैं और स्वतंत्र जाँच के निष्कर्ष अभी सामने आने बाकी हैं।

मुख्य आरोप और दावे

भारद्वाज के अनुसार, AAP का राष्ट्रीय कार्यालय एक सरकारी आवास पर स्थित है, जहाँ किसी भी निजी व्यावसायिक गतिविधि का संचालन संभव नहीं है। उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसे पते पर 58 जीएसटी रजिस्ट्रेशन किस प्रक्रिया के तहत स्वीकृत हुए और सत्यापन करने वाले अधिकारी कौन थे। उनका कहना है कि जीएसटी रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया में आधार-आधारित ओटीपी सत्यापन के साथ-साथ बिजली-पानी का बिल, रेंट एग्रीमेंट, एनओसी और कई मामलों में कारोबार स्थल का भौतिक सत्यापन भी अनिवार्य होता है।

किन नामों पर हुए रजिस्ट्रेशन

भारद्वाज ने उदाहरण के तौर पर एक जीएसटी नंबर 07एएचकेपीसी920एफ3जेडजे का उल्लेख किया, जिसके तहत लीगल नाम विकास चौधरी और ट्रेड नाम प्रियंका दर्ज बताया गया। इसके अलावा आशा एंटरप्राइजेज, मोहम्मद अहमद, फैजान अहमद, मोहम्मद असद कुरैशी, अफजल, मोहम्मद दिलशाद, साफिया खानम, सीमा परवीन, काशिफ सिद्दीकी, सरफराज और मोहम्मद फैजान सहित कई नामों से रजिस्ट्रेशन होने का दावा किया गया। उनके अनुसार इनमें से कई कारोबारों में इंपोर्ट-एक्सपोर्ट जैसी गतिविधियाँ दर्ज हैं।

कथित राजनीतिक मंशा

भारद्वाज ने आरोप लगाया कि इन रजिस्ट्रेशन का उपयोग यह प्रचारित करने के लिए किया जा सकता था कि AAP सैकड़ों शेल कंपनियाँ चला रही है और इनके ज़रिए ड्रग तस्करों से धन लिया जा रहा है — जिससे पंजाब चुनाव से पहले पार्टी की छवि को नुकसान पहुँचाया जा सके। उन्होंने इसे पिछले चुनावों में अपनाई गई कथित रणनीति का विस्तार बताया। उनके मुताबिक, 2022 के पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले AAP पर खालिस्तानियों से फंड लेने के आरोप लगाए गए थे, और दिल्ली विधानसभा चुनाव से पहले कथित शराब घोटाले को लेकर पार्टी को घेरने का प्रयास किया गया था। भारद्वाज का दावा है कि बाद में अदालती कार्यवाहियों से उन आरोपों को अपेक्षित बल नहीं मिला।

शिकायत और जाँच की माँग

AAP की ओर से 19 सितंबर 2026 को प्रिंसिपल चीफ कमिश्नर जीएसटी, कमिश्नर ऑफ ट्रेड एंड टैक्सेस और नई दिल्ली के पुलिस कमिश्नर को लिखित शिकायत दी गई है। भारद्वाज के अनुसार, शिकायत के तीन दिन बाद भी किसी संबंधित अधिकारी की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। उन्होंने माँग की है कि जाँच में यह स्पष्ट किया जाए कि इन रजिस्ट्रेशन के लिए किस सिस्टम, सर्वर या कंप्यूटर का उपयोग हुआ, किन अधिकारियों ने सत्यापन किया और आधार ओटीपी किसने प्राप्त किया। उनका यह भी कहना है कि इन सभी रजिस्ट्रेशन की तारीखें और अन्य विवरण जीएसटी पोर्टल पर उपलब्ध हैं। इस मामले में केंद्र सरकार और BJP की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया अभी सामने नहीं आई है। आगामी दिनों में यह देखना महत्त्वपूर्ण होगा कि जाँच एजेंसियाँ इस शिकायत पर क्या कार्रवाई करती हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जबकि प्रक्रिया में भौतिक सत्यापन और दस्तावेज़ीकरण अनिवार्य है। राजनीतिक साजिश के आरोप सच हों या न हों, जीएसटी प्रणाली की इस कथित खामी की जाँच लोक हित में ज़रूरी है। गौरतलब है कि हर बड़े चुनाव से पहले विपक्षी दलों — चाहे वे किसी भी रंग के हों — पर इसी तरह के आरोपों का एक स्थापित पैटर्न दिखता है, जो मतदाताओं की राय को प्रभावित करने के लिए डिज़ाइन किए जाते हैं। जब तक जाँच एजेंसियाँ इस शिकायत पर कार्रवाई नहीं करतीं, यह कहना कठिन है कि यह तंत्र की विफलता है, राजनीतिक षड्यंत्र है, या दोनों।
RashtraPress
22 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

AAP कार्यालय के पते पर 58 जीएसटी रजिस्ट्रेशन का दावा क्या है?
सौरभ भारद्वाज के अनुसार, 19 जुलाई से 15 सितंबर 2026 के बीच AAP के राष्ट्रीय कार्यालय — 1, कैनिंग लेन, नई दिल्ली — के पते पर 58 अलग-अलग कंपनियों और व्यक्तियों के नाम पर जीएसटी रजिस्ट्रेशन किए गए। यह पता एक सरकारी आवास पर है जहाँ कोई निजी व्यावसायिक गतिविधि संभव नहीं है।
सौरभ भारद्वाज ने यह मामला किन अधिकारियों के सामने उठाया है?
AAP ने 19 सितंबर 2026 को प्रिंसिपल चीफ कमिश्नर जीएसटी, कमिश्नर ऑफ ट्रेड एंड टैक्सेस और नई दिल्ली के पुलिस कमिश्नर को लिखित शिकायत दी है। भारद्वाज के अनुसार, तीन दिन बाद भी किसी अधिकारी की ओर से कोई जवाब नहीं आया है।
इन जीएसटी रजिस्ट्रेशन को राजनीतिक साजिश क्यों बताया जा रहा है?
भारद्वाज का आरोप है कि इन रजिस्ट्रेशन का उपयोग पंजाब चुनाव से पहले AAP को शेल कंपनियों और ड्रग तस्करी से जोड़कर बदनाम करने के लिए किया जा सकता था। हालाँकि यह आरोप राजनीतिक स्तर पर लगाया गया है और इसकी स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
जीएसटी रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया में क्या सत्यापन होता है?
जीएसटी रजिस्ट्रेशन में आधार-आधारित ओटीपी सत्यापन के साथ-साथ व्यावसायिक पते के दस्तावेज़ — जैसे बिजली-पानी का बिल, रेंट एग्रीमेंट, एनओसी — अनिवार्य होते हैं। कई मामलों में कारोबार स्थल का भौतिक सत्यापन भी किया जाता है। भारद्वाज ने सवाल उठाया है कि इतनी कड़ी प्रक्रिया के बावजूद एक सरकारी पते पर 58 रजिस्ट्रेशन कैसे हुए।
क्या AAP पर पहले भी इस तरह के आरोप लगाए गए हैं?
भारद्वाज ने बताया कि 2022 के पंजाब चुनाव से पहले AAP पर खालिस्तानियों से फंड लेने के आरोप लगाए गए थे और दिल्ली चुनाव से पहले कथित शराब घोटाले का मुद्दा उठाया गया था। उनका दावा है कि बाद में अदालती प्रक्रियाओं में उन आरोपों को अपेक्षित बल नहीं मिला।
राष्ट्र प्रेस
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