दिग्विजय सिंह का ऐलान: 'मैं घोर सनातन धर्म का मानने वाला हूं', भाजपा नेता उषा ठाकुर से तीखी नोकझोंक
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने एक बार फिर सार्वजनिक रूप से घोषणा की है कि वे 'घोर सनातन धर्म' के अनुयायी हैं। भाजपा नेता उषा ठाकुर के साथ उनकी बातचीत का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हो रहा है, जिसमें दोनों नेताओं के बीच सनातन धर्म को लेकर तीखी नोकझोंक देखने को मिलती है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब सनातन धर्म का मुद्दा राष्ट्रीय राजनीति में लगातार गर्म बना हुआ है।
वायरल वीडियो में क्या हुआ
वायरल वीडियो में दिग्विजय सिंह स्पष्ट शब्दों में कहते हैं, 'मैं घोषणा करता आया हूं और आज फिर कह रहा हूं कि मैं घोर सनातन धर्म का मानने वाला हूं।' उन्होंने यह भी दावा किया कि 'सनातन धर्म' पद का प्रयोग उन्होंने पहले शुरू किया था — उनके अनुसार, 'मेरे कहने के बाद ही आपने सनातन धर्म को स्वीकार किया, पहले आप लोग सिर्फ हिंदू-हिंदू करते थे।'
वीडियो में उषा ठाकुर ने दिग्विजय सिंह को 'बड़े भाई' कहते हुए संबोधित किया। इस पर सिंह ने पलटवार करते हुए कहा कि वे सनातन धर्म के विरोधी नहीं हैं और उन्होंने नर्मदा परिक्रमा तथा एकादशी व्रत जैसी धार्मिक परंपराओं का पालन करने का भी उल्लेख किया।
उषा ठाकुर का पलटवार
उषा ठाकुर ने कहा कि 'हम अनादि काल से सनातनी हैं।' इस पर दिग्विजय सिंह ने कहा, 'अनादि काल से सनातनी तो तुम हो। हम उसके दुश्मन नहीं हैं। मैं जितना सनातनी हूं, क्या तुम हो?' उन्होंने उषा ठाकुर से सीधे पूछा कि क्या उन्होंने नर्मदा परिक्रमा की है और क्या वे एकादशी का व्रत करती हैं।
इस तर्क-वितर्क में ठाकुर ने स्वीकार किया कि दिग्विजय सिंह 'व्यक्तिगत रूप से पक्के सनातनी हैं', लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि वे इसे 'सार्वजनिक रूप से स्वीकार नहीं करते।' इस पर सिंह ने कहा, 'मैं सार्वजनिक रूप से कह तो रहा हूं और कैसे सार्वजनिक करूं।'
हाईकोर्ट के निर्णय पर टकराव
बातचीत के अंत में उषा ठाकुर ने कहा कि यदि दिग्विजय सिंह सनातनी हैं तो उन्हें हाईकोर्ट के निर्णय का सम्मान करना चाहिए। इस पर दिग्विजय सिंह ने पलटवार करते हुए कहा, 'आपने कैसे मान लिया कि मैंने विरोध किया।' यह टिप्पणी बातचीत में एक नया मोड़ लेकर आई और दोनों नेताओं के बीच तनाव स्पष्ट रूप से दिखा।
राजनीतिक संदर्भ
गौरतलब है कि दिग्विजय सिंह कांग्रेस के उन नेताओं में से हैं जो धार्मिक पहचान और राजनीतिक छवि के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करते रहे हैं। यह पहली बार नहीं है जब उन्होंने सनातन धर्म के प्रति अपनी आस्था सार्वजनिक रूप से व्यक्त की हो। इससे पहले भी उनके ऐसे बयान विवाद का कारण बने हैं। आलोचकों का कहना है कि यह राजनीतिक पैंतरेबाज़ी है, जबकि समर्थक इसे उनकी व्यक्तिगत आस्था का प्रतिबिंब मानते हैं।
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब सनातन धर्म को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच वाकयुद्ध तेज़ हो गया है। आने वाले दिनों में इस बयान पर और प्रतिक्रियाएँ आने की संभावना है।