21 अक्टूबर 2026
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SCO की 25वीं बैठक दुशांबे में: चीनी PM ली छ्यांग ने संयुक्त विज्ञप्ति पर किए हस्ताक्षर

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SCO की 25वीं बैठक दुशांबे में: चीनी PM ली छ्यांग ने संयुक्त विज्ञप्ति पर किए हस्ताक्षर

सारांश

दुशांबे में SCO की 25वीं परिषद बैठक में चीनी PM ली छ्यांग ने 'शांगहाई भावना' को मज़बूत करने का आह्वान किया। व्यापार, निवेश और कनेक्टिविटी पर संयुक्त विज्ञप्ति के साथ यह बैठक SCO के आर्थिक एजेंडे को नई गति देने वाली साबित हो सकती है।

मुख्य बातें

चीनी प्रधानमंत्री ली छ्यांग ने 20 अक्टूबर 2026 को दुशांबे में SCO परिषद की 25वीं बैठक में भाग लिया।
बैठक की अध्यक्षता ताजिकिस्तान के प्रधानमंत्री कोहिर रसूलजोदा ने की।
यह वर्ष SCO की स्थापना की 25वीं वर्षगांठ है; सितंबर में बिश्केक शिखर सम्मेलन भी आयोजित हुआ था।
बैठक के अंत में व्यापार, निवेश और कनेक्टिविटी पर संयुक्त विज्ञप्ति और सहयोग दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर किए गए।
सभी पक्षों ने 'शांगहाई भावना' को बढ़ावा देने और SCO के उच्च गुणवत्ता वाले विकास के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई।

चीनी प्रधानमंत्री ली छ्यांग ने 20 अक्टूबर 2026 को ताजिकिस्तान की राजधानी दुशांबे में आयोजित शांगहाई सहयोग संगठन (SCO) सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्षों एवं प्रधानमंत्रियों की परिषद की 25वीं बैठक में सक्रिय रूप से भाग लिया। इस बैठक की अध्यक्षता ताजिकिस्तान के प्रधानमंत्री कोहिर रसूलजोदा ने की और इसमें SCO सदस्य देशों के नेताओं, प्रतिनिधियों तथा संबंधित अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रमुखों ने भाग लिया।

बैठक का महत्व और संदर्भ

ली छ्यांग ने अपने संबोधन में रेखांकित किया कि यह वर्ष SCO की स्थापना की 25वीं वर्षगांठ का विशेष अवसर है। उन्होंने कहा कि सितंबर में आयोजित बिश्केक शिखर सम्मेलन ने कई महत्वपूर्ण परिणाम हासिल किए, जिससे क्षेत्रीय शांति और विकास को नई गति प्राप्त हुई। साथ ही उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि इस समय वैश्विक स्तर पर अस्थिरता और अनिश्चितता में वृद्धि हो रही है।

गौरतलब है कि SCO की स्थापना 2001 में हुई थी और अब इसमें भारत, चीन, रूस, पाकिस्तान सहित कई प्रमुख देश शामिल हैं। यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब बहुपक्षीय मंचों पर वैश्विक दक्षिण की आवाज़ और प्रभाव लगातार बढ़ रहा है।

शी चिनफिंग का आह्वान

बिश्केक शिखर सम्मेलन में चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने जोर देकर कहा था कि मानव जाति के भविष्य से जुड़े एक निर्णायक मोड़ पर खड़े होकर SCO को अपनी ऐतिहासिक जिम्मेदारियाँ साहसपूर्वक निभानी चाहिए और इतिहास की दिशा तय करने के लिए पहल करनी चाहिए। उनके अनुसार, इसके लिए दृष्टिकोण और अवधारणाओं के स्तर पर व्यापक सहमति बनाने के साथ-साथ कार्यान्वयन स्तर पर ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है।

सदस्य देशों की सहमति

बैठक में उपस्थित सभी पक्षों ने एकमत होकर माना कि पिछले 25 वर्षों में SCO अधिक सशक्त और वैश्विक स्तर पर प्रभावशाली संगठन बन गया है। सभी पक्षों ने थ्येनचिन शिखर सम्मेलन और बिश्केक शिखर सम्मेलन के परिणामों को सक्रियता के साथ लागू करने, 'शांगहाई भावना' को और अधिक मज़बूत करने तथा संचार व सहयोग को गहरा बनाने पर बल दिया।

यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिमी नेतृत्व वाली वैश्विक व्यवस्था को उभरती अर्थव्यवस्थाओं से बढ़ती चुनौती मिल रही है और SCO जैसे मंच वैकल्पिक बहुपक्षीय ढाँचे के रूप में अपनी प्रासंगिकता साबित कर रहे हैं।

