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चीनी उप प्रधानमंत्री तिंग शुएश्यांग ने अंतर्राष्ट्रीय विज्ञान परिषद के विदेशी प्रतिनिधियों से की मुलाकात

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चीनी उप प्रधानमंत्री तिंग शुएश्यांग ने अंतर्राष्ट्रीय विज्ञान परिषद के विदेशी प्रतिनिधियों से की मुलाकात

सारांश

चीन के उप प्रधानमंत्री तिंग शुएश्यांग ने 21 अक्टूबर को बीजिंग में अंतर्राष्ट्रीय विज्ञान परिषद के प्रतिनिधियों से मुलाकात की और विज्ञान को 'मानवता की साझा संपत्ति' बताते हुए खुले वैश्विक वैज्ञानिक सहयोग का आह्वान किया।

मुख्य बातें

चीन के उप प्रधानमंत्री तिंग शुएश्यांग ने 21 अक्टूबर 2026 को बीजिंग में अंतर्राष्ट्रीय विज्ञान परिषद के विदेशी प्रतिनिधियों से भेंट की।
तिंग ने विज्ञान और प्रौद्योगिकी को मानवता की साझा संपत्ति बताया और खुले सहयोग को अपरिहार्य विकल्प कहा।
बैठक 2026 अंतर्राष्ट्रीय विज्ञान परिषद की मध्यावधि सदस्यता सभा और बीजिंग विज्ञान संवाद के दौरान हुई।
परिषद के अध्यक्ष पीटर ग्लकमैन ने चीन की वैज्ञानिक उपलब्धियों की सराहना करते हुए खुले सहयोग का समर्थन किया।
चीन ने संयुक्त अनुसंधान और वैज्ञानिक उपलब्धियों के सार्वभौमिक साझा लाभ को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता जताई।

चीन के उप प्रधानमंत्री तिंग शुएश्यांग ने 21 अक्टूबर 2026 को बीजिंग में 2026 अंतर्राष्ट्रीय विज्ञान परिषद की मध्यावधि सदस्यता सभा और बीजिंग विज्ञान संवाद में भाग लेने वाले विदेशी प्रतिनिधियों से भेंट की। चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीसी) की केंद्रीय समिति के पोलित ब्यूरो की स्थाई समिति के सदस्य तिंग ने इस अवसर पर वैश्विक वैज्ञानिक सहयोग को मज़बूत करने पर जोर दिया।

तिंग शुएश्यांग का संदेश

बैठक में तिंग शुएश्यांग ने कहा कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी मानवता की साझा संपत्ति है, और खुला सहयोग वैज्ञानिक एवं तकनीकी नवाचार का अपरिहार्य विकल्प है। उन्होंने कहा कि चीन सभी पक्षों के साथ मिलकर विज्ञान की मूल भावना पर कायम रहने और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।

तिंग ने खुली और समावेशी अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक आदान-प्रदान को सुगम बनाने पर भी बल दिया। साथ ही उन्होंने संयुक्त अनुसंधान के माध्यम से विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी की कठिन चुनौतियों का समाधान करने और आपसी लाभ के सहयोग के ज़रिए उपलब्धियों का वैश्विक लाभ सुनिश्चित करने की इच्छा जताई।

अंतर्राष्ट्रीय विज्ञान परिषद की प्रतिक्रिया

अंतर्राष्ट्रीय विज्ञान परिषद के अध्यक्ष पीटर ग्लकमैन और अन्य प्रतिनिधियों ने अपने संबोधन में चीन की वैज्ञानिक एवं तकनीकी नवाचार में उपलब्धियों की सराहना की। उन्होंने खुले वैज्ञानिक सहयोग के प्रति दृढ़ समर्थन व्यक्त किया, ताकि विज्ञान एक वास्तविक वैश्विक सार्वजनिक वस्तु बन सके और समस्त मानवता के साझा विकास में योगदान दे।

बैठक का व्यापक संदर्भ

यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब वैश्विक स्तर पर वैज्ञानिक सहयोग को लेकर भू-राजनीतिक तनावों के बीच नए सिरे से संवाद की कोशिशें हो रही हैं। गौरतलब है कि अंतर्राष्ट्रीय विज्ञान परिषद दुनिया भर के वैज्ञानिक संगठनों को एक मंच पर लाती है और बहुपक्षीय शोध सहयोग को बढ़ावा देती है।

चीन की ओर से इस उच्च-स्तरीय भेंट को बहुपक्षीय वैज्ञानिक मंचों में अपनी सक्रिय भागीदारी के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। आने वाले समय में दोनों पक्षों के बीच संयुक्त शोध पहलों पर और आगे बढ़ने की संभावना बताई जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

क्योंकि अतीत में भी ऐसे उच्च-स्तरीय वादे कागज़ों पर ही सिमटे रहे हैं।
RashtraPress
23 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तिंग शुएश्यांग कौन हैं?
तिंग शुएश्यांग चीन के उप प्रधानमंत्री और चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीसी) की केंद्रीय समिति के पोलित ब्यूरो की स्थाई समिति के सदस्य हैं। वे चीन की शीर्ष नीति-निर्माण संस्था के प्रमुख सदस्यों में से एक हैं।
अंतर्राष्ट्रीय विज्ञान परिषद क्या है?
अंतर्राष्ट्रीय विज्ञान परिषद (International Science Council) एक वैश्विक संगठन है जो दुनिया भर के वैज्ञानिक संगठनों को एकजुट करती है और बहुपक्षीय शोध सहयोग को प्रोत्साहन देती है। इसके अध्यक्ष पीटर ग्लकमैन हैं।
बीजिंग विज्ञान संवाद और मध्यावधि सदस्यता सभा कब हुई?
यह आयोजन 21 अक्टूबर 2026 को बीजिंग में हुआ, जिसमें अंतर्राष्ट्रीय विज्ञान परिषद की 2026 मध्यावधि सदस्यता सभा और बीजिंग विज्ञान संवाद एक साथ आयोजित किए गए।
चीन ने वैश्विक वैज्ञानिक सहयोग पर क्या रुख अपनाया?
चीन ने विज्ञान और प्रौद्योगिकी को मानवता की साझा संपत्ति बताते हुए खुले और समावेशी अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक आदान-प्रदान का समर्थन किया। तिंग शुएश्यांग ने संयुक्त अनुसंधान और वैज्ञानिक उपलब्धियों के वैश्विक साझा लाभ को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता जताई।
अंतर्राष्ट्रीय विज्ञान परिषद ने चीन पर क्या कहा?
परिषद के अध्यक्ष पीटर ग्लकमैन और अन्य प्रतिनिधियों ने चीन की वैज्ञानिक एवं तकनीकी नवाचार में उपलब्धियों की सराहना की। उन्होंने यह भी कहा कि खुले सहयोग से विज्ञान एक वास्तविक वैश्विक सार्वजनिक वस्तु बन सकती है।
राष्ट्र प्रेस
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