चीनी प्रधानमंत्री ली छ्यांग ने WIPO महानिदेशक डारेन थांग से बीजिंग में की मुलाकात
सारांश
मुख्य बातें
चीनी प्रधानमंत्री ली छ्यांग ने 5 नवंबर 2026 को बीजिंग स्थित जन वृहद भवन में विश्व बौद्धिक संपदा संगठन (WIPO) के महानिदेशक डारेन थांग से औपचारिक मुलाकात की। यह बैठक ऐसे समय हुई है जब वैश्विक नवाचार प्रतिस्पर्धा और बौद्धिक संपदा अधिकारों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गहमागहमी बढ़ रही है।
बैठक में क्या हुआ
ली छ्यांग ने बैठक में कहा कि हाल के वर्षों में चीन और WIPO ने वैश्विक बौद्धिक संपदा सेवाओं, सूचना प्रौद्योगिकी और मानव संसाधन जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय सहयोग किया है। उन्होंने रेखांकित किया कि विश्व अर्थव्यवस्था इस समय धीमी वृद्धि के दौर से गुज़र रही है, और ऐसे में बौद्धिक संपदा अधिकार नवाचार को प्रोत्साहित करने तथा विकास को सशक्त बनाने की एक मूलभूत गारंटी के रूप में तेज़ी से महत्वपूर्ण होते जा रहे हैं।
चीन की प्रतिबद्धता
ली छ्यांग ने स्पष्ट किया कि चीन, राष्ट्रपति शी चिनफिंग की बौद्धिक संपदा अधिकारों पर दी गई महत्वपूर्ण दिशा-निर्देशों को गंभीरता से लागू करेगा। इसके साथ ही चीन, WIPO के साथ द्विपक्षीय सहयोग को और गहरा व मज़बूत करने, बौद्धिक संपदा के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सहयोग को प्रोत्साहित करने और वैश्विक नवाचार तथा साझा समृद्धि में अधिक योगदान देने के लिए तत्पर है।
WIPO महानिदेशक का आकलन
महानिदेशक डारेन थांग ने बौद्धिक संपदा के क्षेत्र में चीन की उपलब्धियों की सराहना की। उन्होंने बताया कि चीन वर्तमान में वैश्विक नवाचार सूचकांक (Global Innovation Index) के शीर्ष दस देशों में शामिल है और दुनिया के शीर्ष 100 नवाचार समूहों में सर्वाधिक हिस्सेदारी चीन की है। इसके अलावा, फिल्म और गेमिंग जैसी रचनात्मक अर्थव्यवस्थाओं में भी चीन का विस्तार तेज़ी से हो रहा है।
वैश्विक संदर्भ में महत्व
गौरतलब है कि यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब बौद्धिक संपदा को लेकर अमेरिका-चीन व्यापार तनाव की पृष्ठभूमि अभी पूरी तरह शांत नहीं हुई है। थांग ने कहा कि बौद्धिक संपदा विकास में चीन का अनुभव अन्य विकासशील देशों के लिए बहुमूल्य सबक प्रदान करता है। यह टिप्पणी ऐसे समय में उल्लेखनीय है जब WIPO विकासशील देशों में नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को मज़बूत करने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।
आगे क्या
दोनों पक्षों ने आगामी समय में बौद्धिक संपदा सेवाओं और मानव संसाधन विकास के क्षेत्र में सहयोग को और विस्तार देने पर सहमति व्यक्त की। विशेषज्ञों के अनुसार, यह बैठक चीन की वैश्विक बौद्धिक संपदा नेतृत्व की महत्वाकांक्षाओं को और पुख्ता करती है।