दिल्ली जल संकट: 'आप' का आरोप — 30-40% इलाके प्रभावित, BJP सरकार ने PMO को भेजी झूठी रिपोर्ट
सारांश
मुख्य बातें
राजधानी नई दिल्ली में गहराते जल संकट ने सियासी रंग ले लिया है। आम आदमी पार्टी (AAP) ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) की दिल्ली सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि संकट की वास्तविक व्यापकता को छिपाकर प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) को भ्रामक रिपोर्ट सौंपी गई है। AAP के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने 29 मई को दावा किया कि सरकारी आँकड़ों में जानबूझकर फर्जीवाड़ा किया गया है।
आँकड़ों का विवाद
सौरभ भारद्वाज के अनुसार, सरकार यह दावा कर रही है कि दिल्ली के केवल 10 से 11 प्रतिशत इलाके जल संकट से प्रभावित हैं, जबकि उनका कहना है कि वास्तविकता में 30 से 40 प्रतिशत दिल्ली पानी की गंभीर किल्लत से जूझ रही है। उन्होंने माँग की कि दिल्ली के जल मंत्री उन इलाकों की पूरी सूची सार्वजनिक करें, जिनके आधार पर यह दावा किया जा रहा है।
भारद्वाज ने कहा कि यदि यह सूची सामने आती है, तो AAP ऐसे दर्जनों इलाकों के नाम उजागर कर सकती है जिन्हें कथित तौर पर जानबूझकर सूची से बाहर रखा गया है। यह आरोप सरकारी डेटा-प्रबंधन पर एक सीधी चुनौती है।
ज़मीनी हालात
AAP नेताओं के अनुसार, राजधानी के कई इलाकों में पिछले करीब एक महीने से नियमित जलापूर्ति बाधित है। बुराड़ी से विधायक और AAP के वरिष्ठ नेता संजीव झा ने बताया कि कई कॉलोनियों में दिल्ली जल बोर्ड की सप्लाई 20 दिनों से अधिक समय से ठप पड़ी है। लोगों को पानी के टैंकरों के लिए लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ रहा है।
मुख्यमंत्री की अपील पर निशाना
संजीव झा ने कहा कि मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया पर लोगों से पक्षियों के लिए पानी रखने की अपील की है — जिसे उन्होंने एक सकारात्मक पहल तो माना, लेकिन साथ ही तीखा सवाल उठाया कि जब दिल्लीवासियों को खुद पीने का पानी नसीब नहीं, तब यह प्राथमिकता किस तर्क पर टिकी है। उनका आरोप है कि सरकार 'फोटो और रील की राजनीति' में व्यस्त है, जबकि जनता बुनियादी ज़रूरत के लिए संघर्ष कर रही है।
सरकार पर जवाबदेही का दबाव
भारद्वाज ने आरोप लगाया कि सरकार न केवल दिल्ली की जनता को गुमराह कर रही है, बल्कि PMO को भी वास्तविक हालात से अनजान रख रही है। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब गर्मी के मौसम में दिल्ली में पानी की माँग अपने चरम पर होती है और हर साल जल-वितरण व्यवस्था की खामियाँ सामने आती हैं। AAP ने सरकार से पारदर्शी डेटा और तत्काल राहत कार्रवाई की माँग की है।
आगे क्या
AAP ने संकेत दिया है कि यदि जल मंत्री ने प्रभावित इलाकों की सूची सार्वजनिक नहीं की, तो पार्टी स्वयं ऐसे क्षेत्रों की सूची जारी करेगी जो कथित तौर पर सरकारी रिपोर्ट में नज़रअंदाज़ किए गए हैं। दिल्ली जल संकट पर यह सियासी टकराव आने वाले दिनों में और तेज़ होने के आसार हैं।