पश्चिम बंगाल: मानक उल्लंघन पर 275 बीएड कॉलेज अयोग्य, 2026-27 में प्रवेश पर रोक
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल सरकार ने 5 नवंबर 2026 को 275 बीएड कॉलेजों को 'अयोग्य' घोषित करते हुए उन्हें शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए नए छात्रों के प्रवेश से वंचित कर दिया है। ये सभी कॉलेज उच्च शिक्षा विभाग द्वारा निर्धारित गुणवत्ता मानकों को पूरा करने में विफल रहे। राज्य के उच्च शिक्षा मंत्री जगन्नाथ चट्टोपाध्याय ने बताया कि मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली नई सरकार के सत्ता संभालते ही यह स्पष्ट कर दिया गया था कि शिक्षा का व्यवसायीकरण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
निरीक्षण अभियान और दो चरणों की प्रक्रिया
उच्च शिक्षा और तकनीकी शिक्षा विभाग ने संयुक्त रूप से राज्यभर के बीएड, आईटीआई, पॉलिटेक्निक और फार्मा कॉलेजों में व्यापक निरीक्षण अभियान चलाया। पहले चरण में 156 बीएड कॉलेजों को प्रवेश की अनुमति दी गई, जबकि मानकों पर खरे न उतरने वाले करीब 415 कॉलेजों को बुनियादी ढाँचे में सुधार के लिए 21 दिन का कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। इनमें से 9 कॉलेजों ने नोटिस का कोई जवाब तक नहीं दिया।
दूसरे दौर के निरीक्षण के बाद 237 बीएड कॉलेजों को 2026-27 सत्र के लिए छात्र प्रवेश की हरी झंडी मिली। परंतु शेष 205 कॉलेज गुणवत्ता मानकों की कसौटी पर खरे नहीं उतरे, जिसके चलते उनमें नए नामांकन पर प्रतिबंध लगा दिया गया।
अन्य तकनीकी संस्थानों पर भी गिरी गाज
मंत्री चट्टोपाध्याय ने बताया कि यह कार्रवाई केवल बीएड कॉलेजों तक सीमित नहीं है। 265 आईटीआई में से 14, 134 फार्मा कॉलेजों में से 38 और 74 पॉलिटेक्निक संस्थानों में से 1 में भी प्रवेश प्रक्रिया निलंबित कर दी गई है। गौरतलब है कि यह कार्रवाई ऐसे समय में आई है जब पश्चिम बंगाल में पिछले कुछ वर्षों में बड़ी संख्या में निजी व्यावसायिक शिक्षण संस्थान खुले थे, जिनमें से कई पर बुनियादी ढाँचे और शिक्षकों की उपलब्धता को लेकर पहले से सवाल उठते रहे हैं।
छात्रों और कर्मचारियों पर असर
इस निर्णय का सीधा असर इन संस्थानों में पढ़ रहे मौजूदा छात्रों और कार्यरत कर्मचारियों पर पड़ सकता है। बंगाली शिक्षक एवं शिक्षा कर्मी संघ के महासचिव स्वप्न मंडल ने चिंता जताते हुए कहा कि यदि एक साथ 275 बीएड कॉलेज बंद होते हैं, तो यह शिक्षा क्षेत्र के लिए बड़ी समस्या बन जाएगी। उन्होंने कहा कि इतने बड़े पैमाने पर बंदी से इन संस्थानों से जुड़े कर्मचारियों और छात्रों का भविष्य अनिश्चित हो जाएगा और इससे राज्य में योग्य शिक्षक अभ्यर्थियों की भी कमी पैदा हो सकती है।
मंडल ने राज्य सरकार से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप कर समाधान निकालने की माँग की है।
सरकार का रुख और आगे की राह
उच्च शिक्षा मंत्री चट्टोपाध्याय ने स्पष्ट किया कि सरकार शिक्षा की गुणवत्ता से किसी भी कीमत पर समझौता नहीं करेगी। यह राज्य में शिक्षा क्षेत्र की निगरानी को लेकर नई सरकार का पहला बड़ा प्रशासनिक कदम माना जा रहा है। आने वाले दिनों में अयोग्य घोषित संस्थानों को लेकर अपीलीय प्रक्रिया और छात्रों के स्थानांतरण की नीति पर सरकार की स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।