संयुक्त विज्ञप्ति और सहयोग दस्तावेज़

बैठक की समाप्ति पर ली छ्यांग ने सदस्य देशों के नेताओं के साथ मिलकर एक संयुक्त विज्ञप्ति पर हस्ताक्षर किए। इस विज्ञप्ति में व्यापार और निवेश, उद्योग तथा कनेक्टिविटी जैसे प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग से जुड़े दस्तावेज़ों को मंज़ूरी दी गई। इसके अलावा SCO के संगठनात्मक निर्माण से संबंधित महत्वपूर्ण प्रस्तावों को भी औपचारिक रूप से स्वीकृति प्रदान की गई।

आगे क्या होगा

दुशांबे बैठक के निर्णयों को अमलीजामा पहनाने की ज़िम्मेदारी अब सदस्य देशों की सरकारों पर है। व्यापार, निवेश और कनेक्टिविटी के क्षेत्र में हस्ताक्षरित दस्तावेज़ SCO के आर्थिक एजेंडे को नई दिशा दे सकते हैं। आलोचकों का कहना है कि ऐसी बैठकों की घोषणाओं का ज़मीनी क्रियान्वयन अक्सर अपेक्षाओं से पीछे रह जाता है, लेकिन इस बार व्यापार मील के पत्थरों से जुड़े दस्तावेज़ों पर ज़ोर दिया गया है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि व्यापार और कनेक्टिविटी के ये दस्तावेज़ ज़मीन पर कितनी तेज़ी से क्रियान्वित होंगे। SCO बार-बार 'शांगहाई भावना' का आह्वान करता है, फिर भी भारत-पाकिस्तान और भारत-चीन के द्विपक्षीय तनाव इसकी व्यावहारिक सीमाएँ उजागर करते रहे हैं। यह बैठक ऐसे वक्त हो रही है जब चीन SCO को अपने 'बेल्ट एंड रोड' आख्यान के पूरक के रूप में देखता है, जबकि भारत जैसे सदस्य देश संगठन की बहुपक्षीय स्वायत्तता पर ज़ोर देते हैं। बिना बाध्यकारी क्रियान्वयन तंत्र के, ये विज्ञप्तियाँ अच्छे इरादों की लंबी सूची में एक और प्रविष्टि बनकर रह सकती हैं।
RashtraPress
21 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

SCO परिषद की 25वीं बैठक कहाँ और कब हुई?
SCO सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्षों एवं प्रधानमंत्रियों की परिषद की 25वीं बैठक 20 अक्टूबर 2026 को ताजिकिस्तान की राजधानी दुशांबे में आयोजित हुई। इसकी अध्यक्षता ताजिकिस्तान के प्रधानमंत्री कोहिर रसूलजोदा ने की।
बैठक में ली छ्यांग ने क्या कहा?
ली छ्यांग ने कहा कि यह वर्ष SCO की 25वीं वर्षगांठ है और बिश्केक शिखर सम्मेलन ने क्षेत्रीय शांति व विकास को नई गति दी है। उन्होंने वैश्विक अस्थिरता के बीच 'शांगहाई भावना' को और मज़बूत करने और SCO के उच्च गुणवत्ता वाले विकास पर ज़ोर दिया।
SCO की इस बैठक में क्या निर्णय लिए गए?
बैठक के बाद सभी नेताओं ने एक संयुक्त विज्ञप्ति पर हस्ताक्षर किए, जिसमें व्यापार और निवेश, उद्योग तथा कनेक्टिविटी के क्षेत्र में सहयोग दस्तावेज़ों को मंज़ूरी दी गई। इसके अलावा SCO के संगठनात्मक निर्माण से जुड़े प्रस्तावों को भी औपचारिक स्वीकृति मिली।
शांगहाई सहयोग संगठन (SCO) क्या है?
SCO एक बहुपक्षीय अंतरसरकारी संगठन है जिसकी स्थापना 2001 में हुई थी। इसमें भारत, चीन, रूस, पाकिस्तान, कज़ाखस्तान, किर्गिज़स्तान, ताजिकिस्तान और उज़्बेकिस्तान सहित कई प्रमुख देश सदस्य हैं, और यह क्षेत्रीय सुरक्षा, आर्थिक सहयोग एवं सांस्कृतिक संपर्क को बढ़ावा देता है।
बिश्केक शिखर सम्मेलन का SCO की इस बैठक से क्या संबंध है?
सितंबर 2026 में किर्गिज़स्तान के बिश्केक में आयोजित SCO शिखर सम्मेलन में कई महत्वपूर्ण परिणाम हासिल हुए थे। दुशांबे की परिषद बैठक उसी के परिणामों को क्रियान्वित करने और आगामी कदमों पर सहमति बनाने के लिए आयोजित की गई।
राष्ट्र प्रेस
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